Fake Encounter Video अलीगढ़ पुलिस का वायरल वीडियो जंगल में सबूत रखकर युवकों को फंसाने का आरोप कानून व्यवस्था नहीं बल्कि फर्जी साज़िश का खुला चेहरा
अलीगढ़ थाना अकराबाद पुलिस का Fake Encounter Video वायरल, जंगल में सबूत रखकर युवकों को फंसाने के आरोप, न्यायिक जांच की मांग
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के थाना अकराबाद पुलिस से जुड़ा Fake Encounter Video सामने आने के बाद राज्य की पुलिस व्यवस्था पर बेहद गंभीर और असहज सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में कथित तौर पर साफ दिखाई देता है,कि दो युवकों को जंगल में ले जाया गया, उनके हाथों और पैंट की जेब में चाकू और मोबाइल रखे गए और फिर कैमरे के सामने उन्हें अपराधी साबित करने की तैयारी की गई। यह घटना अगर सही है, तो यह कानून व्यवस्था नहीं बल्कि सबूत गढ़ने की सुनियोजित साज़िश मानी जाएगी।
इस Fake Encounter Video को लेकर सबसे गंभीर आरोप यह है, कि पुलिस ने पहले कहानी बनाई और फिर उसी कहानी के मुताबिक सबूत फिट किए गए। वीडियो में दिख रहे दृश्य यह संकेत देते हैं,कि युवकों को जानबूझकर फंसाने की कोशिश की गई, ताकि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जा सके। ऐसे आरोप पुलिस की उस भूमिका पर सवाल खड़े करते हैं, जिसे नागरिकों की सुरक्षा की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वायरल Fake Encounter Video ने यह सवाल और गहरा कर दिया है, कि अगर पुलिस खुद ही अपराध गढ़ने लगे, तो आम नागरिक न्याय के लिए किसके पास जाएगा। सोशल मीडिया पर लोग इसे फर्जी एनकाउंटर की तैयारी बता रहे हैं, और कह रहे हैं, कि यह सिर्फ दो युवकों का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सच्चाई उजागर करता है।
इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे सवाल किए जा रहे हैं। क्या अब उत्तर प्रदेश में युवकों को कैमरे के सामने वीडियो शूट कर अपराधी बनाया जाएगा क्या दलितों, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यकों, गरीब और कमजोर युवाओं को इसी तरह “कानून व्यवस्था” के नाम पर निशाना बनाया जाएगा Fake Encounter Video ने इन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है, कि अगर वायरल Fake Encounter Video में दिख रहे आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल पुलिस की जवाबदेही पर सवाल है, बल्कि मानवाधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन है। यह घटना उस भय को जन्म देती है, जहां कानून का रक्षक ही कानून तोड़ने वाला बन जाए।
उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की जा रही है, कि पूरे मामले की निष्पक्ष और न्यायिक जांच कराई जाए। दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए, पीड़ित युवकों को तुरंत रिहा कर सुरक्षा और उचित मुआवज़ा दिया जाए। लोगों का कहना है, कि Fake Encounter Video की अनदेखी करना संविधान और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात होगा।
संविधान किसी भी वर्दी को झूठे सबूत गढ़ने या निर्दोषों को फंसाने का अधिकार नहीं देता। Fake Encounter Video के सामने आने के बाद यह स्पष्ट है, कि यह मामला केवल अलीगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिस सुधार की दिशा तय करने वाला बन सकता है। अब देखना यह है, कि शासन इस पर कठोर और पारदर्शी कार्रवाई करता है या नहीं।
यह लेख सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, सार्वजनिक बयानों और उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। वीडियो की प्रामाणिकता और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। संबंधित सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अधिकार है।
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