Delhi Political Controversy दिल्ली CM रेखा गुप्ता पर इतिहास की अनदेखी का आरोप: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने अंग्रेजों से लड़ा था, कांग्रेस से नहीं
Delhi Political Controversy दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बयान को लेकर सियासी विवाद, विपक्ष का आरोप भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का संघर्ष अंग्रेजों के खिलाफ था, किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं।
दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर इतिहास और वर्तमान टकरा गए हैं। ‘सुभाष चंद्र प्लेस’ विवाद के बाद अब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को लेकर एक नया और गंभीर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है,कि हालिया बयानबाज़ी में शहीदेआज़म भगत सिंह के ऐतिहासिक संघर्ष को गलत संदर्भ में पेश किया गया, जो तथ्यों के साथ अन्याय है।
यह पूरा मामला अब Delhi Political Controversy का रूप ले चुका है।
इतिहास का निर्विवाद सच क्या है
इतिहास के दस्तावेज, किताबें और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमाण साफ बताते हैं, कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन किया था।
1928 में सांडर्स वध और 1929 में सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने की घटना का उद्देश्य अंग्रेजी हुकूमत को चेतावनी देना था किसी भारतीय राजनीतिक दल के खिलाफ प्रदर्शन नहीं।
यही तथ्य आज की Delhi Political Controversy की बुनियाद हैं।
रेखा गुप्ता के नाम से जुड़ा बयान क्यों विवाद में?
राजनीतिक हलकों में आरोप लगाया जा रहा है,कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बयान या उनके संदर्भ को इस तरह प्रस्तुत किया गया, मानो भगत सिंह के क्रांतिकारी कदमों को कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा हो।
विपक्ष का कहना है,कि यह ऐतिहासिक अज्ञानता नहीं तो और क्या है, क्योंकि भगत सिंह का संघर्ष आज़ादी से पहले का था, न कि आज़ादी के बाद की राजनीति से जुड़ा हुआ।
इसी कारण Delhi Political Controversy और तीखी होती जा रही है।
सोशल मीडिया पर इतिहास की याद दिलाती प्रतिक्रियाएं
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई प्रतिक्रियाएं सामने आईं
पुनीत विज ने लिखा कि शहीदों को दलगत राजनीति से दूर रखना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
सुनील शर्मा ने सवाल उठाया कि क्या सत्ता में बैठे लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन का मूल इतिहास दोबारा पढ़ने की ज़रूरत नहीं है?
शिवम (BHU) ने लिखा कि भगत सिंह ने अंग्रेजों को चुनौती दी थी, न कि किसी आधुनिक राजनीतिक दल को।
इन प्रतिक्रियाओं ने Delhi Political Controversy को सोशल मीडिया बहस का केंद्र बना दिया है।
BJP बनाम विपक्ष: राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
विपक्षी दलों ने BJP पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी के कुछ नेता ऐतिहासिक प्रतीकों का उपयोग वर्तमान राजनीति के हिसाब से कर रहे हैं।
उनका कहना है,कि इससे नई पीढ़ी में इतिहास को लेकर भ्रम पैदा होता है, और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की मूल भावना कमजोर पड़ती है।
यही वजह है, कि Delhi Political Controversy अब केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि वैचारिक संघर्ष बन गई है।
इतिहास केवल गौरव नहीं, जिम्मेदारी भी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है,कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारी केवल भावनात्मक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य के वाहक हैं।
उनके संघर्ष को गलत संदर्भ में पेश करना न सिर्फ ऐतिहासिक भूल है, बल्कि लोकतांत्रिक जिम्मेदारी से भी पीछे हटना है।
Delhi Political Controversy इसी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।
आगे क्या होगा
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है, कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता या उनकी पार्टी की ओर से इस विवाद पर कोई औपचारिक स्पष्टीकरण आएगा या नहीं।
लेकिन इतना तय है, कि यह मुद्दा इतिहास, राजनीति और नैतिकता तीनों को एक साथ कटघरे में खड़ा कर चुका है।
आने वाले दिनों में Delhi Political Controversy दिल्ली की सियासत में और तीखे सवाल खड़े कर सकती है।
निष्कर्ष
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का संघर्ष अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ था यह इतिहास का अटल सत्य है।
उन्हें आज की राजनीतिक लड़ाइयों में घसीटना न तो इतिहास के साथ न्याय है, और न ही शहीदों के बलिदान के साथ।
Delhi Political Controversy ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है,कि क्या हमारी राजनीति इतिहास से सीख ले रही है, या उसे अपने हिसाब से ढाल रही है।
डिस्क्लेमर
यह लेख सार्वजनिक बयानों, सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार और आरोप संबंधित व्यक्तियों के हैं। लेख का उद्देश्य सूचना देना और ऐतिहासिक संदर्भ स्पष्ट करना है, न कि किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को दोषी ठहराना। स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े विषय संवेदनशील हैं और सभी पक्ष कानूनन दोष सिद्ध होने तक निर्दोष माने जाते हैं।
इसे भी पढ़ें Rekha Arya Husband Statement Controversy रेखा आर्य के पति के बयान से बवाल, महिलाओं के सम्मान पर उठे गंभीर सवाल