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गोरखपुर में बड़ा Insurance Fraud खुलासा, बिना भर्ती मरीजों पर करोड़ों का घोटाला

गोरखपुर में Insurance Fraud का सबसे बड़ा खुलासा: बिना भर्ती मरीजों पर चल रहा था करोड़ों का खेल

 गोरखपुर में Insurance Fraud का बड़ा खुलासा। बिना भर्ती मरीजों के नाम पर फर्जी बिल, क्लेम पास, डॉक्टर हिरासत में। पूरा नेटवर्क पुलिस रडार पर।

इंसानियत के नाम पर धोखा  कैसे गोरखपुर में बढ़ता गया Insurance Fraud का खेल

गोरखपुर में बड़ा Insurance Fraud खुलासा, बिना भर्ती मरीजों पर करोड़ों का घोटाला

गोरखपुर में सामने आया Insurance Fraud का यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। पुलिस जांच में पता चला कि कई मरीज अस्पताल आए ही नहीं, लेकिन उन्हें भर्ती दिखाकर भारी भरकम मेडिकल बिल बनाकर बीमा और आयुष्मान कार्ड के क्लेम पास करवा दिए गए। आम आदमी की सुरक्षा के लिए बनाई गई हेल्थ इंस्योरेंस योजनाओं को ही ठगों ने कमाई का जरिया बना लिया।

रिपोर्ट के अनुसार डिसेंट अस्पताल में कई फाइलों में मरीजों को दो से तीन दिन का एडमिशन दिखाया गया, जबकि वे केवल कुछ मिनट की OPD जांच के बाद घर भेज दिए गए थे। इसी फर्जी प्रक्रिया के जरिए Insurance Fraud नेटवर्क लाखों रुपये तक का क्लेम पास करा रहा था। इस मामले ने लोगों के मन में यह डर भर दिया है,कि क्या अस्पताल में उनका भरोसा सुरक्षित है? क्या उनके नाम पर भी बिना जानकारी के बिल बनाकर क्लेम उठाया जा सकता है?

डॉक्टर हिरासत में  25 फर्जी फाइलों ने खोला Insurance Fraud का पूरा सच

पुलिस को बड़ी सफलता मिली जब भटहट के एक निजी क्लीनिक के डॉक्टर को हिरासत में लिया गया। यह डॉक्टर पहले डिसेंट अस्पताल में काम करता था और उसे वहां की क्लेम फाइलों तक पूरी पहुंच थी। पुलिस की जांच में 25 ऐसी फाइलें मिलीं जिन पर डॉक्टर के हस्ताक्षर मौजूद थे। इन फाइलों में मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और दवा सूची फर्जी पाई गई। जिस मरीज को अस्पताल आया तक नहीं बताया गया, उसे तीन दिन भर्ती दिखाया गया और फिर Insurance कंपनी से भारी क्लेम पास कराया गया।

डॉक्टर ने पूछताछ में स्वीकार किया कि कुछ फाइलों पर उसके हस्ताक्षर हैं, लेकिन उसने इसे ‘औपचारिक’ प्रक्रिया कहकर अपनी भूमिका कम बताने की कोशिश की। हालांकि पुलिस को शक है, कि यही डॉक्टर Insurance Fraud गिरोह का मुख्य हिस्सा रहा है। यह तथ्य सामने आते ही जिले के कई क्लीनिक और अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि पुलिस ने संदिग्धों की नई लिस्ट तैयार कर ली है।

कैसे चलता है Insurance Fraud का नेटवर्क  पुलिस की जांच में बड़ा खुलासा

जांच टीम के अनुसार यह नेटवर्क कई सालों से जिले में सक्रिय है। इसमें अस्पताल कर्मचारी, क्लीनिक संचालक, मेडिकल एजेंट और कुछ डॉक्टर शामिल हैं।

Insurance Fraud का पूरा तरीका इस तरह चलता था:

1. फर्जी मरीज की सूची तैयार की जाती थी।

2. OPD में कुछ मिनट की जांच के बाद उन्हें भर्ती दिखाया जाता था।

3. मेडिकल रिपोर्ट और दवाओं की लिस्ट नकली तैयार की जाती थी।

4. इन फाइलों को बीमा कंपनियों और Ayushman योजना में भेजकर क्लेम पास कराए जाते थे।

5. क्लेम की राशि कई खातों में बांट दी जाती थी।

इस रैकेट की जड़ें अब शहर से लेकर आसपास के कई गांवों तक फैल चुकी हैं। पुलिस का कहना है,कि इसी Insurance Fraud के जरिए लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये तक का भुगतान कराया जा चुका है। जांच तेज है,और जल्द ही कई बड़े नामों के सामने आने की संभावना भी जताई जा रही है।

पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई  बैंक डिटेल, CDR और नेटवर्क की पूरी मैपिंग

डॉक्टर को हिरासत में लेने के बाद पुलिस अब पूरे Insurance Fraud सिंडिकेट पर शिकंजा कस रही है। पुलिस बैंक खातों की जांच कर रही है,ताकि पता चले कि फर्जी क्लेम की रकम किस खाते में गई, किसने निकाला और कहाँ खर्च की गई।
मोबाइल कॉल डिटेल (CDR) भी खंगाली जा रही है,ताकि नेटवर्क के अंदर की बातचीत और कनेक्शन उजागर हो सकें। पुलिस की प्रारंभिक जांच में कई प्राइवेट अस्पतालों, क्लीनिकों और एजेंटों के नाम उभरकर सामने आए हैं।

एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने कहा है कि “Insurance Fraud में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। जल्द ही पूरा रैकेट पकड़ा जाएगा।”इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में हलचल बढ़ गई है। कई अस्पताल अपने पुराने रिकॉर्ड को लेकर चिंतित हैं,और कुछ ने रिकॉर्ड छिपाने की कोशिश भी की है।
यह स्पष्ट है,कि पुलिस अब किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी, क्योंकि यह मामला आम जनता की सेहत और सरकारी योजनाओं से छेड़छाड़ का है।

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 Insurance Fraud से सिर्फ सिस्टम नहीं, आम आदमी का भरोसा टूट रहा

गोरखपुर का यह मामला केवल एक घोटाला नहीं, बल्कि एक चेतावनी है, कि स्वास्थ्य योजनाओं का गलत इस्तेमाल कितनी गंभीर समस्या बन चुका है। Insurance Fraud की वजह से असली मरीजों को मिलने वाली राशि और हेल्थ सुविधाओं पर असर पड़ता है। सरकारी योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत का लक्ष्य गरीबों को राहत देना है, लेकिन जब इन्हीं योजनाओं का दुरुपयोग फर्जी दस्तावेजों से किया जाता है, तो यह पूरी व्यवस्था के लिए खतरनाक है। उम्मीद है, कि पुलिस की कार्रवाई से यह नेटवर्क टूटेगा और गोरखपुर समेत पूरे प्रदेश में चल रहे ऐसे Insurance Fraud पर रोक लगेगी। आम जनता का भरोसा तभी लौटेगा जब दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध पुलिस रिपोर्ट, प्रारंभिक जांच और मीडिया इनपुट पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष केवल जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। इस आर्टिकल का उद्देश्य केवल जानकारी देना है, किसी भी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं।

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