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“Yogi Adityanath Gorakhpur Women Cricket Coach Issue”गोरखपुर की बेटियों का सपना अधूरा: मुख्यमंत्री के गृह जनपद के रीजनल स्टेडियम में महिला क्रिकेट कोच का अभाव, अंतिमा सिंह बनीं बेटियों की उम्मीद

“Yogi Adityanath Gorakhpur Women Cricket Coach Issue”गोरखपुर की बेटियों का सपना अधूरा: मुख्यमंत्री के गृह जनपद के रीजनल स्टेडियम में महिला क्रिकेट कोच का अभाव, अंतिमा सिंह बनीं बेटियों की उम्मीद

“Yogi Adityanath Gorakhpur Women Cricket Coach Issue”गोरखपुर  यह वही शहर है जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद होने का गौरव प्राप्त है। यहां एक भव्य रीजनल स्टेडियम है, जहां बच्चों को हर प्रकार के खेल की ट्रेनिंग दी जाती है। फुटबॉल हो, क्रिकेट हो, वॉलीबॉल हो, कुश्ती हो हर खेल के लिए कोच मौजूद हैं। लेकिन, जब बात शहर की बेटियों और महिला क्रिकेट की आती है, तो तस्वीर बिल्कुल अलग और निराशाजनक है।

  “Yogi Adityanath Gorakhpur Women Cricket Coach Issue” बेटियों के क्रिकेट के सपने पर पड़ा ताला

"Yogi Adityanath Gorakhpur Women Cricket Coach Issue"

गोरखपुर में कई लड़कियां हैं जो क्रिकेट में अपना करियर बनाना चाहती हैं, देश और दुनिया में शहर का नाम रोशन करना चाहती हैं। लेकिन अफसोस, रीजनल स्टेडियम में महिला क्रिकेट के लिए कोई आधिकारिक कोच नियुक्त नहीं है। यहां तक कि जिन लड़कियों ने क्रिकेट खेलने का जज़्बा दिखाया, उन्हें बिना कोच के ही खेलना पड़ रहा है।

“Yogi Adityanath Gorakhpur Women Cricket Coach Issue” सरकार एक तरफ़ “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “खेलो इंडिया” जैसी योजनाओं की बात करती है, लेकिन बेटियों को सही मार्गदर्शन देने के लिए महिला कोच की नियुक्ति तक नहीं कर पा रही है। सवाल उठता है—क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने ही गृह जनपद की इस उपेक्षा का संज्ञान नहीं लेना चाहिए?

अंतिमा सिंह: बेटियों की निस्वार्थ मार्गदर्शक

इस अंधेरे में एक नाम उम्मीद की तरह चमकता है,अंतिमा सिंह। वे बिना किसी सरकारी सैलरी या मानदेय के, निस्वार्थ भाव से गोरखपुर की बच्चियों को क्रिकेट सिखा रही हैं। अंतिमा सिंह न तो किसी सरकारी पेरोल पर हैं, न ही उन्हें कोई आधिकारिक पद मिला है, लेकिन उनका जज़्बा किसी प्रोफेशनल कोच से कम नहीं है।

उनकी मेहनत और लगन के दम पर कई लड़कियां क्रिकेट की बारीकियां सीख रही हैं। अंतिमा सिंह का मानना है।

“अगर सही कोचिंग और सुविधाएं मिलें, तो गोरखपुर की बेटियां भी मिताली राज और स्मृति मंधाना जैसी खिलाड़ी बन सकती हैं।”

  योगी सरकार और खेल अधिकारियों से सीधा सवाल

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जब रीजनल स्टेडियम में पुरुष खिलाड़ियों के लिए कोच उपलब्ध हैं, तो महिला खिलाड़ियों के साथ भेदभाव क्यों? क्या बेटियों का क्रिकेट में भविष्य सरकार की प्राथमिकता में नहीं है? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चाहिए कि वे तुरंत महिला क्रिकेट कोच की नियुक्ति का आदेश दें, ताकि शहर की बेटियां प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमक सकें।

  “Yogi Adityanath Gorakhpur Women Cricket Coach Issue” खेल के नाम पर अधूरा इंफ्रास्ट्रक्चर

गोरखपुर का रीजनल स्टेडियम किसी भी जिले के लिए गर्व की बात हो सकता है, लेकिन जब वहां महिला क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए कोच न हो, तो यह अधूरा है। खेल विभाग और जिला खेल अधिकारी को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

Yogi Adityanath Gorakhpur

बेटियों के सपने सिर्फ नारे से पूरे नहीं होते

“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का असली मतलब तभी है जब बेटियों को हर क्षेत्र में बराबरी का मौका मिले। सिर्फ पोस्टर, नारे और विज्ञापनों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुविधाएं देकर बेटियों को आगे बढ़ाना होगा।

  “Yogi Adityanath Gorakhpur Women Cricket Coach Issue” अंतिमा सिंह की पहल को सलाम

अंतिमा सिंह ने साबित किया है, कि अगर जज़्बा हो, तो संसाधनों की कमी भी रुकावट नहीं बनती। उन्होंने अपनी निजी जिम्मेदारियों के बीच समय निकालकर बेटियों के क्रिकेट कोच की भूमिका निभाई है। उनकी इस मेहनत को सम्मान मिलना चाहिए।

सरकार और समाज की जिम्मेदारी

“Yogi Adityanath Gorakhpur Women Cricket Coach Issue”  अब समय आ गया है कि सरकार सिर्फ योजनाओं का ढोल पीटने के बजाय असली बदलाव लाए। महिला क्रिकेट कोच की नियुक्ति, खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं, और खेल उपकरण की उपलब्धता से ये सब जरूरी कदम हैं, जो गोरखपुर की बेटियों का भविष्य बदल सकते हैं।

इन बेटियों की मेहनत को पहचान चाहिए

गोरखपुर की ये बेटियां—Shreya, Shrishti, Saloni, Priya, Ankita, Anika, Aayra, Ejma, Kavya, Artika, Siddhi, Shalini—अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए मैदान में पसीना बहा रही हैं। इन्हें सिर्फ एक अच्छे कोच और सही दिशा की जरूरत है।

“Yogi Adityanath Gorakhpur Women Cricket Coach Issue” मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में महिला क्रिकेट कोच का न होना एक बड़ी विफलता है। अंतिमा सिंह जैसी निस्वार्थ कोच की मौजूदगी यह साबित करती है, कि यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ सरकारी समर्थन और जिम्मेदारी की। अगर सरकार और खेल विभाग अब भी नहीं जागे, तो कई बेटियों के क्रिकेट के सपने अधूरे रह जाएंगे।

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