News Dilse Bharat

Umar Khalid Bail उमर खालिद मामले पर पूर्व CJI चंद्रचूड़ का बड़ा बयान, दोषसिद्धि से पहले जमानत मौलिक अधिकार

Umar Khalid Bail उमर खालिद मामले पर पूर्व CJI चंद्रचूड़ का बड़ा बयान, कहा दोषसिद्धि से पहले जमानत नागरिक का मौलिक अधिकार

Umar Khalid Bail उमर खालिद की जमानत पर पूर्व CJI डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि दोषसिद्धि से पहले जमानत नागरिक का अधिकार है। जयपुर साहित्य महोत्सव में उन्होंने न्यायिक देरी, कॉलेजियम पारदर्शिता और न्यायपालिका में भरोसे पर भी अहम बात कही।

Umar Khalid Bail उमर खालिद मामले पर पूर्व CJI चंद्रचूड़ का बड़ा बयान, दोषसिद्धि से पहले जमानत मौलिक अधिकार
Umar Khalid Bail उमर खालिद मामले पर पूर्व CJI चंद्रचूड़ का बड़ा बयान, दोषसिद्धि से पहले जमानत मौलिक अधिकार

जयपुर। छात्र नेता उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज होने की पृष्ठभूमि में देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ का बयान भारतीय न्याय व्यवस्था में एक बार फिर बहस का केंद्र बन गया है। जयपुर साहित्य महोत्सव के मंच से उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोषसिद्धि से पहले जमानत देना किसी भी नागरिक का अधिकार है, क्योंकि भारतीय कानून की बुनियाद “निर्दोषता की प्रकल्पना” पर टिकी है। यह टिप्पणी Umar Khalid Bail को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस को नया आयाम देती है।

19वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में ‘Ideas of Justice’ सत्र के दौरान वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी ने जब Umar Khalid Bail का मुद्दा उठाया, तो न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) चंद्रचूड़ ने कहा कि जब तक अपराध सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक किसी भी आरोपी को दोषी मानना संविधान की भावना के खिलाफ है।

पूर्व CJI ने दो टूक कहा कि जमानत पर फैसला करते समय अदालतों को भावनाओं या दबाव के बजाय कानून के स्थापित सिद्धांतों पर चलना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि “जेल अपवाद है,और जमानत नियम”, और यदि आरोपी से समाज को तत्काल खतरा नहीं है, तो जमानत से इनकार नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार Umar Khalid Bail जैसे मामलों में अदालतों को विशेष सतर्कता और निष्पक्षता बरतनी चाहिए।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत से इनकार केवल तीन परिस्थितियों में किया जा सकता है,यदि आरोपी के दोबारा अपराध करने की आशंका हो, यदि वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता हो या यदि उसके न्यायिक प्रक्रिया से भागने का खतरा हो। उन्होंने कहा कि यदि ये आधार मौजूद नहीं हैं, तो जमानत देना अदालत का दायित्व बन जाता है। Umar Khalid Bail के संदर्भ में यह टिप्पणी बेहद अहम मानी जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर बोलते हुए पूर्व CJI ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालत को और अधिक गहराई से जांच करनी चाहिए, लेकिन केवल आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति को वर्षों तक जेल में बंद रखना न्याय नहीं है। उन्होंने चिंता जताई कि भारत में कई लोग बिना दोषसिद्धि के लंबे समय तक जेल में रहते हैं, जो संविधान प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। इस संदर्भ में Umar Khalid Bail का मामला न्यायिक प्रक्रिया की जटिलताओं को उजागर करता है।

भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में देरी पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि यदि मुकदमे का निपटारा समय पर नहीं हो रहा है, तो आरोपी जमानत का अधिकारी है। उन्होंने निचली अदालतों द्वारा जमानत देने में झिझक को गंभीर चिंता का विषय बताया और कहा कि न्यायाधीशों के भीतर यह भय घर कर गया है,कि जमानत देने पर उनकी निष्ठा पर सवाल उठ सकते हैं। यही वजह है कि Umar Khalid Bail जैसे मामले अंततः उच्चतम न्यायालय तक पहुंचते हैं।

पूर्व CJI ने न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली पर भी खुलकर राय रखी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में जनता का भरोसा मजबूत करने के लिए कॉलेजियम व्यवस्था में पारदर्शिता लाना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने नागरिक संस्थाओं से विशिष्ट और निष्पक्ष व्यक्तियों को शामिल किए जाने का सुझाव दिया, ताकि फैसलों पर समाज का विश्वास बना रहे और Umar Khalid Bail जैसे संवेदनशील मामलों में अविश्वास की स्थिति न बने।

इसे भी पढ़ें Umar Khalid Interim Bail उमर खालिद अंतरिम जमानत 14 दिन की राहत, फोन और सोशल मीडिया पर सख्त शर्तें

अपने कार्यकाल के दौरान दिए गए बड़े फैसलों का जिक्र करते हुए उन्होंने सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं को स्थायी कमीशन, समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर करना और चुनावी बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को परिवर्तनकारी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का लाइव प्रसारण हिंदी सहित संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में शुरू होना न्याय को आम जनता तक ले जाने की दिशा में बड़ा कदम था।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने वैवाहिक बलात्कार को अब तक अपराध की श्रेणी में न लाए जाने पर अफसोस जताया और इसके लिए कानून में बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आज़ादी के 76 वर्षों बाद भी इस मुद्दे पर चुप्पी न्याय व्यवस्था के लिए चुनौती है।

कुल मिलाकर, पूर्व CJI का यह बयान सिर्फ Umar Khalid Bail तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र में न्याय, स्वतंत्रता और संविधान की आत्मा की याद दिलाता है। यह टिप्पणी न्यायपालिका को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है, कि न्याय का अर्थ केवल सजा देना नहीं, बल्कि व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना भी है।

यह लेख सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिए गए बयानों, मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित वक्ता के निजी दृष्टिकोण हैं। लेख का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है, न कि किसी न्यायिक प्रक्रिया, मुकदमे या निर्णय को प्रभावित करना। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी राय या निष्कर्ष से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।

इसे भी पढ़े Zohran Mamdani Umar Khalid Letter उमर खालिद को न्यूयॉर्क के मेयर का पत्र, अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर उठा लंबी हिरासत का मुद्दा

Exit mobile version