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Paneer Adulteration पनीर को ताजा दिखाने का घातक खेल, न्यूट्रलाइजर की मिलावट उजागर, फैक्ट्री पर कोर्ट में केस

Paneer Adulteration पनीर को ताजा दिखाने का खतरनाक खेल: न्यूट्रलाइजर की मिलावट से उजागर हुआ मुनाफाखोरी का नेटवर्क

Paneer Adulteration पनीर में न्यूट्रलाइजर मिलाकर उसे ताजा दिखाने का मामला सामने आया है। जांच में मिलावट की पुष्टि के बाद फैक्ट्री पर संतकबीरनगर CJM कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया गया।

बाजार में बिकने वाले पनीर की चमक और ताजगी अब सवालों के घेरे में है। संतकबीरनगर जिले में सामने आए एक गंभीर मामले ने यह साफ कर दिया है कि मुनाफे की लालच में कुछ लोग आम जनता की सेहत से खुला खिलवाड़ कर रहे हैं। जांच में सामने आया कि पनीर को खराब होने से बचाने और खट्टापन दबाने के लिए उसमें प्रतिबंधित न्यूट्रलाइजर मिलाया जा रहा था। यह मामला Paneer Adulteration की गंभीर श्रेणी में आता है, जिसके बाद संबंधित फैक्ट्री के खिलाफ CJM कोर्ट में वाद दायर किया गया है।

Paneer Adulteration पनीर को ताजा दिखाने का घातक खेल, न्यूट्रलाइजर की मिलावट उजागर, फैक्ट्री पर कोर्ट में केस

पनीर खराब होने पर उसमें प्राकृतिक रूप से खट्टापन आने लगता है, जो उसकी गुणवत्ता का संकेत होता है। लेकिन जांच में सामने आया कि न्यूट्रलाइजर मिलाने से यह खट्टापन दिखाई नहीं देता, जिससे पनीर बाहर से ताजा लगता है, जबकि अंदर से उसकी गुणवत्ता पूरी तरह नष्ट हो चुकी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका उपभोक्ताओं को धोखा देने के साथ साथ Paneer Adulteration का स्पष्ट उदाहरण है।

न्यूट्रलाइजर स्वयं एक रासायनिक तत्व है, जिसका उपयोग औद्योगिक स्तर पर पीएच संतुलन बनाए रखने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग केमिकल रिसाव को नियंत्रित करने और कुछ कॉस्मेटिक उत्पादों में स्किन टोन संतुलन के लिए होता है, लेकिन खाद्य पदार्थों में इसका इस्तेमाल FSSAI मानकों के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे पनीर का सेवन लंबे समय तक करने से पेट, लीवर और आंतों से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जिससे Paneer Adulteration को स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है।

यह मामला दो महीने पहले दीपावली के दौरान सामने आया, जब जिले में बड़े पैमाने पर पनीर की आपूर्ति की गई थी। गोरखपुर जिले के सिकरीगंज क्षेत्र से संतकबीरनगर में पनीर लाया गया था। त्योहार की बढ़ी मांग का फायदा उठाकर मिलावटी पनीर बाजार में उतारने की कोशिश की गई।

सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय सतीश कुमार की निगरानी में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान संदिग्ध पनीर पकड़ा गया। प्रारंभिक जांच में यह मानकों पर खरा नहीं उतरा, जिसके बाद पूरे स्टॉक को नष्ट करा दिया गया। हालांकि, नियमानुसार पनीर का एक नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया।

लैब से आई रिपोर्ट ने अधिकारियों को भी चौंका दिया। जांच में साफ तौर पर पनीर में न्यूट्रलाइजर की पुष्टि हुई। रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि मामला सिर्फ पनीर तक सीमित नहीं है, बल्कि Paneer Adulteration की पूरी सप्लाई चेन इसमें शामिल है।

इसके बाद संतकबीरनगर के अधिकारियों ने गोरखपुर प्रशासन को पत्र लिखकर कार्रवाई की सिफारिश की। गोरखपुर में संबंधित फैक्ट्री पर छापेमारी कर मिल्क पाउडर के नमूने सील किए गए। जांच में यह भी पुष्टि हुई कि न्यूट्रलाइजर मिल्क पाउडर में पहले से मौजूद था, जिससे पनीर तैयार किया गया था। इससे साफ हो गया कि मिलावट की जड़ फैक्ट्री स्तर से ही शुरू हुई थी।

मिल्क पाउडर की आपूर्ति फर्रुखाबाद की एक कंपनी द्वारा की गई थी। अब इस कंपनी पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। खाद्य विभाग का कहना है कि Paneer Adulteration के इस नेटवर्क में शामिल हर व्यक्ति और संस्था के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय सतीश कुमार ने बताया कि लैब रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने साफ कहा कि मिलावट के इस धंधे में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। आम जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर कानून का शिकंजा और कसा जाएगा।

डिस्क्लेमर

यह समाचार आधिकारिक जांच, प्रयोगशाला रिपोर्ट और प्रशासनिक बयान पर आधारित है। जांच प्रक्रिया जारी है। कानून के अनुसार दोष सिद्ध होने तक सभी संबंधित पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

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