गोरखपुर का बड़ा अपराध कांड: Arjun Pandey Arrest, हमला, मौत और पुलिस की सख्ती
23 अगस्त: कर्ज़ के विवाद से शुरू हुआ खूनी हमला
Arjun Pandey Arrest गांव पहुंचे थे। इसी दौरान अभिषेक पांडेय, हिमाचल पांडेय और उनके साथियों (करीब 10–12 लोग) ने उन पर लोहे की रॉड और धारदार हथियारों से हमला कर दिया।
हमले में कुंज बिहारी के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं, जबकि उनका साला भी बुरी तरह घायल हुआ। इसी दिन गोरखनाथ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई जिसमें हत्या के प्रयास और एससी/एसटी एक्ट की धाराएँ शामिल की गईं।
24–25 अगस्त: अस्पताल में जद्दोजहद और इलाज पर सवाल

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घायल कुंज बिहारी को स्थानीय निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।परिवार का आरोप है, कि चार घंटे तक इलाज नहीं मिला, गंभीर हालत होने के बावजूद सीटी स्कैन और अन्य ज़रूरी जांच देर से की गई।
परिजनों ने यह भी कहा कि अस्पताल प्रबंधन ने कागज़ों पर दबाव देकर इस घटना को ‘दुर्घटना’ के रूप में दर्ज कराया।
इस दौरान मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही और डॉक्टरों ने उसे मेडिकल कॉलेज रेफर करने की बात कही।
पीड़िता का परिवार लगातार न्याय और सही इलाज की मांग करता रहा।
26 अगस्त: मौत की खबर और गोरखपुर में बवाल Arjun Pandey Arrest
26 अगस्त को कुंज बिहारी की मौत की सूचना मिलते ही गुस्से की लहर दौड़ गई।
परिवार और आप कार्यकर्ता अस्पताल के बाहर जुट गए। माहौल इतना बिगड़ा कि पत्थरबाजी और तोड़फोड़ हुई, जिसमें गोरखनाथ थाने के प्रभारी शशिभूषण राय समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
इस घटना ने पूरे शहर को हिला दिया और पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया कि अपराधियों को तुरंत पकड़कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
उसी दिन पुलिस का बड़ा कदम: Arjun Pandey Arrest
Gorakhpur AAP Leader Death Case मौत, बवाल और पुलिस एक्शन की पूरी कहानी
इसी दिन पुलिस ने फरार चल रहे मुख्य अभियुक्तों में से एक अर्जुन पांडेय को गिरफ्तार कर लिया।
अर्जुन पांडेय, पुत्र रामदास पांडेय, ग्राम ईटार, थाना सहजनवा, गोरखपुर का रहने वाला है।
गिरफ्तारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आदेश, एसपी नगर के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी गोरखनाथ की देखरेख में हुई।
टीम में उपनिरीक्षक मनीष गिरी, रिपुसूदन शुक्ल, अनूप सिंह और कांस्टेबल दीपक सिंह यादव व अशोक यादव शामिल रहे।
गिरफ्तारी को पुलिस ने “तेज़, ठोस और कानूनसम्मत कार्रवाई” बताया और कहा कि बाकी आरोपी भी जल्द पकड़ में आएंगे।
कौन है अर्जुन पांडेय? आपराधिक इतिहास से पुलिस भी दंग
गिरफ्तारी के बाद जब रिकॉर्ड खंगाले गए तो पता चला कि अर्जुन कोई सामान्य युवक नहीं बल्कि पुराना अपराधी है।
वर्ष 2022 में ही उस पर धारा 323, 504 और एससी/एसटी एक्ट के तहत गंभीर केस दर्ज हो चुके हैं।
इलाके में वह दबंगई और विवादित गतिविधियों के लिए कुख्यात रहा है।
यही वजह है कि पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी को अपराधियों के लिए “चेतावनी” बताया है।
परिवार का दर्द: न्याय की मांग और अस्पताल की जवाबदेही
कुंज बिहारी के परिवार का कहना है,कि हत्या के जिम्मेदार सिर्फ हमलावर नहीं बल्कि अस्पताल की लापरवाही भी है।
उनका आरोप है, कि अगर सही समय पर इलाज मिलता तो शायद उनकी जान बच जाती।
उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर “नियमों को तोड़ने और घटना को छिपाने” का भी आरोप लगाया।
यही गुस्सा मौत के बाद सड़कों पर फूटा और अस्पताल के बाहर भीषण हंगामा हुआ।
पुलिस की प्रतिक्रिया: सख्त संदेश और आगे की जांच
पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद साफ कहा है, कि “गोरखपुर में अपराधियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा”।
एक आरोपी जेल भेजा गया है,और बाकी की तलाश जारी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल जांच और गवाहों के बयान पर आगे की धाराएँ तय होंगी।
अगर सबूत पुख्ता मिले तो हत्या (302 IPC) की धारा भी जोड़ी जा सकती है।
इस मामले से क्या सबक? Arjun Pandey Arrest
सकारात्मक पक्ष : पुलिस की तेज कार्रवाई और आरोपी की गिरफ्तारी ने अपराधियों में डर पैदा किया है।
नकारात्मक पक्ष : अस्पताल की भूमिका और इलाज में देरी पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
सत्य, न्याय, जवाबदेही और सख्ती — यही इस केस की असली सीख है।
निष्कर्ष: न्याय की राह और समाज के लिए संदेश
गोरखपुर की इस घटना ने यह साबित कर दिया है, कि एक छोटा-सा विवाद कैसे जानलेवा रूप ले सकता है।
पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में है, और समाज यह चाहता है, कि अपराधियों को सख्त सज़ा मिले।
पुलिस की कार्रवाई से भरोसा तो बढ़ा है, लेकिन जब तक सभी आरोपी सलाखों के पीछे नहीं जाते और अस्पताल की जिम्मेदारी तय नहीं होती तब तक न्याय अधूरा रहेगा।
यह केस सिर्फ़ गोरखपुर का नहीं, पूरे समाज के लिए चेतावनी है, कि कानून से ऊपर कोई नहीं और लापरवाही की कोई जगह नहीं।