UP mountaineer Uma Singh गोरखपुर के पर्वतारोही उमा सिंह ने रचा इतिहास, साइकिल से फतह की दुनिया की 10वीं सबसे ऊंची चोटी
UP mountaineer Uma Singh हौसला संघर्ष और समर्पण इन तीन वाक्य एक लड़के को आज दुनिया भर में फेमस कर दिया उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से संबंध रखने वाले उमा सिंह पर्वतारोही अपने जज्बे से उसने कर दिखाया जो आज तक किसी भारतीय युवक ने नहीं किया। उन्होंने न केवल दुनिया की 10वीं सबसे ऊंची चोटी “अन्नपूर्णा-I” (8091 मीटर, नेपाल) पर तिरंगा फहराया, बल्कि यह सफर साइकिल पर तय करके एक नया विश्व रिकॉर्ड भी बना डाला।
गोरखपुर से शुरू हुई ‘असंभव’ की यात्रा

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UP mountaineer Uma Singh उत्तर प्रदेश का गोरखपुर शहर जहां धार्मिक परंपराएं और साहित्यिक विरासत समृद्ध है, वहीं अब यह एक और पहचान के लिए जाना जाएगा—पर्वतारोही उमा सिंह के अद्भुत साहस के लिए। एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले उमा ने जब लोगों से कहा कि वह साइकिल से पर्वतारोहण करने जा रहे हैं, तो अधिकतर ने इसे मज़ाक समझा।
लोगों ने कहा, पागल हो गया है। लेकिन मुझे पता था कि मैं पागल नहीं, जुनूनी हूँ। उमा सिंह
UP mountaineer Uma Singh साइकिल से नेपाल की चढ़ाई असंभव को मुमकिन बनाया
उमा सिंह ने गोरखपुर से नेपाल की सीमा तक का सफर साइकिल से तय किया। उसके बाद अन्नपूर्णा बेस कैंप तक पैदल ट्रेकिंग और अंत में विनाशकारी तापमान और ऑक्सीजन की कमी के बीच चढ़ाई पूरी की।
इस दौरान उन्होंने जो सहा, वो हर किसी के बस की बात नहीं:
तेज़ हवाएं और बर्फीला तूफान
खराब सड़कों पर लगातार पैडल चलाना
सीमित भोजन और ऑक्सीजन
अकेलेपन की मानसिक लड़ाई
परिस्थितियाँ बनीं चरित्र की परीक्षा
चुनौतियाँ:
हड्डी तोड़ देने वाली ठंड: शून्य से 15 डिग्री नीचे तापमान
ऑक्सीजन की कमी: 7000 मीटर के बाद सांस लेना भी कठिन
आर्थिक तंगी: खुद के पैसों से साइकिल और किट खरीदी
UP mountaineer Uma Singh कैसे लड़ी लड़ाई:
उमा ने योग और मानसिक प्रशिक्षण से खुद को मजबूत किया
सामाजिक मीडिया पर क्राउडफंडिंग के जरिए कुछ आर्थिक मदद मिली
GPS और मौसम उपकरण खुद ही इकट्ठा किए
“जो चीजें नहीं थीं, उन्हें रोने की जगह मैंने रास्ता ढूंढा कि कैसे बिना उनके भी चोटी तक पहुँचा जाए।” — उमा
जीत जो इतिहास बन गई
उमा सिंह ने 26 जुलाई 2025 को सुबह 5:43 बजे अन्नपूर्णा-I की चोटी पर तिरंगा फहराया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रगान गाया और अपने गांव का नाम चोटी पर पत्थरों से लिखा।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि:
वह पहले भारतीय पुरुष बने जिन्होंने साइकिल से इस चोटी तक का मिशन पूरा किया
वह अपने क्षेत्र के पहले युवा हैं जिन्होंने यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त की
UP mountaineer Uma Singh सोशल मीडिया पर बधाईयों की बौछार
जैसे ही उमा की तस्वीरे और विडियो वायरल हुए, #UmaSinghSummit और #CyclingToAnnapurna ट्रेंड करने लगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा:
गोरखपुर के वीर पुत्र उमा सिंह ने न केवल प्रदेश बल्कि देश का गौरव बढ़ाया है। यह हर युवा के लिए प्रेरणा हैं।
UP mountaineer Uma Singh यह हर युवा की कहानी हो सकती है
उमा की कहानी सिर्फ उनके शरीर की ताकत की नहीं, बल्कि मन की शक्ति और लक्ष्य के प्रति दीवानगी की मिसाल है। उन्होंने साबित कर दिया कि “हीरो” बनने के लिए न तो सुपरपावर चाहिए, न स्पॉन्सर—बस इरादा और हौसला चाहिए।
“मैं चाहता हूँ कि हर गांव का लड़का-लड़की मुझसे बड़ा सपना देखे, और उसे सच करे।” उमा
एक सच्चा ट्रेलब्लेज़र
गोरखपुर के उमा सिंह ने न केवल एक चोटी पर फतह की है, बल्कि लाखों युवाओं के दिलों में जगह बनाई है। वह सिर्फ पर्वतारोही नहीं हैं, वह संघर्ष, साहस और सफलता का जीवंत उदाहरण हैं।
इससे यह सिद्ध होता है कि अगर लक्ष्य बड़ा हो, और जुनून सच्चा हो, तो साइकिल से भी दुनिया की सबसे ऊंची चुनौतियों को मात दी जा सकता है।
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क्या भारत के ग्रामीण युवाओं को और अधिक अवसर मिलने चाहिए?
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