Legendary Folk Artist Ram Lawat Pandey जिसने लोककला को जिया, वही आज खुद एक लोककथा बन गया श्रद्धांजलि रामलवट पांडेय जी
Legendary Folk Artist Ram Lawat Panday गोरखपुर (कोनी, खोराबार) – 63 वर्षीय रामलवट पांडेय जी अब हमारे बीच नहीं रहे। यह खबर सुनते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सिर्फ गांव ही नहीं, बल्कि पूरे गोरखपुर के लोक कलाकारों, रंगकर्मियों और संस्कृतिकर्मियों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है।
Legendary Folk Artist Ram Lawat Pandey रामलवट पांडेय जी का जीवन सिर्फ एक साधारण इंसान का नहीं था, बल्कि एक ऐसी आत्मा का था जो कला, संस्कृति और इंसानियत से भरपूर थी। उनका जीवन भले ही सामान्य आर्थिक परिस्थितियों में बीता, लेकिन उन्होंने जो प्रेम, सम्मान और पहचान अपने गांव और आस-पास के क्षेत्र में अर्जित की, वो किसी बड़े कलाकार या सेलेब्रिटी से कम नहीं थी।
Legendary Folk Artist Ram Lawat Pandey कला के प्रति समर्पण
रामलवट पांडेय जी लोक कला के प्रति बेहद समर्पित थे। वे ढोल वादन में पारंगत थे, भजन और कीर्तन गाते थे और अपनी ग्रामसभा कोनी में होने वाली रामलीला में प्रमुख भूमिका निभाते थे। विशेषकर बाणासुर के किरदार में वे इतने जीवंत अभिनय करते थे कि दर्शक भावविभोर हो उठते थे।
Legendary Folk Artist Ram Lawat Pandey उनकी अभिनय शैली में इतनी सच्चाई और ऊर्जा होती थी कि लोग दूर-दराज से सिर्फ रामलवट जी को मंच पर देखने आते थे। रामलीला जैसे आयोजनों को वे सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि संस्कृति का उत्सव मानते थे। उनकी उपस्थिति ही आयोजन को जीवंत बना देती थी।
Legendary Folk Artist Ram Lawat Pandey हंसमुख, विनम्र और सरल व्यक्तित्व
उनका व्यवहार हमेशा सहज और स्नेहिल रहा। वे मुस्कान के साथ हर किसी से मिलते थे। उनकी बातों में अपनापन, आंखों में चमक और दिल में सबके लिए जगह होती थी।
Legendary Folk Artist Ram Lawat Pandey गांव का कोई दुखी हो, कोई शादी-ब्याह का आयोजन हो या कोई त्योहार – रामलवट जी सबसे पहले वहां पहुंचते थे। उन्हें कभी किसी ने गुस्से में नहीं देखा। उनके बोलने का तरीका इतना सहज और मीठा था कि सामने वाला अपने आप ही उनका दीवाना हो जाता था।
Legendary Folk Artist Ram Lawat Pandey अचानक आई यह दुखद घड़ी
कुछ दिन पहले उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। परिवारजन उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां उनका इलाज चल रहा था। लेकिन विधि को कुछ और ही मंजूर था। 63 वर्ष की आयु में वे इस दुनिया को अलविदा कह गए।
उनका जाना केवल एक इंसान का जाना नहीं है यह एक परंपरा, एक संस्कृति, एक लोक ध्वनि, एक सरल मुस्कान, और एक जीवंत किरदार का विदा हो जाना है।
गांव, समाज और कलाकार समुदाय में शोक
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उनके अंतिम संस्कार में बड़हलगंज घाट पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर किसी की आंखें नम थीं। हर चेहरे पर एक ही सवाल था – इतना नेकदिल और जीवंत इंसान इतनी जल्दी कैसे चला गया?
Legendary Folk Artist Ram Lawat Pandey डा० एम के सिंह, वरिष्ठ रंगकर्मी बेचन सिंह, अख्तर हुसैन, देशबंधु पांडेय, अभिमन्यु पासवान, गुड़िया, प्रदीप जायसवाल, झीनक सिंह, पूर्व प्रधान गिरीश चंद्र सिंह, धर्मेंद्र साहनी “धर्मू”, जगदयाल, धरम निषाद, प्रदीप सिंह, जगदीश सिंह, रमायन यादव, सुरेंद्र सिंह, रामललित यादव, रामरक्षा चौधरी, दिनेश, मुन्ना समेत अनेकों लोगों ने गहरी शोक संवेदना प्रकट की।
हर किसी ने एक स्वर में यही कहा की “रामलवट भइया जैसे लोग बार-बार नहीं जन्म लेते। वो कलाकार तो थे ही, पर सबसे पहले एक अच्छे इंसान थे।”
पारिवारिक विरासत और उनकी अंतिम पहचान
उनकी संतानों के लिए वे सिर्फ पिता नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, शिक्षक और प्रेरणास्त्रोत थे। जीवन के हर मोड़ पर उन्होंने अपने बच्चों का साथ दिया, चाहे हालात जैसे भी रहे हों।
सामाजिक योगदान भी अनमोल
Legendary Folk Artist Ram Lawat पाण्डेय रामलवट पांडेय जी सिर्फ मंच पर ही नहीं, बल्कि समाज में भी सक्रिय थे। वे हमेशा गरीबों की मदद के लिए तैयार रहते थे। किसी की तबीयत खराब हो, तो दवा लाने में मदद, किसी के खेत में काम हो, तो हाथ बंटाने में पीछे नहीं हटते थे।
वे धर्म के नाम पर कभी किसी को नहीं बांटते थे, बल्कि हमेशा एकता, भाईचारे और प्रेम का संदेश देते थे।
Legendary Folk Artist Ram Lawat Pandey एक सच्चे कलाकार को हमारी श्रद्धांजलि
रामलवट पांडेय जी का जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है – यह गांव की धड़कन, संस्कृति की आत्मा, और कला की चेतना का चुपचाप विलीन हो जाना है।
आज जब हर तरफ भौतिकता की दौड़ है, ऐसे में रामलवट जी जैसे लोग हमें सिखाते हैं कि इंसानियत, प्रेम, और संस्कृति ही असली पूंजी है।
ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वे रामलवट पांडेय जी की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिवार को इस कठिन समय में संबल और शक्ति प्रदान करें।
उनकी यादें, उनकी कला, उनका संगीत और उनकी मुस्कान – हम सबके दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी।