Adani SEC Summon अमेरिकी एजेंसी के समन पर मोदी सरकार से टकराव अडानी के वकील पहुंचे अदालत बोले क़ानूनी प्रक्रिया पर बातचीत जारी
Adani SEC Summon विवाद में अमेरिकी अदालत में सुनवाई, भारत सरकार पर असहयोग के आरोप, ईमेल से समन भेजने की मांग
अमेरिकी नियामक संस्था सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा भेजे गए कानूनी समन को लेकर भारत सरकार और अमेरिकी एजेंसी के बीच बढ़ते तनाव के बीच अडानी समूह के वकील अमेरिकी अदालत पहुंचे हैं। Adani SEC Summon से जुड़े इस मामले ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक, कूटनीतिक और कानूनी बहस को तेज़ कर दिया है।
न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की अमेरिकी ज़िला अदालत में दाख़िल एक संक्षिप्त पत्र में अडानी समूह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील रॉबर्ट जे. गिउफ़्रा जूनियर ने अदालत को अवगत कराया कि प्रतिवादी पक्ष और एसईसी के बीच समन स्वीकार करने की प्रक्रिया को लेकर आपसी सहमति बनाने पर बातचीत चल रही है। यह पत्र गौतम अडानी की ओर से और सह प्रतिवादी सागर अडानी की सहमति के साथ दाख़िल किया गया है। वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि जब तक यह बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक Adani SEC Summon पर कोई आदेश पारित न किया जाए।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एसईसी ने अदालत में यह दावा किया कि भारतीय सरकार ने पिछले 14 महीनों में समन की प्रक्रिया में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। एसईसी का कहना है कि उसने फरवरी 2025 से हेग कन्वेंशन के तहत भारत में कानूनी नोटिस भेजने की कोशिश की, लेकिन भारत के विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से बार-बार आपत्तियां और देरी की गई। Adani SEC Summon विवाद का यही बिंदु अब अंतरराष्ट्रीय जांच का केंद्र बन गया है।
एसईसी के अनुसार, अप्रैल 2025 में मंत्रालय ने यह कहकर समन भेजने से इनकार कर दिया कि दस्तावेज़ों पर आवश्यक मुहर और हस्ताक्षर नहीं हैं, जबकि आयोग का दावा है कि हेग कन्वेंशन में ऐसी औपचारिकताएं अनिवार्य नहीं हैं। मई 2025 में विस्तृत स्पष्टीकरण भेजे जाने के बाद भी महीनों तक कोई जवाब नहीं मिला। दिसंबर 2025 में मंत्रालय ने एक नई आपत्ति उठाते हुए कहा कि इस मामले में एसईसी को हेग कन्वेंशन का सहारा लेने का अधिकार ही नहीं है, जिसे एसईसी ने पूरी तरह निराधार बताया। इससे Adani SEC Summon मामला और जटिल हो गया।
इन्हीं परिस्थितियों के चलते एसईसी ने अमेरिकी अदालत से यह अनुमति मांगी कि वह अडानी समूह के अमेरिकी क़ानूनी प्रतिनिधियों के माध्यम से, साथ ही कॉरपोरेट ईमेल पतों पर ईमेल के ज़रिए समन भेज सके। एसईसी का तर्क है कि इतने लंबे समय के बाद अब हेग कन्वेंशन के ज़रिए समन की प्रक्रिया पूरी होने की कोई वास्तविक संभावना नहीं बची है। Adani SEC Summon के संदर्भ में यह असाधारण कदम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि एसईसी ने 20 नवंबर 2024 को अडानी समूह के ख़िलाफ़ सिविल धोखाधड़ी के आरोपों में मुक़दमा दर्ज किया था। एजेंसी का आरोप है कि अडानी परिवार से जुड़ी संस्थाओं ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को सैकड़ों मिलियन डॉलर की रिश्वत देने से जुड़ी एक योजना को अंजाम दिया। यह मामला सितंबर 2021 में अडानी ग्रीन एनर्जी द्वारा जारी किए गए बॉन्ड से जुड़ा है, जिसके माध्यम से अमेरिकी निवेशकों से 175 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि जुटाई गई थी। एसईसी का कहना है कि इन बॉन्ड दस्तावेज़ों में भ्रष्टाचार-रोधी नीतियों को लेकर भ्रामक जानकारी दी गई थी, जो Adani SEC Summon जांच का आधार है।
अडानी समूह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। समूह का कहना है कि उसने सभी क़ानूनी और नियामकीय नियमों का पालन किया है और वह अपने बचाव में हर उपलब्ध क़ानूनी विकल्प अपनाएगा। मौजूदा हालात में Adani SEC Summon केवल एक कारोबारी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत-अमेरिका के बीच नियामक सहयोग, संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनी प्रक्रिया से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।
यह समाचार लेख सार्वजनिक अदालती दस्तावेज़ों, आधिकारिक बयानों और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। लगाए गए आरोप न्यायालय में विचाराधीन हैं। अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा।