DM Deepak Meena बड़हलगंज के मुक्तिपथ पर डीएम दीपक मीणा की विशेष नजर, पौधारोपण के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षा
DM Deepak Meena बड़हलगंज के मुक्तिपथ पर डीएम दीपक मीणा की विशेष नजर, पौधारोपण के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षागोरखपुर जनपद के दक्षिणांचल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायज़ा लेने पहुंचे जिलाधिकारी दीपक मीणा का शुक्रवार को कार्यक्रम कुछ विशेष रहा। निरीक्षण के सिलसिले में वह बड़हलगंज नगर स्थित मुक्तिपथ पहुंचे, जो पिछले कुछ वर्षों में चर्चा का विषय बना हुआ है कभी सुंदर निर्माण और साफ़-सफाई के लिए, तो कभी अव्यवस्था और लापरवाही के लिए।
डीएम के साथ चिल्लूपार विधायक राजेश त्रिपाठी, चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर, और कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने मुक्तिपथ परिसर का विस्तार से निरीक्षण, शवदाह स्थल की स्थिति का मूल्यांकन और स्नान घाटों की सफाई व्यवस्था का जायज़ा लिया। साथ ही परिसर में एक लौंग का पौधा लगाकर हरियाली और पर्यावरण संतुलन के प्रति प्रतिबद्धता भी दिखाई।

मुक्तिपथ: सेवा, आस्था और पर्यावरण का पावरफुल संगम

निरीक्षण के बाद मीडिया से बात करते हुए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने मुक्तिपथ की सराहना करते हुए कहा:
“यह स्थल न सिर्फ़ अंतिम संस्कार का स्थान है, बल्कि सामाजिक, धार्मिक और भावनात्मक रूप से भी एक पावरफुल केंद्र बन चुका है। यहां की साफ-सफाई और समर्पण की भावना देखने लायक है।”
DM Deepak Meena उन्होंने पौधारोपण को केवल औपचारिकता न मानते हुए यह भी जोड़ा कि पौधारोपण का यह कार्य प्रकृति से जुड़ाव और भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित वातावरण देने का संकल्प है। लौंग का पौधा न केवल औषधीय गुणों से भरपूर होता है, बल्कि यह स्वास्थ्य, समृद्धि और शांति का प्रतीक भी है।
उनके साथ एडीएम विनीत सिंह, एसडीएम अमित जायसवाल, PWD एक्सियन आरके सिंह, बाढ़ खंड एक्सियन वैभव सिंह, तहसीलदार सतेंद्र मौर्या, ईओ राम समुख, और विधायक प्रतिनिधि वेद प्रकाश त्रिपाठी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए ज़मीनी स्तर की रिपोर्ट तैयार करने की बात कही।
अव्यवस्थाओं पर भी पड़ा ध्यान: सकारात्मक पहल में नेगेटिव पहलू भी छिपे
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DM Deepak Meena हालांकि मुक्तिपथ की व्यवस्था और सौंदर्यीकरण की सराहना की गई, लेकिन निरीक्षण के दौरान कुछ कमियाँ भी उजागर हुईं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
श्मशान स्थल के निकट कुछ स्थानों पर जल निकासी की समुचित सुविधा नहीं थी, जिससे वर्षा ऋतु में जलजमाव और बदबू की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जो न केवल श्रद्धालुओं के लिए असुविधाजनक है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी चिंताजनक है।
वहीं स्नान घाटों की सतह पर फिसलन और सुरक्षा रेलिंग की अनुपस्थिति जैसी कमियां सामने आईं, जो तीर्थयात्रियों और स्थानीय नागरिकों के लिए संभावित दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं। ऐसे में यह आवश्यक है, कि इन सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी खामियों को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए, ताकि मुक्तिपथ न केवल आस्था का केंद्र बना रहे, बल्कि सुरक्षा के मानकों पर भी खरा उतरे।
