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SC Collegium ने हाई कोर्ट के लिए 50 से ज्यादा जजों के इंटरव्यू लिए – न्यायपालिका में नए चेहरों की दस्तक, जानिए पूरा प्रोसेस

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SC Collegium ने हाई कोर्ट के लिए 50 से ज्यादा जजों के इंटरव्यू लिए – न्यायपालिका में नए चेहरों की दस्तक 

SC Collegium सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाई कोर्ट  में नियुक्तियों के लिए उम्मीदवारों का इंटरव्यू किया, पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर होगा चयन। देश की न्यायिक व्यवस्था को मिलेगी नई ऊर्जा।

सोचिए ज़रा, अगर आपके केस का फ़ैसला देने वाला जज खुद ही अयोग्य हो, तो क्या आप कभी न्याय की उम्मीद कर सकते हैं? नहीं ना! इसी सोच के साथ भारत की सर्वोच्च अदालत – सुप्रीम कोर्ट – देश के अलग-अलग हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए एक बेहद अहम प्रक्रिया से गुजर रही है। SC कॉलेजियम ने हाल ही में 50 से ज्यादा उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया है ताकि योग्य और निष्पक्ष जजों की नियुक्ति की जा सके।

इस खबर का सिर्फ प्रशासनिक महत्व नहीं है, बल्कि यह हर उस नागरिक से जुड़ी है जो न्याय की आस में अदालतों के चक्कर लगाता है।

क्या होता है कॉलेजियम सिस्टम?

भारत में जजों की नियुक्ति का एक विशेष तरीका है जिसे “कॉलेजियम सिस्टम” कहा जाता है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति और तबादले का निर्णय इसी प्रणाली के तहत होता है।

SC कॉलेजियम में पांच सबसे वरिष्ठ जज शामिल होते हैं, जिसमें मुख्य न्यायाधीश (CJI) का नेतृत्व होता है। ये कॉलेजियम यह तय करता है कि किन लोगों को देश की अदालतों में जज बनाया जाए। यह एक संवेदनशील और जिम्मेदारी भरी प्रक्रिया होती है क्योंकि यह निर्णय देश की न्याय प्रणाली की रीढ़ को मजबूत बनाता है।

50 से अधिक उम्मीदवारों का हुआ इंटरव्यू – क्यों है ये बड़ी बात?

2025 की दूसरी तिमाही में कॉलेजियम ने एक बड़ी पहल करते हुए 50 से ज्यादा उम्मीदवारों के इंटरव्यू लिए। इनमें सीनियर अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी और रजिस्ट्रार स्तर के लोग शामिल थे।

यह प्रक्रिया न केवल पारदर्शी रखी गई, बल्कि इसमें योग्यता, कार्यशैली, निर्णय क्षमता, ईमानदारी और संवैधानिक समझ जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा गया।

यह पहली बार है कि इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की गई है। इससे यह उम्मीद की जा रही है कि न्यायिक नियुक्तियों में तेजी आएगी और खाली पदों को जल्द भरा जा सकेगा।

इंटरव्यू में किन बातों का ध्यान रखा गया?

कॉलेजियम के इंटरव्यू का आधार केवल अकादमिक योग्यता नहीं था। इसमें यह देखा गया कि:

उम्मीदवार का नैतिक चरित्र कैसा है

वह न्यायिक फैसलों को कैसे समझता और सुनाता है

संविधान के प्रति समझ और निष्ठा

भाषा, तर्क और प्रस्तुति में उसकी दक्षता

विवादों से दूरी और निष्पक्षता

इन पहलुओं की गहन समीक्षा के बाद ही कॉलेजियम उन्हें अगली प्रक्रिया के लिए आगे भेजेगा।

क्यों है यह प्रक्रिया ज़रूरी?

आज देश के कई हाई कोर्ट में जजों के पद खाली हैं, जिसकी वजह से लाखों मुकदमों का निपटारा लंबित पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक:

देश में करीब 4.5 करोड़ केस पेंडिंग हैं

अकेले हाई कोर्ट्स में 60 लाख से ज्यादा केस लंबित हैं

कई कोर्ट्स में 40% तक पद खाली हैं

ऐसे में जजों की नियुक्ति न्यायपालिका की क्षमता बढ़ाने का एक जरूरी कदम है।

आम आदमी के लिए क्या मायने रखती है ये खबर?

अगर आप सोच रहे हैं कि इस खबर का आपसे क्या लेना-देना है, तो सोचिए कि अगर आपके किसी परिवारिक विवाद, जमीन के केस या किसी नौकरी से जुड़ी याचिका पर सालों से फैसला नहीं हो पा रहा है, तो उसकी एक बड़ी वजह कोर्ट में जजों की कमी है।

इस प्रक्रिया से उम्मीद है कि:

न्याय मिलने में देरी कम होगी

मामलों की सुनवाई तेजी से होगी

बेहतर गुणवत्ता वाले फैसले सामने आएंगे

आम जनता का न्यायपालिका में भरोसा और मजबूत होगा

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Also Raed  Dr- Bheem Rao Ambekar Indian Contitution

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम क्या दर्शाता है?

यह पहल बताती है कि भारतीय न्यायपालिका खुद में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। कॉलेजियम का यह पारदर्शी इंटरव्यू सिस्टम यह संकेत देता है कि भविष्य में जजों की नियुक्ति न सिर्फ तेज़ होगी बल्कि योग्य लोगों को ही जिम्मेदारी दी जाएगी।

इससे यह भी उम्मीद की जा रही है कि सरकार और न्यायपालिका के बीच जजों की नियुक्ति को लेकर जो गतिरोध रहता है, वह भी कम होगा।

अब आगे क्या?

कॉलेजियम द्वारा इंटरव्यू के बाद जो नाम चयनित होंगे, उन्हें केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। वहाँ से अंतिम मुहर लगने के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होगी।

इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को केंद्र में रखा गया है, ताकि देश को निष्पक्ष और न्यायप्रिय जज मिलें।

SC Collegium कॉलेजियम द्वारा लिए गए 50 से ज्यादा इंटरव्यू न सिर्फ न्यायिक व्यवस्था के भीतर एक नई शुरुआत की तरह हैं, बल्कि यह आम जनता के लिए राहत और उम्मीद का संदेश भी हैं।

देश की सबसे बड़ी अदालत जब खुद ऐसे गंभीर और पारदर्शी कदम उठाती है, तो यह न केवल न्याय की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है बल्कि आम आदमी को यह भरोसा भी देता है कि “न्याय अभी भी जिंदा है।”

 

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