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Gorakhpur AAP Leader Death Case  मौत, बवाल और पुलिस एक्शन की पूरी कहानी

 Gorakhpur AAP Leader Death Case  मौत, बवाल और पुलिस एक्शन की पूरी कहानी

गोरखपुर हमेशा से राजनीति और अपराध दोनों के लिए सुर्ख़ियों में रहा है। लेकिन हाल ही में हुए Gorakhpur AAP Leader Death Case ने जिले की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक टकराव को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह कहानी सिर्फ़ एक नेता की मौत की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की असलियत है, जिसमें आम जनता आज भी न्याय और सुरक्षा की उम्मीद लगाए बैठी है।

 घटना का पूरा टाइमलाइन (Chronology of Events)

Gorakhpur AAP Leader Death Case 
सोर्स बाय गूगल इमेज

 23 अगस्त 2025  पैसों के विवाद से खूनी हमला Gorakhpur AAP Leader Death Case

AAP नेता कुंज बिहारी निषाद ₹50,000 के बकाया पैसे लेने अभिषेक पांडेय के घर पहुँचे।

बहस बढ़ी और आरोप है,कि अभिषेक पांडेय अपने 10–12 साथियों के साथ हिंसा और मारपीट पर उतर आया।

लोहे की रॉड और धारदार हथियारों से कुंज बिहारी और उनके साले पर हमला किया गया।

दोनों गंभीर रूप से घायल होकर Marigold Hospital (गोरखनाथ क्षेत्र) में भर्ती हुए।

पुलिस ने उसी रात अभिषेक पांडेय, हिमाचल पांडेय और 12 अज्ञात पर धारा 307 (हत्या की कोशिश) में मुकदमा दर्ज किया।

 24–25 अगस्त 2025 — अस्पताल में इलाज और तनाव

डॉक्टरों की देखरेख में इलाज जारी रहा।

कुंज बिहारी की हालत नाज़ुक बनी रही।

परिवार और समर्थकों के आने-जाने से माहौल तनावपूर्ण रहा।

 26 अगस्त 2025 — मौत और हंगामा

सुबह इलाज के दौरान कुंज बिहारी निषाद का निधन हो गया।

मौत की खबर पर परिवार और AAP कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में हंगामा किया।

आरोप लगाया गया कि इलाज में लापरवाही हुई।

शव को पोस्टमार्टम के लिए BRD Medical College ले जाया गया, लेकिन समर्थकों ने रास्ता रोककर नारेबाज़ी की।

 26 अगस्त 2025 — पुलिस बल प्रयोग और SHO घायल

भीड़ ने पथराव शुरू किया, स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

पुलिस ने बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया।

झड़प में गोरखनाथ थाना प्रभारी (SHO) शशिभूषण राय घायल हो गए।

उनका CT-स्कैन कराया गया और इलाज जारी है।

 कानूनी और पुलिस कार्रवाई Gorakhpur AAP Leader Death Case

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शुरुआती केस धारा 307 IPC (हत्या का प्रयास) में दर्ज था।

कुंज बिहारी की मौत के बाद धाराएँ 302 IPC (हत्या) में बदल दी गईं।

मुख्य आरोपी: अभिषेक पांडेय और हिमाचल पांडेय।

लगभग 12 अज्ञात हमलावरों की तलाश जारी।

इलाज में लापरवाही के आरोप की अलग से जांच हो रही है।

 कौन घायल हुआ और किसकी मौत हुई?

कुंज बिहारी निषाद  23 अगस्त को घायल, 26 अगस्त को मौत।

उनके साले → गंभीर घायल, अभी भी अस्पताल में भर्ती।

SHO शशिभूषण राय  पथराव में घायल, सिर में चोट।

कुछ स्थानीय लोग और अस्पताल के स्टाफ भी मामूली रूप से घायल हुए।

 पॉज़िटिव पहलू  पुलिस की त्वरित कार्रवाई

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उसी दिन रामगढ़ताल पुलिस ने एक लापता बच्ची को सिर्फ़ 30 मिनट में खोजकर परिजनों को सौंप दिया।

यह घटना दिखाती है, कि जहाँ एक ओर प्रशासन पर सवाल उठते हैं, वहीं दूसरी ओर समय पर की गई कार्रवाई से सिस्टम की पॉज़िटिव इमेज भी सामने आती है।

 निष्कर्ष: सिस्टम पर उठते सवाल Gorakhpur AAP Leader Death Case

Gorakhpur AAP Leader Death Case यह सवाल खड़े करता है:

क्या अस्पतालों में सुरक्षा और इलाज की व्यवस्था पर्याप्त है?

क्या पुलिस समय रहते भीड़ और अपराध को नियंत्रित कर पा रही है?

क्या राजनीतिक दबाव न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है?

जवाब तो तफ्तीश और अदालत की सुनवाई से सामने आएंगे, लेकिन अभी इस केस ने गोरखपुर की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक क्षमताओं को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

 Q1. कुंज बिहारी निषाद की मौत कब हुई?

26 अगस्त 2025 की सुबह इलाज के दौरान।

Q2. हमला क्यों हुआ था?

₹50,000 के लेन-देन के विवाद से मामला हिंसक हो गया।

Q3. मुख्य आरोपी कौन हैं?

अभिषेक पांडेय और हिमाचल पांडेय।

 Q4. SHO को चोट कैसे लगी?

पोस्टमार्टम के समय भीड़ ने पथराव किया, जिसमें SHO शशिभूषण राय घायल हुए।

 Q5. केस की मौजूदा स्थिति क्या है?

FIR की धाराएँ 302 में बदली जा चुकी हैं, आगे की दिशा पोस्टमार्टम और पुलिस रिपोर्ट पर निर्भर है।

 

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