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UGC Equity Committees Rules 2026 पर मायावती का समर्थन, सवर्ण विरोध पर कड़ा प्रहार

 UGC Equity Committees Rules 2026  के नए इक्विटी नियमों पर मायावती का बड़ा बयान बोलीं समानता के खिलाफ सवर्णों का विरोध नाजायज लेकिन लागू करने से पहले संवाद जरूरी

UGC Equity Committees Rules 2026 मायावती ने UGC के नए इक्विटी कमेटी नियमों का बचाव करते हुए जातिवादी मानसिकता पर निशाना साधा, सामाजिक तनाव से बचने के लिए संवाद की जरूरत बताई

UGC Equity Committees Rules 2026 पर मायावती का समर्थन, सवर्ण विरोध पर कड़ा प्रहार

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किए गए UGC Equity Committees Rules 2026 का मजबूती से बचाव किया है। उन्होंने इन नियमों का विरोध करने वाले सामान्य वर्ग के कुछ लोगों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह विरोध जातिवादी मानसिकता से प्रेरित है,और किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।

मायावती ने स्पष्ट कहा कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दलितों, पिछड़े वर्गों और अन्य वंचित समुदायों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए UGC Equity Committees Rules 2026 बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि इन नियमों का मकसद किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि शैक्षणिक परिसरों में न्याय, समानता और समावेश को मजबूत करना है।

हालांकि, बसपा प्रमुख ने यह भी माना कि सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को UGC Equity Committees Rules 2026 लागू करने से पहले सभी वर्गों को विश्वास में लेना चाहिए था। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना व्यापक विचार विमर्श के लिए गए फैसले सामाजिक तनाव को जन्म दे सकते हैं, जिसका लाभ केवल विभाजनकारी ताकतों को मिलता है।

X  पर लगातार पोस्ट करते हुए मायावती ने कहा कि कुछ लोग UGC Equity Committees Rules 2026 को साजिश और भेदभावपूर्ण बताकर भ्रम फैला रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है, कि ये नियम वर्षों से चली आ रही असमानताओं को दूर करने की दिशा में एक ठोस कदम हैं। उन्होंने दलितों और OBC वर्ग से भी अपील की कि वे अपने ही समाज के स्वार्थी और बिके हुए नेताओं की भड़काऊ राजनीति से सतर्क रहें।

UGC Equity Committees Rules 2026 पर मायावती का समर्थन, सवर्ण विरोध पर कड़ा प्रहार

गौरतलब है, कि UGC ने 13 जनवरी को UGC Equity Committees Rules 2026 को अधिसूचित किया है। इन नए नियमों के तहत सभी सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटियों का गठन अनिवार्य किया गया है। इन कमेटियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।

ये नए नियम 2012 के पुराने इक्विटी नियमों की जगह लेंगे, जो अब तक केवल सलाहकारी प्रकृति के थे। हालांकि, UGC Equity Committees Rules 2026 को लेकर उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन भी किए हैं, और आशंका जताई है, कि इनका दुरुपयोग हो सकता है।

इन आशंकाओं को खारिज करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा दिलाया कि नए ढांचे में किसी भी प्रकार का उत्पीड़न या भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा और UGC Equity Committees Rules 2026 का गलत इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

कुल मिलाकर, मायावती का संदेश साफ है,UGC Equity Committees Rules 2026 सामाजिक न्याय की दिशा में एक जरूरी और ऐतिहासिक कदम हैं, लेकिन इन्हें लागू करते समय संवाद, संतुलन और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, आधिकारिक बयानों और समाचार स्रोतों पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित नेताओं के निजी बयान हैं। प्रकाशक किसी भी राजनीतिक या वैचारिक पक्ष का समर्थन नहीं करता।

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