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Sahjanwa-Dohrighat Rail Project 2025 गोरखपुर को मिलेगी नई रफ्तार: सहजनवां-दोहरीघाट नई रेल लाइन परियोजना ने पकड़ी स्पीड, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं

Sahjanwa-Dohrighat Rail Project 2025 गोरखपुर को मिलेगी नई रफ्तार: सहजनवां-दोहरीघाट नई रेल लाइन परियोजना ने पकड़ी स्पीड, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं

Sahjanwa Dohrighat Rail Project 2025 गोरखपुर: पूर्वांचल की जनता के लिए खुशखबरी है। सहजनवां-दोहरीघाट नई रेल लाइन परियोजना अब तेज रफ्तार पकड़ रही है। शुक्रवार को मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा की और जमीन अधिग्रहण से लेकर निर्माण कार्य तक की हर डिटेल पर चर्चा हुई।

आपकी जानकारी के लिए बता दू यह योजना अत्यधिक महत्वाकांक्षी है,न सिर्फ गोरखपुर बल्कि समूचा पूर्वांचल को एक दूसरे से जोड़ता है, आर्थिक विकास में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले इस बड़े प्रोजेक्ट के सामने कई प्रकार की चुनौतियां खड़ी है

Sahjanwa Dohrighat Rail Project 2025 17 दिसंबर 2019 को मिली थी हरी झंडी

Sahjanwa Dohrighat Rail Project 2025
सोर्स बाय गूगल इमेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 17 दिसंबर 2019 को इस रेल लाइन को मंजूरी दी थी।

कुल लंबाई: 81.17 किलोमीटर

कुल बजट: लगभग 1320 करोड़ रुपये

जिले: गोरखपुर और मऊ

गांव: 112

यह परियोजना तीन चरणों में पूरी होगी और मार्च 2027 तक पूरी होने का लक्ष्य है।

  Sahjanwa Dohrighat Rail Project 2025 चरणबद्ध तरीके से तैयार होगी रेल लाइन

1. पहला चरण (मार्च 2025 तक) – सहजनवां से बैदौली तक 27 किलोमीटर

2. दूसरा चरण (मार्च 2026 तक) – बैदौली से गोला बाजार तक 29 किलोमीटर

3. तीसरा चरण (मार्च 2027 तक) – गोला बाजार से न्यू दोहरीघाट तक 25.5 किलोमीटर

हर चरण के बाद जनता को नए स्टेशन और तेज यातायात का लाभ मिलेगा।

Sahjanwa Dohrighat Rail Project 2025 12 स्टेशन, जिनमें एक ‘स्टार स्टेशन’

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परियोजना के तहत 12 नए स्टेशन बनेंगे:

सहजनवां, मगहर, पिपरौली, खजनी, उनवल, बैदौली बाबू, उरुवा बाजार, बनवारपार, गोला बाजार, भरौली, बड़हलगंज और दोहरीघाट।

इनमें बांसगांव स्टेशन को सबसे बड़ा और अत्याधुनिक बनाने की योजना है। यह स्टेशन भविष्य में पूर्वांचल का ट्रांसपोर्ट हब बन सकता है।

भूमि अधिग्रहण पर फोकस

Sahjanwa Dohrighat Rail Project 2025 अब तक 359 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के लिए 295 करोड़ रुपये जिला प्रशासन को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। रेलवे प्रशासन ने 104 गांवों की जमीन का नक्शा और खसरा-खतौनी भी सौंप दी है।

मंडलायुक्त ने अधिकारियों को जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं ताकि परियोजना समय पर पूरी हो सके।

 विकास के नए द्वार

आर्थिक उछाल: रेल लाइन से गोरखपुर, मऊ और आसपास के कस्बों में व्यापार के नए अवसर खुलेंगे।

रोजगार: निर्माण के दौरान और बाद में हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।

कनेक्टिविटी: ग्रामीण इलाकों से जिला मुख्यालय और बड़े शहरों तक सफर आसान होगा।

टूरिज्म बूस्ट: मगहर और बड़हलगंज जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचना आसान होगा।

यह रेल लाइन पूर्वांचल के इंफ्रास्ट्रक्चर को नया चेहरा देने की क्षमता रखती है।

  Sahjanwa Dohrighat Rail Project 2025 चुनौतियां और चिंताएं

भूमि अधिग्रहण में देरी: कई जगह किसानों के मुआवजे और जमीन की कीमत को लेकर असहमति है।

बजट बढ़ने का खतरा: अगर परियोजना में देरी हुई तो लागत और बढ़ सकती है।

पर्यावरणीय प्रभाव: रेल लाइन निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई और भूमि उपयोग में बदलाव से पर्यावरण पर असर पड़ेगा।

स्थानीय असंतोष: कुछ ग्रामीण अपने घर या खेत खोने से नाराज हैं।

यह सिर्फ एक रेल लाइन नहीं, बल्कि पूर्वांचल का भविष्य बदलने वाली ‘लाइफलाइन’ है।

यह परियोजना गोरखपुर को एक ‘कनेक्टिविटी पावरहाउस’ बनाएगी।

गांव-गांव में आर्थिक हलचल लाएगी।

हजारों युवाओं के लिए जॉब का गोल्डन गेटवे खोलेगी।

लेकिन, इसके लिए जरूरी है कि सरकार और जनता के बीच भरोसे का पुल मजबूत हो।

जनता की उम्मीदें

Sahjanwa Dohrighat Rail Project 2025 स्थानीय लोगों को उम्मीद है, कि यह परियोजना समय पर पूरी हो और रेलवे सुविधा सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर भी उतरे।

कुछ ग्रामीण चाहते हैं कि

मुआवजा बाजार दर के मुताबिक मिले

स्टेशन पर स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता दी जाए

ट्रेन सेवाएं किफायती और नियमित रहें।

  Sahjanwa Dohrighat Rail Project 2025 सरकार की जिम्मेदारी

मंडलायुक्त ने साफ किया है, कि भूमि अधिग्रहण में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

रेलवे और प्रशासन दोनों का फोकस है, कि

जमीन का भुगतान पारदर्शी तरीके से हो

तकनीकी कार्यों में तेजी आए

परियोजना की गुणवत्ता में कोई समझौता न हो

नतीजा: रफ्तार बनी रहे तो बदल जाएगी तस्वीर

Sahjanwa Dohrighat Rail Project 2025 अगर सहजनवां-दोहरीघाट रेल परियोजना तय समय में पूरी हो जाती है, तो गोरखपुर और मऊ की तस्वीर बदल सकती है।

लेकिन, यह तभी संभव है जब

भूमि अधिग्रहण में अड़चन न आए

फंड का सही इस्तेमाल हो

राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत रहे

यह रेल लाइन सिर्फ पटरियों का जाल नहीं, बल्कि सपनों और विकास की दौड़ है।  जिसे समय से जीतना जरूरी है।

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