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Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment“वोट के समय चाची, महोत्सव में बाहर”: गोरखपुर महोत्सव में VIP सिस्टम पर देवरिया की महिला का फूटा गुस्सा

Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment गोरखपुर महोत्सव में VIP सिस्टम से टूटा भरोसा, देवरिया की महिला का गुस्सा वायरल

Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment  गोरखपुर महोत्सव में देवरिया से आई महिला ने VIP और आम जनता के फर्क पर उठाए सवाल। पहले सीट, फिर पुलिस द्वारा हटाए जाने से नाराज महिला का वीडियो वायरल।

Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment “वोट मांगने आते हैं,तो चाची कहते हैं…”

गोरखपुर महोत्सव से सामने आया यह वीडियो सिर्फ एक महिला की नाराज़गी नहीं दिखाता, बल्कि उस आम मतदाता की पीड़ा बयां करता है, जो चुनाव के समय सबसे अहम होता है, और आयोजनों में सबसे पहले बाहर कर दिया जाता है।

देवरिया से गोरखपुर महोत्सव देखने आई महिला का कहना है, कि उन्हें लगा था कि यह कार्यक्रम आम जनता के लिए है, लेकिन यहां पहुंचते ही उन्हें समझ आ गया कि Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए है।

उम्मीद लेकर आईं, अपमान लेकर लौटीं

महिला बताती हैं, कि वह परिवार के साथ देवरिया से गोरखपुर आई थीं।

उन्हें उम्मीद थी कि महोत्सव में

सम्मान मिलेगा

बैठने की व्यवस्था होगी

आम लोगों के साथ बराबरी का व्यवहार होगा

शुरुआत में जब उन्हें आगे की सीट पर बैठाया गया, तो उन्हें लगा कि शायद यह आयोजन सच में जनता का है। लेकिन कुछ ही देर बाद हालात बदल गए।

“पहले बैठाया, फिर पुलिस ने उठाकर भगा दिया”

Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment“वोट के समय चाची, महोत्सव में बाहर”: गोरखपुर महोत्सव में VIP सिस्टम पर देवरिया की महिला का फूटा गुस्सा

महिला का आरोप है,कि अचानक पुलिसकर्मी आए और बिना किसी स्पष्ट वजह के उन्हें वहां से हटा दिया गया।

उनका सवाल सीधा है,

“अगर VIP नहीं हैं,तो क्या हमें यहां बैठने का अधिकार भी नहीं?”

यहीं से Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।

चुनाव में अपनापन, आयोजन में दूरी

महिला भावुक होकर कहती हैं,

“वोट मांगने आते हैं तो चाची-चाची करते हैं,

अब VIP और आम आदमी अलग कर दिया।”

यह बयान राजनीति की उस सच्चाई को उजागर करता है, जहां आम जनता सिर्फ वोट बैंक बनकर रह जाती है।

महोत्सव जैसे सार्वजनिक मंच पर भी Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment आम लोगों को हाशिए पर धकेल देता है।

“हम राजपूत हैं, हमारे घर में 35 वोट हैं”

महिला ने यह भी बताया कि वह राजपूत समाज से हैं,और उनके परिवार में लगभग 35 वोट हैं, जो आमतौर पर बीजेपी को ही जाते रहे हैं।

उनका गुस्सा किसी पार्टी विशेष से ज्यादा उस सिस्टम से है, जहां

वोट की कीमत चुनाव तक

और सम्मान VIP पास तक सीमित है

यह बयान Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment को एक राजनीतिक बहस में बदल देता है।

सोशल मीडिया पर नाराज़गी और ‘मनोरंजन’ दोनों

वीडियो वायरल होने के बाद लोग इसे देखकर हंस भी रहे हैं, नाराज़ भी हो रहे हैं, और सोचने पर भी मजबूर हैं।

कई यूज़र्स लिख रहे हैं,

“यही असली ग्राउंड रिपोर्ट है”

“VIP कल्चर लोकतंत्र को खोखला कर रहा है”

सोशल मीडिया पर यह वीडियो Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment का प्रतीक बन गया है।

Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment“वोट के समय चाची, महोत्सव में बाहर”: गोरखपुर महोत्सव में VIP सिस्टम पर देवरिया की महिला का फूटा गुस्सा

VIP संस्कृति बनाम लोकतंत्र

गोरखपुर महोत्सव जैसे आयोजन जनता को जोड़ने के लिए होते हैं, लेकिन जब

VIP गैलरी अलग हो

आम लोगों को हटाया जाए

पुलिस से डराया जाए

तो सवाल उठता है, कि क्या यह सच में जनता का महोत्सव है?

Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment ने एक बार फिर साबित किया कि VIP संस्कृति और लोकतंत्र के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है।

प्रशासन की चुप्पी, सवाल बरकरार

अब तक इस मामले पर कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यह साफ नहीं हो पाया कि महिला को हटाने की वजह सुरक्षा थी या व्यवस्था की चूक।

लेकिन जनता के मन में यह सवाल जरूर बैठ गया है, कि Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment आखिर किसके लिए है?

 गुस्सा सिर्फ एक महिला का नहीं

यह नाराज़गी

देवरिया की महिला की नहीं

एक जाति की नहीं

एक परिवार की नहीं

यह उस आम नागरिक की है, जो हर चुनाव में अहम है, लेकिन हर आयोजन में बेगाना।

अगर महोत्सव जनता के लिए है, तो वहां VIP और आम आदमी का फर्क क्यों?

Gorakhpur Mahotsav VIP Treatment पर उठे ये सवाल आने वाले समय में राजनीति, प्रशासन और व्यवस्था तीनों के लिए आईना साबित हो सकते हैं।

डिस्क्लेमर

यह समाचार रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, मौके पर मौजूद व्यक्तियों के बयानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तैयार की गई है। लेख का उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय, संस्था या राजनीतिक दल की छवि को ठेस पहुँचाना नहीं है।

रिपोर्ट में व्यक्त विचार संबंधित महिला की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया और जनभावनाओं को दर्शाते हैं, जिन्हें अंतिम सत्य या आधिकारिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। घटना से जुड़ी परिस्थितियाँ, प्रशासनिक कारण या पुलिस की भूमिका को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण आने पर जानकारी में बदलाव संभव है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले आधिकारिक तथ्यों और प्रामाणिक स्रोतों की पुष्टि अवश्य करें।

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