Primary School Merger Ban: यूपी में स्कूलों के विलय पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, फैसले की 3 अहम बातें
Primary School Merger Ban का यह आदेश सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं, बल्कि उन बच्चों और परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जिनकी शिक्षा इस नीति से प्रभावित हो सकती थी
यूपी सरकार की योजना और विवाद
Primary School Merger Banजून 2025 में यूपी सरकार ने एक योजना बनाई थी – कम नामांकन वाले प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी बड़े स्कूलों में मर्ज करने की। इसका तर्क था कि इससे शिक्षकों की बेहतर तैनाती होगी, संसाधनों का सही उपयोग होगा और शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी।
कोर्ट का फैसला: 3 बड़ी बातें
1️⃣ Sitapur जिले में फिलहाल
Primary School Merger Ban प्रदेश की लखनऊ बेंच ने सीतापुर मे स्कूलों के मर्जर प्रक्रिया पर अस्थाई रोक लगाने का काम किया है अगली सुनवाई की तारीख 21 अगस्त 2025 सुनिश्चित की गई है कोर्ट ने यह रोक नीति पर नहीं बल्कि क्रियान्वयन मे जो कमियां और खामियां हैं उनको देखते हुए लगाइ है।
2️⃣ RTE और संवैधानिक अधिकारों की चिंता
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह कदम Right to Education Act, 2009 और Article 21A के प्रावधानों का उल्लंघन है। नियमों के मुताबिक, 300 से अधिक आबादी वाले हर गांव में प्राथमिक स्कूल होना अनिवार्य है।
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हाई कोर्ट ने साफ कहा कि कोई भी नीति तभी लागू हो सकती है, जब उससे बच्चों की शिक्षा तक पहुंच प्रभावित न हो। कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह सुनिश्चित करे कि किसी भी बच्चे को स्कूल जाने में अतिरिक्त दूरी की वजह से पढ़ाई छोड़नी न पड़े।
फायदे और नुकसान दोनों पहलू
संभावित फायदे
बड़े विद्यालयों में बेहतर सुविधाएं, लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधन और योग्य शिक्षक मिल सकते हैं।
कम छात्रों वाले स्कूलों को जोड़ने से बजट की बचत और शिक्षकों का सही उपयोग संभव हो सकता है।
संभावित नुकसान
ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है, जिससे खासकर लड़कियों की स्कूल में उपस्थिति प्रभावित हो सकती है।
शिक्षक संगठनों का आरोप है कि इससे शिक्षक भर्ती के अवसर कम होंगे और बेरोज़गारी बढ़ेगी।
कई जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए, यहां तक कि Bulandshahr में एक शिक्षक ने अपहरण का नाटक रचा ताकि विलय को रोका जा सके।
आगे की राह
Primary School Merger Ban सुनवाई 21 अगस्त 2025 को होगी। अगर सरकार इस योजना में सुधार कर बच्चों की सुविधा को प्राथमिकता दे, तो यह नीति शिक्षा सुधार का Game‑changer बन सकती है। लेकिन अगर इसे जल्दबाजी में लागू किया गया, तो यह ग्रामीण शिक्षा प्रणाली के लिए खतरा भी साबित हो सकती है। ग्रामीण प्रवेश के बच्चे अधिकतर मजदूरी करने वालों के होते हैं जो मजबूरी से अपना और अपने बच्चों का जीवन यापन करते हैं बड़ी मुश्किल से गुजारा होता है।
लेकिन सरकारी स्कूल होने के नाते उनके बच्चों को शिक्षा मिल जाती है और अगर विद्यालय मर्ज हो गए और उस गांव का विद्यालय बंद हो गया तो वह बच्चे शिक्षा से महरूम रह जाएंगे जो की बहुत ही गलत होगा कोर्ट ने जो रोक लगाई है वह बिल्कुल सही है क्योंकि बच्चे एक किलोमीटर पैदल चलकर नहीं जा सकते
अन्यथा सरकार को विद्यालय मर्जर के संबंध में पुनर्विचार करना चाहिए ताकि कोई भी गरीब बच्चा शिक्षा से वंचित ना रहे आखिर शिक्षा नीति किसके लिए बनाई जा रही है अगर गांव का गरीब बच्चा शिक्षा से वंचित रह जाएगा तो मुझे नहीं लगता कि भारत का विकास संभव है भारत का विकास तभी होगा जब गांव का गरीब बच्चा पड़ेगा तब जाकर देश आगे बढ़ेगा मुझे लगता है कि सरकार को सबका साथ सबका विकास जैसे नारों को याद करना चाहिए