गोरखपुर में बिजली कर्मियों का बड़ा Power Privatization Protest, निजीकरण के खिलाफ हज़ारों आवाज़ें बुलंद

Written by: akhtar husain

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गोरखपुर में बिजली कर्मियों का बड़ा Power Privatization Protest, निजीकरण के खिलाफ तेज़ होता आंदोलन

गोरखपुर में बिजली कर्मियों का Power Privatization Protest तेज़, निजीकरण के विरोध में मुख्य अभियंता कार्यालय पर प्रदर्शन, अभियंताओं ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध, कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की।

गोरखपुर में बिजली कर्मियों का बड़ा Power Privatization Protest, निजीकरण के खिलाफ हज़ारों आवाज़ें बुलंद
गोरखपुर में बिजली कर्मियों का बड़ा Power Privatization Protest, निजीकरण के खिलाफ हज़ारों आवाज़ें बुलंद

गोरखपुर। शहर में सोमवार को बिजली विभाग के कर्मचारियों का गुस्सा चरम पर दिखा, जब हजारों कर्मचारियों ने निजीकरण के खिलाफ मुख्य अभियंता कार्यालय के बाहर जोरदार Power Privatization Protest किया। वहीं विद्युत अभियंताओं ने लगातार पांचवें दिन काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जारी रखा। कर्मचारियों ने साफ तौर पर कहा कि निजीकरण न सिर्फ उनके भविष्य के लिए खतरा है, बल्कि आम उपभोक्ता की बिजली व्यवस्था को भी अस्थिर कर सकता है। इसीलिए सभी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधा हस्तक्षेप करने, निजीकरण का फैसला वापस लेने और पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा की गई सभी दमनात्मक कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की मांग की।

पिछले एक वर्ष से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का कहना है,कि प्रबंधन एकतरफा फैसले थोपकर विभागीय माहौल खराब कर रहा है। कर्मचारियों ने कहा कि वे जनता को परेशान किए बिना अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी शांति को कमज़ोरी समझा जा रहा है। नोटिस, ट्रांसफर और अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसी बातें मनोबल तोड़ने का प्रयास हैं। उनका कहना है कि यह Power Privatization Protest केवल नौकरी बचाने के लिए नहीं है, बल्कि स्थिर, सुरक्षित और किफायती बिजली व्यवस्था के लिए लड़ाई है। निजीकरण से आउटसोर्सिंग बढ़ने, दरों में वृद्धि और सेवा गुणवत्ता गिरने का खतरा बताया गया।

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मुख्य अभियंता कार्यालय पर एकजुट हुए बिजली कर्मियों ने यह भी कहा कि अगर उनकी मांगों पर शीघ्र सुनवाई नहीं हुई, तो यह Power Privatization Protest और बड़े स्तर पर फैल सकता है। प्रदर्शन में मौजूद पदाधिकारी पुष्पेंद्र सिंह, जीवेश नंदन, जितेंद्र कुमार गुप्त, सीबी उपाध्याय, प्रभुनाथ प्रसाद, संगम लाल मौर्य, इस्माइल खान, संदीप श्रीवास्तव, करुणेश त्रिपाठी, ओम गुप्ता, राजकुमार सागर, विजय बहादुर सिंह और राकेश चौरसिया ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक विरोध को किसी भी तरह दबाया नहीं जा सकता। कर्मचारियों का मानना है,कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से हालात सुधर सकते हैं,और ऊर्जा विभाग में स्थिरता लौट सकती है।

प्रदेश में बिजली सेवा पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में निजीकरण का फैसला और अस्थिरता पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का भी कहना है, कि बिजली जैसी बुनियादी सेवा में सुधार के लिए कर्मचारियों और उपभोक्ताओं की राय शामिल करना जरूरी है। गोरखपुर का यह Power Privatization Protest अब पूरे प्रदेश में विरोध की नई लहर का संकेत दे रहा है और कर्मचारी आशा कर रहे हैं, कि सरकार जल्द ही गंभीरता से इस मुद्दे पर बातचीत शुरू करेगी।

Disclaimer:यह लेख उपलब्ध जानकारी और प्रदर्शन में शामिल पक्षों के बयानों के आधार पर लिखा गया है। पाठकों से आग्रह है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले आधिकारिक स्रोतों से अद्यतन तथ्य अवश्य जांचें।

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akhtar husain

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