fake IAS officer गोरखपुर जंक्शन पर पकड़े गए 99 लाख के मामले में बड़ा खुलासा। फर्जी IAS ने मोकामा व्यापारी को लौटाए रुपये, पुलिस की खोज तेज हुई।
गोरखपुर जंक्शन से सामने आया फर्जी IAS का यह मामला पूरे उत्तर भारत को हिला रहा है। शुक्रवार को रेलवे स्टेशन से जब पुलिस ने एक व्यक्ति को 99.09 लाख रुपये के साथ पकड़ा, तो शुरुआत में सबको लगा कि यह कोई तस्करी या हवाला का मामला है। लेकिन जांच जैसे जैसे आगे बढ़ी, कहानी पूरी तरह पलट गई। यह रकम एक फर्जी आईएएस की ठगी से जुड़ी निकली, जिसने बिहार के व्यापारी से करोड़ों रुपये ऐंठे और फिर एक हिस्सा वापस कर दिया।
fake IAS officer मोकामा व्यापारी के साथ हुआ बड़ा खेल, फर्जी IAS ने ऐसे रची ठगी की कहानी
fake IAS officer बिहार के मोकामा निवासी व्यापारी माधव मुकुंद ने पुलिस को बताया कि वह गोरखपुर एक ठेका लेने आया था। वहीं उसकी मुलाकात एक फर्जी आईएएस अधिकारी से हुई, जिसने खुद को सरकारी प्रोजेक्ट का बड़ा अधिकारी बताया। विश्वास में लेकर उसने माधव से दो करोड़ रुपये और दो लग्जरी गाड़ियां ठेके के नाम पर ले लीं। जब ठेका नहीं मिला तो व्यापारी ने अपने रुपये लौटाने के लिए दबाव बनाया। लंबे प्रयासों के बाद फर्जी आईएएस ने एक करोड़ रुपये वापस किए।
इन्हीं पैसों को लेकर व्यापारी वैशाली एक्सप्रेस से पटना लौट रहा था, तभी गोरखपुर जंक्शन पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। जांच में सच्चाई सामने आई कि यह रकम किसी अपराध की नहीं, बल्कि ठगी में वापस किए गए रुपये थे। फिलहाल व्यापारी को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है और अब आयकर विभाग में प्रक्रिया चल रही है।
फर्जी IAS की तलाश में बिहार मध्य प्रदेश पुलिस की बड़ी कार्रवाई
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह फर्जी IAS सिर्फ यूपी में नहीं बल्कि मध्य प्रदेश और बिहार में भी लोगों को ठग चुका है। कुसम्ही क्षेत्र के एक व्यक्ति ने कुछ समय पहले उसकी शिकायत की थी। उसने बताया था कि यह व्यक्ति सरकारी परियोजनाओं के नाम पर ठेकेदारों से वसूली करता था और खुद को फर्जी आईएएस अधिकारी बताकर डराता था। पुलिस को उस ठग के कई वीडियो और फोटो सबूत भी मिले हैं, जिनमें वह सरकारी बैठकों और निरीक्षण स्थलों पर मौजूद दिखता है। इन सबूतों से यह साफ है,कि वह लंबे समय से सिस्टम को धोखा दे रहा था। अब उसका मोबाइल फोन बंद है, और पुलिस की कई टीमें उसे पकड़ने में जुटी हैं।
AI तकनीक से बनाता था झूठी खबरें, फर्जी IAS की डिजिटल चालाकी
तकनीकी जांच में यह भी सामने आया है, कि फर्जी आईएएस आधुनिक तकनीक का माहिर खिलाड़ी था। वह AI technology की मदद से अखबारों जैसी खबरें तैयार करता था और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करता था। इन फर्जी खबरों में लिखा होता “अफसर ने निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया” या “अधिकारी ने बैठक ली”।लोग जब ये स्क्रीनशॉट देखते, तो उन्हें यकीन हो जाता कि वह असली IAS अधिकारी है। यही उसकी सबसे बड़ी चाल थी AI के ज़रिए झूठ को सच दिखाना। इस वजह से वह कई महीनों तक सबको बेवकूफ बनाता रहा और ठगी का जाल फैलाता रहा। पुलिस अब उसके डिजिटल अकाउंट की गहराई से जांच कर रही है।
fake IAS officer अफसरों के केबिन में फोटो खिंचवाकर बनाता था सरकारी रुतबा
पुलिस यह जानने में जुटी है, कि फर्जी आईएएस ने आखिर कैसे असली अफसरों के चेंबर में जाकर फोटो खिंचवा लीं। शुरुआती जांच से पता चला है, कि वह सरकारी भवनों में प्रवेश कर अफसरों की अनुपस्थिति में कुर्सी पर बैठकर फोटो खिंचवाता था। पीछे लगे बोर्डों पर असली अफसरों के नाम देखकर लोग उसे असली अधिकारी मान लेते थे। यही नहीं, वह अपनी गाड़ियों पर नीली बत्ती और सरकारी लोगो भी लगाता था, जिससे उसकी पहचान और विश्वसनीय लगती थी। यह सब देखकर कोई भी सामान्य व्यक्ति उसे फर्जी नहीं समझ पाता। अब पुलिस जांच कर रही है,कि क्या उसे किसी अंदरूनी नेटवर्क से मदद मिल रही थी।
फर्जी IAS से सावधान रहें, लालच से नुकसान हो सकता है भारी
गोरखपुर पुलिस ने जनता से अपील की है, कि किसी भी व्यक्ति के सरकारी अधिकारी होने के दावे पर सत्यापन जरूर करें।
ऐसे मामलों में लालच और जल्द लाभ की इच्छा अक्सर भारी नुकसान करा देती है। फर्जी आईएएस जैसे ठग समाज में भरोसे को तोड़ते हैं, और ईमानदार अफसरों की छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि डिजिटल युग में दिखावे पर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है।
जांच एजेंसियों की सख्ती बढ़ी, मामला अब हाई लेवल पर
पुलिस, आयकर विभाग और डिजिटल क्राइम सेल तीनों एजेंसियां अब इस फर्जी आईएएस की तलाश में एक साथ काम कर रही हैं। यह केस अब राज्य से लेकर केंद्र स्तर तक पहुंच चुका है। जांच एजेंसियों को शक है, कि इस ठगी के पीछे बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।फिलहाल पुलिस ने व्यापारी को निर्दोष मानते हुए छोड़ दिया है, और फर्जी अफसर की तलाश तेज कर दी है। जांच अधिकारी मानते हैं, कि जल्द ही यह फर्जी आईएएस पुलिस के हत्थे चढ़ेगा और पूरे रैकेट का खुलासा होगा।
यह मामला सिर्फ एक ठगी की कहानी नहीं, बल्कि चेतावनी है, कि कोई व्यक्ति कितना बड़ा झूठ रच सकता है। फर्जी आईएएस जैसे लोग जनता के विश्वास का फायदा उठाते हैं। इसलिए ज़रूरी है, कि किसी भी सरकारी अफसर या प्रोजेक्ट से जुड़ी बात पर प्रमाण और सत्यापन को प्राथमिकता दी जाए। गोरखपुर की यह घटना एक सीख है, सावधान रहें, सच्चाई परखें और किसी भी “बड़े अफसर” के जाल में न फँसें।
डिस्क्लेमर: यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस जांच के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था की छवि को नुकसान पहुँचाना नहीं है। सभी तथ्य आधिकारिक पुष्टि और पुलिस जांच के बाद ही अंतिम रूप से माने जाएंगे।
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