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Alankar Agnihotri बरेली सिटी मजिस्ट्रेट इस्तीफा विवाद, अलंकार अग्निहोत्री के बंधक बनाने के आरोप, DM की सफाई

 Alankar Agnihotri इस्तीफे के बाद बरेली सिटी मजिस्ट्रेट को बनाया गया बंधक अलंकार अग्निहोत्री के आरोपों से प्रशासन में हड़कंप, DM ने किया खंडन

Alankar Agnihotri बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद बंधक बनाए जाने का दावा, जिला प्रशासन का खंडन, पूरा विवाद विस्तार से

बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने के बाद Alankar Agnihotri द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अलंकार अग्निहोत्री का दावा है,कि इस्तीफा देने के बाद उन्हें बातचीत के बहाने डीएम आवास बुलाया गया, जहां करीब 45 मिनट तक उन्हें कथित रूप से बंधक बनाकर रखा गया। इस बयान के सामने आते ही प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

Alankar Agnihotri बरेली सिटी मजिस्ट्रेट इस्तीफा विवाद, अलंकार अग्निहोत्री के बंधक बनाने के आरोप, DM की सफाई

अलंकार अग्निहोत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें डीएम आवास पर सामान्य चर्चा के लिए बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद वे स्वतंत्र रूप से बाहर नहीं जा सके। उनका आरोप है,कि इस दौरान वे खुद को बंधक जैसी स्थिति में महसूस कर रहे थे। उन्होंने तत्काल लखनऊ में वरिष्ठ अधिकारियों को फोन कर जानकारी दी कि उन्हें जबरन रोका जा रहा है,और रातभर रोके जाने की योजना बनाई जा रही है।

Alankar Agnihotri अग्निहोत्री का यह भी कहना है,कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान लखनऊ से एक फोन कॉल आया, जिसमें उनके लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया। उन्होंने इसे मानसिक दबाव और प्रशासनिक उत्पीड़न करार दिया। उनका दावा है,कि जब उन्होंने पुलिस कप्तान और जिलाधिकारी को स्पष्ट रूप से अपनी आपत्ति बताई, तब जाकर उन्हें आनन फानन में छोड़ा गया।

इन आरोपों पर बरेली जिला प्रशासन ने कड़ा ऐतराज जताया है। जिलाधिकारी अविनाश सिंह की ओर से जारी बयान में कहा गया है,कि सिटी मजिस्ट्रेट को पूरी तरह सामान्य और औपचारिक बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया था। बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और उस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। प्रशासन के मुताबिक बैठक का उद्देश्य केवल इस्तीफे के कारणों को समझना था।

Alankar Agnihotri  एडीएम (न्यायिक) देश दीपक सिंह ने भी अलंकार अग्निहोत्री के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान चाय, कॉफी और मिठाई परोसी गई और किसी भी स्तर पर दबाव या जबरदस्ती जैसी कोई स्थिति नहीं बनी। प्रशासन का दावा है, कि बंधक बनाए जाने का आरोप पूरी तरह गलत और भ्रामक है।

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इस पूरे विवाद के बीच एक और घटनाक्रम सामने आया, जब अलंकार अग्निहोत्री ने आधी रात करीब 12:30 बजे अपना अधिकांश सामान सरकारी आवास से निकलवाया और खुद कार से किसी अज्ञात स्थान की ओर रवाना हो गए। हालांकि, नियमों के अनुसार उन्हें अभी सिटी मजिस्ट्रेट पद का विधिवत चार्ज हैंडओवर करना शेष है, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर यह चर्चा भी है,कि उन्हें एक दो दिन और बरेली में रहना पड़ सकता है।

Alankar Agnihotri विवाद के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी अलंकार अग्निहोत्री से फोन पर बातचीत की। शंकराचार्य ने कहा कि प्रशासनिक पद छोड़ने के बाद अब उनके लिए समाज और धर्म की सेवा का एक बड़ा मार्ग खुला है, और उनकी भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

इस्तीफा देने के पीछे की वजह बताते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार पर ‘ब्राह्मण विरोधी’ रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और बुजुर्ग संन्यासियों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार, विशेष रूप से शिखा (चोटी) के अपमान को असहनीय बताया।

Alankar Agnihotri इसके साथ ही उन्होंने 13 जनवरी को जारी यूजीसी के नए नियमों पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है,कि ‘समता समिति’ के माध्यम से सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ फर्जी शिकायतों और उत्पीड़न की आशंका बढ़ सकती है, जिससे छात्रों का भविष्य और व्यक्तिगत जीवन प्रभावित होगा।

Alankar Agnihotri अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे को ब्राह्मण समाज के सम्मान और अधिकारों से जोड़ते हुए सभी ब्राह्मण सांसदों और विधायकों से पद छोड़कर जनता के साथ खड़े होने की अपील भी की है। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक बयानबाज़ी से आगे बढ़कर सामाजिक और राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है, जहां एक ओर प्रशासन आरोपों को खारिज कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अलंकार अग्निहोत्री अपने दावों पर अडिग हैं।

यह समाचार सार्वजनिक बयानों, मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। इसमें लगाए गए आरोप और जवाब संबंधित पक्षों के कथन हैं। किसी भी निष्कर्ष की जिम्मेदारी पाठक के विवेक पर निर्भर करती है।

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