कुछ टॉयलेट्स और वॉशिंग एरिया जर्जर अवस्था में पाए गए, जिनका जीर्णोद्धार आवश्यक है।
DM Deepak Meena स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों को बताया कि मुक्तिपथ पर कई बार विधायक और प्रशासन ने वादे तो किए, लेकिन उनका अनुपालन आधा-अधूरा ही रह गया।
नगरपालिका के सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति भी उस दिन सीमित थी, जिससे यह आशंका भी उठी कि कहीं यह निरीक्षण मात्र “दिखावा” तो नहीं ।
DM Deepak Meena जनता की राय: उम्मीदें भी हैं, और शिकायतें भी
निरीक्षण के बाद स्थानीय लोगों में उत्साह और आलोचना दोनों की मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली।
रामगोपाल शुक्ला, जो पिछले 20 वर्षों से मुक्तिपथ पर सामाजिक सेवा कर रहे हैं, ने कहा:
“डीएम साहब आए, ये बहुत अच्छी बात है। उन्होंने पौधारोपण किया, व्यवस्थाएं देखीं। लेकिन ज़रूरत है,कि ये देखना स्थायी रूप से हो, न कि किसी दौरे या फोटो सेशन तक सीमित रहे।”
DM Deepak Meena वहीं, रजनीश त्रिपाठी, एक स्थानीय दुकानदार का कहना था:
मुक्तिपथ का सौंदर्यीकरण बहुत अच्छा काम है। लेकिन बाढ़ के समय यहां कीचड़ और बदबू फैल जाती है। हर साल यही हाल होता है। पावर और पद पर बैठे लोगों को फील्ड में उतरना चाहिए, सिर्फ़ रस्म अदायगी नहीं करनी चाहिए
मुक्तिपथ का भविष्य: सुधार की ओर कदम या दोहराव की कहानी?
प्रशासनिक टीम का यह दौरा केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि आने वाले बदलावों की आधारशिला माना जा रहा है। जिलाधिकारी दीपक मीणा जैसे सक्रिय और ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारी की मौजूदगी से यह विश्वास जागा है,कि जो खामियाँ सामने आई हैं।
DM Deepak Meena उन पर अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि पावरफुल और ठोस कार्रवाई होगी। यह दौरा भविष्य में सुनियोजित विकास, बेहतर व्यवस्थाओं और जवाबदेही की ओर बढ़ने का संकेत भी देता है।
चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर ने कहा कि मुक्तिपथ को लेकर कई योजनाएं लाइन में हैं — जैसे सोलर लाइटिंग, CCTV कैमरा इंस्टालेशन, और हर महीने सफाई मॉनिटरिंग रिपोर्ट तैयार करना। लेकिन इन योजनाओं को कागज़ से जमीन पर उतारने के लिए इच्छाशक्ति और प्रशासनिक पावर की सख्त ज़रूरत है।
पौधारोपण की पहल: संदेश है या सिर्फ़ औपचारिकता?
डीएम का पौधारोपण प्रशासनिक कार्यक्रम का अहम हिस्सा रहा। लौंग का पौधा एक ओर जहां प्रतीकात्मक है, वहीं यह सवाल भी छोड़ गया कि:
क्या यह पौधा पलेगा?
क्या इसे नियमित देखभाल मिलेगी?
क्या यह पौधारोपण एक “पब्लिक रिलेशन एक्टिविटी” तक ही सीमित रहेगा?
सवाल इसलिए ज़रूरी हैं क्योंकि कई बार देखा गया है कि अधिकारी पौधारोपण करके चले जाते हैं, लेकिन देखभाल की जिम्मेदारी तय नहीं होती। और फिर कुछ ही महीनों में वह पौधा सिस्टम की उपेक्षा का शिकार हो जाता है।
DM Deepak Meena उम्मीद पर दुनिया टिकी पर जिम्मेदारियां बड़ी
मुक्तिपथ, एक ऐसा स्थान जो मौत के बाद की शांति का प्रतीक है, वहीं जीवित लोगों की संवेदनशीलता और ज़िम्मेदारी की परीक्षा का स्थल भी बन चुका है। डीएम दीपक मीणा और उनकी टीम का दौरा इस दिशा में एक सकारात्मक क़दम है, लेकिन इसकी सार्थकता तभी होगी जब
“पॉजिटिव विज़न को पावरफुल एक्शन में बदला जाएगा।”
जनता चाहती है कि यह स्थल केवल “दिखावे का पावर सेंटर” न बने, बल्कि
सेवा, श्रद्धा और स्थायीत्व का पावरफुल मॉडल बनकर उभरे।