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Railway Fake Recruitment Scam: 2000 करोड़ के घोटाले में ED की गोरखपुर सहित कई राज्यों में छापेमारी, मास्टरमाइंड फरार

Railway Fake Recruitment Scam: 2000 करोड़ के रेलवे फर्जी भर्ती घोटाले में ED की गोरखपुर सहित कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी, मास्टरमाइंड राघवेंद्र शुक्ला फरार

Railway Fake Recruitment Scam में ED ने बिहार, यूपी समेत कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की। गोरखपुर से मास्टरमाइंड राघवेंद्र शुक्ला फरार, नेपाल कनेक्शन और रेल अधिकारियों की भूमिका की जांच तेज।

मुजफ्फरपुर/गोरखपुर। देशभर में फैले रेलवे के सबसे बड़े फर्जी भर्ती नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कस दिया है। गुरुवार को ईडी ने बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में एक साथ छापेमारी कर Railway Fake Recruitment Scam की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश तेज कर दी। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई का मुख्य निशाना घोटाले का मास्टरमाइंड बताए जा रहे राघवेंद्र शुक्ला हैं, जो गोरखपुर जिले के बांसगांव थाना क्षेत्र के फुलहर गांव से फरार हो गया।

Railway Fake Recruitment Scam: 2000 करोड़ के घोटाले में ED की गोरखपुर सहित कई राज्यों में छापेमारी, मास्टरमाइंड फरार

गोरखपुर में दबिश से पहले ही फरार हुआ राघवेंद्र शुक्ला

ईडी सूत्रों के अनुसार, पटना जोन की टीम ने गोरखपुर के फुलहर गांव स्थित राघवेंद्र शुक्ला के आवास पर छापेमारी की। हालांकि, कार्रवाई की भनक लगते ही वह मौके से फरार हो गया। इसके बावजूद ईडी की टीम ने उसके पूरे आवासीय परिसर की गहन तलाशी ली और इस दौरान परिवार के सदस्यों को बाहर नहीं निकलने दिया गया। टीम ने दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और संदिग्ध लेन देन से जुड़े साक्ष्य खंगाले। यह कार्रवाई Railway Fake Recruitment Scam की जांच में अहम कड़ी मानी जा रही है।

नेपाल कनेक्शन, रेल अफसर और सफेदपोशों की भूमिका की जांच

ईडी अब राघवेंद्र शुक्ला की संपत्तियों के साथ साथ उसके नेपाल कनेक्शन, रेलवे के कुछ अधिकारियों और कथित सफेदपोशों से सांठगांठ की भी जांच कर रही है। शुरुआती पड़ताल में संकेत मिले हैं, कि Railway Fake Recruitment Scam का नेटवर्क केवल बिहार और यूपी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका फैलाव देश के कई हिस्सों तक था।

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2000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है घोटाले का आंकड़ा

जांच एजेंसियों के मुताबिक यह फर्जी भर्ती घोटाला करीब 2000 करोड़ रुपये का हो सकता है। रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से मोटी रकम वसूली गई। फर्जी नियुक्ति पत्र, फर्जी आईकार्ड, ट्रेनिंग और पोस्टिंग का झांसा देकर हजारों बेरोजगारों को ठगा गया। यह Railway Fake Recruitment Scam देश के सबसे बड़े संगठित भर्ती घोटालों में गिना जा रहा है।

फर्जी टीटीई की गिरफ्तारी से हुआ था बड़े रैकेट का खुलासा

इस घोटाले का पर्दाफाश 30 दिसंबर 2023 को हुआ, जब सोनपुर रेल थाना क्षेत्र में सीनियर डीसीएम रौशन कुमार ने स्टेशन पर टिकट जांच कर रहे चार फर्जी टीटीई को पकड़ा। आरोपियों के पास से फर्जी पहचान पत्र और रेलवे से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए। इसके बाद जब जांच आगे बढ़ी, तो Railway Fake Recruitment Scam का देशव्यापी नेटवर्क सामने आया।

रेलवे और पुलिस की संयुक्त जांच में कई गिरफ्तारियां

मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे की खुफिया एजेंसियां और पुलिस सक्रिय हुईं। तत्कालीन थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने सोनपुर रेलमंडल के तत्कालीन एडीआरएम के रसोइया, इंजीनियरिंग विभाग के प्वाइंट्समैन और जालसाज दीपक तिवारी समेत करीब दस आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। हालांकि, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार राघवेंद्र शुक्ला तब से फरार है। कई बार एसआईटी की टीम फुलहर गांव पहुंची, लेकिन वह हर बार बच निकलने में कामयाब रहा। यह स्थिति Railway Fake Recruitment Scam को और गंभीर बनाती है।

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ईडी के संज्ञान में आने के बाद तेज हुई जांच

पिछले वर्ष अप्रैल में जब 2000 करोड़ रुपये के इस जालसाजी नेटवर्क से जुड़ी खबरें सामने आईं, तब ईडी ने इस मामले में संज्ञान लिया। इसके बाद दिल्ली और पटना की ईडी टीम सोनपुर रेल थाना पहुंची और फर्जी भर्ती से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां अपने साथ ले गई। इसके बाद से Railway Fake Recruitment Scam की जांच लगातार तेज होती गई।

रेल पुलिस और ईडी की कार्रवाई से मचा हड़कंप

ईडी की ताजा छापेमारी की जानकारी मिलते ही रेलकर्मियों से लेकर पुलिस अधिकारियों तक में हड़कंप मच गया। रेल एसपी ने बताया कि सोनपुर में दर्ज फर्जी भर्ती केस में राघवेंद्र शुक्ला फरार है,और उसकी गिरफ्तारी के लिए एसआईटी के साथ खुफिया टीमें लगाई गई हैं। साथ ही गुजरात की एक चैंपियन सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिस पर फर्जी भर्ती के नाम पर धन जुटाने का आरोप है। माना जा रहा है,कि आने वाले दिनों में Railway Fake Recruitment Scam में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

डिस्क्लेमर यह समाचार आधिकारिक सूत्रों, जांच एजेंसियों से प्राप्त जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में उल्लिखित सभी आरोप जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। सक्षम न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय दिए जाने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जाना चाहिए। इस लेख का उद्देश्य केवल पाठकों को सूचना प्रदान करना है, न कि किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाना। किसी तथ्यात्मक त्रुटि की स्थिति में संबंधित पक्ष प्रमाण सहित संपर्क कर सकता है।

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