Land Acquisition Protest: मल्हीपुर गांव में जमीन बचाने सड़क पर उतरे किसान, तहसील में प्रदर्शन कर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
Land Acquisition Protest के तहत सहजनवां तहसील पहुंचे मल्हीपुर गांव के किसान, गीडा द्वारा प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का विरोध, 200 मकान और स्कूल प्रभावित होने का दावा
कभी किसी गांव के लोगों से बात कीजिए, तो समझ आएगा कि जमीन उनके लिए सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि पहचान और भविष्य होती है। सहजनवां तहसील क्षेत्र के मल्हीपुर गांव में इन दिनों यही चिंता हर घर में दिख रही है। Land Acquisition Protest के तहत गांव के किसान बड़ी संख्या में तहसील पहुंचे और प्रशासन के सामने अपना दर्द रखा। यह विरोध सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं था, बल्कि उस डर की अभिव्यक्ति था, जिसमें लोग अपने घर उजड़ने की आशंका से जी रहे हैं।
मल्हीपुर गांव के किसानों ने तहसील परिसर में एकजुट होकर प्रदर्शन किया और उपजिलाधिकारी केशरी नंदन तिवारी को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि गीडा प्रशासन द्वारा प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण अगर लागू हुआ, तो गांव के सैकड़ों परिवार बेघर हो जाएंगे। Land Acquisition Protest का मुख्य उद्देश्य यही था कि प्रशासन उनकी बात गंभीरता से सुने और अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक लगाए।
प्रदर्शन कर रहे किसानों में विजय चौधरी, संजय सिंह, सोनमति देवी, बृजेश सिंह, मृत्युंजय सिंह और अरविंद सिंह प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन किसानों का कहना है, कि गीडा की ओर से भूमि अधिग्रहण की सूचना समाचार पत्रों में प्रकाशित की गई है। इस अधिसूचना के अनुसार मल्हीपुर गांव की बड़ी आबादी इसकी चपेट में आएगी। किसानों का दावा है, कि प्रस्तावित अधिग्रहण में करीब 200 मकान और एक विद्यालय शामिल हैं। यानी यह केवल खेती की जमीन का मामला नहीं, बल्कि पूरे गांव के अस्तित्व से जुड़ा सवाल है। Land Acquisition Protest के दौरान किसानों ने इसी बिंदु को सबसे गंभीर बताया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गीडा प्रशासन पहले भी तीन बार भूमि अधिग्रहण कर चुका है। हर बार गांव की जमीन कम होती चली गई और अब स्थिति यह है, कि लोगों के पास रहने और खेती करने की जगह लगातार घट रही है। किसानों ने बताया कि इस बार अधिग्रहण के विरोध में 155 गाटा पर आपत्ति दर्ज कराई गई है, लेकिन इसके बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही। यही वजह है,कि Land Acquisition Protest के रूप में उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।
किसानों का कहना है,कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं। औद्योगिक विकास से रोजगार और सुविधाएं बढ़ती हैं, यह वे भी समझते हैं। लेकिन उनका सवाल यह है, कि क्या विकास का मतलब यह होना चाहिए कि लोग अपने घर और स्कूल छोड़ने को मजबूर हो जाएं। भूमि अधिग्रहण कानून में मुआवजा, पुनर्वास और सहमति जैसे प्रावधान हैं, लेकिन किसानों का आरोप है,कि जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा। Land Acquisition Protest के जरिए वे इन्हीं अधिकारों की याद प्रशासन को दिला रहे हैं।
प्रदर्शन में सावित्री देवी, रामचंद, रामसिंह, मीरा देवी, रेनू देवी, जीवन, रमेश, विक्रम सिंह और कमली देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। महिलाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी ने इस आंदोलन को और भावनात्मक बना दिया। कई ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इसी गांव में गुजारी है, और अब अचानक घर छोड़ने की बात उनके लिए असहनीय है। Land Acquisition Protest में यही भाव सबसे ज्यादा उभरकर सामने आया।
एसडीएम केशरी नंदन तिवारी ने किसानों से ज्ञापन प्राप्त किया और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी आपत्तियों की जांच की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई होगी। प्रशासन का कहना है, कि किसी भी निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। हालांकि किसानों का मानना है, कि अब सिर्फ आश्वासन से बात नहीं बनेगी। अगर जल्द कोई ठोस फैसला नहीं हुआ, तो Land Acquisition Protest को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है, कि देशभर में भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद बढ़ते जा रहे हैं। औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन स्थानीय लोगों की सहमति और पुनर्वास के बिना कोई भी परियोजना लंबे समय तक सफल नहीं हो सकती। मल्हीपुर गांव का मामला भी इसी सच्चाई की याद दिलाता है। यहां के किसान चाहते हैं, कि विकास हो, लेकिन उनके घर और गांव की कीमत पर नहीं।
कुल मिलाकर, Land Acquisition Protest ने यह साफ कर दिया है, कि मल्हीपुर गांव के लोग अपने हक के लिए एकजुट हैं। अब आगे की राह प्रशासन के फैसले पर निर्भर करती है। अगर संवाद और समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो यह विरोध आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।
Disclaimer यह लेख स्थानीय प्रशासनिक सूचनाओं और प्रदर्शनकारियों के बयानों पर आधारित है। इसका उद्देश्य जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाना है। किसी संस्था या व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाना इसका उद्देश्य नहीं है।
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