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Ankita Bhandari Murder Case 3 साल बाद वायरल ऑडियो से फिर गरमाया मामला

 अंकिता भंडारी मर्डर केस 3 साल बाद क्यों फिर मचा बवाल वायरल ऑडियो, VIP एंगल और राजनीतिक घमासान की पूरी कहानी

Ankita Bhandari Murder Case में 3 साल बाद वायरल ऑडियो से नया विवाद खड़ा हो गया है। VIP एंगल, BJP-कांग्रेस आरोप और SIT जांच की पूरी जानकारी पढ़ें।

 भूमिका

उत्तराखंड का बहुचर्चित Ankita Bhandari Murder Case एक बार फिर सुर्खियों में है। सितंबर 2022 में हुए इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। अब, तीन साल बाद एक कथित वायरल ऑडियो ने इस मामले को दोबारा राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में ला दिया है। इस ऑडियो में एक ‘VIP गेस्ट’ का नाम सामने आने के दावों के बाद सत्ता और विपक्ष आमने सामने हैं।

Ankita Bhandari Murder Case 3 साल बाद वायरल ऑडियो से फिर गरमाया मामला

 3 साल बाद फिर क्यों चर्चा में आया मामला

दरअसल, Ankita Bhandari Murder Case में जिला अदालत के फैसले को करीब 7 महीने बीत चुके हैं। इसी बीच भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी ऊर्मिला सनावर द्वारा जारी एक कथित ऑडियो ने नया विवाद खड़ा कर दिया। इस ऑडियो में आरोप लगाया गया है,कि जिस VIP गेस्ट के लिए अंकिता से ‘स्पेशल सर्विस’ की मांग की गई थी, वह भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम थे।

 पूरा मामला क्या है

अंकिता भंडारी, वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं।

18 सितंबर 2022: अंकिता अचानक लापता हो गईं

24 सितंबर 2022: ऋषिकेश के पास चीला नहर से शव बरामद

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना बताया गया, साथ ही शरीर पर चोटों के निशान भी मिले

Ankita Bhandari Murder Case जांच में सामने आया कि रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य (भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा) ने अंकिता पर एक VIP गेस्ट को ‘स्पेशल सर्विस’ देने का दबाव बनाया था। अंकिता के इनकार के बाद कथित तौर पर उसकी हत्या कर दी गई।

Ankita Bhandari Murder Case 3 साल बाद वायरल ऑडियो से फिर गरमाया मामला

 वायरल ऑडियो में क्या दावा?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ऊर्मिला सनावर एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनाती हैं। इसमें कॉल पर मौजूद व्यक्ति कहता है,कि:

अंकिता पर दुष्यंत गौतम से संबंध बनाने का दबाव डाला गया

अंकिता के मना करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई

उस दिन रिसॉर्ट में दुष्यंत गौतम और अजय कुमार मौजूद थे

ऑडियो में यह भी दावा किया गया कि राजनीतिक बदनामी के डर से पार्टी ने उस समय चुप्पी साध ली और प्रभावशाली लोगों को बचाया गया।

 बुलडोजर और सबूत मिटाने का आरोप

Ankita Bhandari Murder Case ऊर्मिला सनावर ने सवाल उठाया कि हत्याकांड के कमरे पर तत्काल बुलडोजर क्यों चलाया गया? उनका आरोप है, कि यह कार्रवाई सबूत मिटाने और कुछ खास लोगों को बचाने के लिए की गई।

Ankita Bhandari Murder Case 3 साल बाद वायरल ऑडियो से फिर गरमाया मामला

 “AI से बना ऑडियो”  सुरेश राठौर का दावा

पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने ऑडियो को AI से तैयार किया गया फर्जी क्लिप बताया है।

उन्होंने मांग की कि:

ऊर्मिला राठौर का मोबाइल फोन जब्त किया जाए

ऑडियो की फोरेंसिक जांच कराई जाए

उनका कहना है कि भाजपा को बदनाम करने के लिए जानबूझकर यह विवाद खड़ा किया गया है।

 दुष्यंत गौतम की सफाई

जिन दुष्यंत गौतम पर आरोप लगाए गए हैं, वे फिलहाल उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी हैं। उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा:

“27 साल के सार्वजनिक जीवन में मेरे आचरण पर कभी सवाल नहीं उठा। यह मेरी छवि खराब करने की साजिश है।”

Ankita Bhandari Murder Case उन्होंने वायरल वीडियो-ऑडियो की जांच की मांग की और कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो वे सार्वजनिक जीवन से इस्तीफा देने को तैयार हैं।

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 कांग्रेस का भाजपा पर हमला

इस पूरे विवाद को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि:

प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश हुई

सबूत नष्ट किए गए

जांच को प्रभावित किया गया

कांग्रेस ने मांग की है,कि Ankita Bhandari Murder Case की जांच CBI से कराई जाए और सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में हो।

 SIT जांच और कोर्ट का फैसला

Ankita Bhandari Murder Case सरकार ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था।

आरोपी: पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर, अंकित गुप्ता

30 मई 2025: कोटद्वार जिला अदालत ने तीनों को आजन्म कारावास की सजा सुनाई

हालांकि, VIP एंगल पर उठे नए सवालों ने जांच की निष्पक्षता पर फिर बहस छेड़ दी है।

 आगे क्या

अब सबकी नजरें इस पर हैं, कि:

वायरल ऑडियो की फोरेंसिक जांच होती है, या नहीं

सरकार नए सिरे से जांच के आदेश देती है, या नहीं

VIP एंगल पर कोई ठोस सबूत सामने आता है,या नहीं

Ankita Bhandari Murder Case एक बार फिर न्याय, सत्ता और सच्चाई की कसौटी पर खड़ा है।

डिस्क्लेमर यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, मीडिया रिपोर्ट्स और संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित है। इसमें लगाए गए सभी आरोप कथित हैं। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार केवल न्यायालय को है।

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