DDU Honorarium Increase डीडीयू में विषय विशेषज्ञों का मानदेय 40 हजार तक, संविदा शिक्षकों को बड़ी राहत

Written by: Tanu K

Published on:

Google News
Follow Us

DDU Honorarium Increase डीडीयू में ऐतिहासिक फैसला: विषय विशेषज्ञों का मानदेय 40 हजार तक, संविदा शिक्षकों की सैलरी में बढ़ोतरी

DDU Honorarium Increase के तहत दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में विषय विशेषज्ञों का मानदेय 40 हजार रुपये तक बढ़ाया गया है। स्ववित्तपोषित संविदा शिक्षकों को 3 से 6 प्रतिशत वेतन वृद्धि और नए पदों के सृजन को भी मंजूरी मिली।

DDU Honorarium Increase किसी भी विश्वविद्यालय की असली ताकत उसके शिक्षक होते हैं। अगर शिक्षक संतुष्ट हों, सुरक्षित महसूस करें और सम्मान पाएं, तो उसका असर सीधे छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ता है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से आई ताजा खबर इसी दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

DDU Honorarium Increase डीडीयू में विषय विशेषज्ञों का मानदेय 40 हजार तक, संविदा शिक्षकों को बड़ी राहत
DDU Honorarium Increase डीडीयू में विषय विशेषज्ञों का मानदेय 40 हजार तक, संविदा शिक्षकों को बड़ी राहत

विश्वविद्यालय की वित्त समिति ने ऐसे फैसले लिए हैं, जिनका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था। DDU Honorarium Increase के तहत कृषि इंजीनियरिंग, फार्मेसी और होटल मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण विषयों के विशेषज्ञों का मानदेय अब बढ़ाकर अधिकतम 40 हजार रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत संविदा शिक्षकों को तीन से छह प्रतिशत तक की वेतन वृद्धि भी स्वीकृत की गई है।

यह निर्णय कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में आयोजित वित्त समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में साफ संदेश दिया गया कि विश्वविद्यालय केवल इमारतों और पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षकों के हित और शैक्षणिक गुणवत्ता को प्राथमिकता देता है। DDU Honorarium Increase को शिक्षा जगत में एक सकारात्मक और दूरगामी कदम के रूप में देखा जा रहा है।

संविदा शिक्षकों के लिए यह फैसला विशेष राहत लेकर आया है। वित्त समिति ने असिस्टेंट प्रोफेसर (संविदा) के वेतन में तीन प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दी है, जो 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। वहीं, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि तीन वर्ष से अधिक हो चुकी है, उन्हें छह प्रतिशत वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा। वर्षों से विश्वविद्यालय से जुड़े ऐसे शिक्षक, जो सीमित संसाधनों में भी शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा रहे थे, अब खुद को अधिक सुरक्षित और सम्मानित महसूस करेंगे। DDU Honorarium Increase के साथ यह वेतन वृद्धि शिक्षकों के मनोबल को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।

विषय विशेषज्ञों के मानदेय में बढ़ोतरी भी उतनी ही अहम है। अब तक इन विशेषज्ञों को प्रति व्याख्यान 600 रुपये दिए जाते थे, जिसकी अधिकतम सीमा 31 हजार रुपये प्रति माह थी। नई व्यवस्था के तहत यह राशि 750 रुपये प्रति व्याख्यान या अधिकतम 40 हजार रुपये प्रति माह कर दी गई है। कृषि, इंजीनियरिंग, फार्मेसी और होटल मैनेजमेंट जैसे व्यावहारिक और तकनीकी विषयों में विशेषज्ञों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। DDU Honorarium Increase से विश्वविद्यालय को अनुभवी और उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों को जोड़ने में आसानी होगी, जिससे छात्रों को बेहतर व्यावहारिक ज्ञान मिल सकेगा।

वित्त समिति की बैठक में केवल वेतन और मानदेय तक ही फैसले सीमित नहीं रहे। विश्वविद्यालय में शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए सहायक आचार्य (संविदा) के 28 नए पद और सहयुक्त आचार्य (संविदा) के चार नए पद सृजित करने को भी मंजूरी दी गई। इसके बाद सहायक आचार्य (संविदा) की कुल संख्या 175 और सहयुक्त आचार्य (संविदा) की संख्या 21 हो जाएगी। इसके अलावा आचार्य या पब्लिक निदेशक के तीन पद भी स्वीकृत किए गए हैं। यह कदम शैक्षणिक कार्यभार को संतुलित करने और पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करेगा।

तकनीकी और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए जूनियर इंजीनियर (सिविल और इलेक्ट्रिकल) के चार पदों और एक प्लेसमेंट ऑफिसर के पद को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरने का निर्णय लिया गया है। इससे विश्वविद्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर, रखरखाव और छात्रों के प्लेसमेंट सपोर्ट सिस्टम को मजबूती मिलेगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि DDU Honorarium Increase जैसे फैसलों के साथ जब प्रशासनिक व्यवस्था भी मजबूत होती है, तो उसका सीधा लाभ छात्रों को मिलता है।

बैठक में शैक्षणिक शुल्क से जुड़े अहम निर्णय भी लिए गए। एमफार्म और एमटेक पाठ्यक्रमों की शुल्क संरचना तय की गई। इसके साथ ही स्ववित्तपोषित पीएचडी के प्रैक्टिकल और नॉन-प्रैक्टिकल विषयों की फीस को लेकर भी स्पष्ट नीति बनाई गई। इससे छात्रों और शोधार्थियों को पहले से अधिक पारदर्शिता और स्पष्टता मिलेगी। विकास समिति की बैठक में पहले ही करीब नौ करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी थी, जिन्हें अब वित्त समिति का अनुमोदन मिल गया है।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि इन फैसलों से विश्वविद्यालय का शैक्षणिक ढांचा मजबूत होगा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उनका मानना है कि DDU Honorarium Increase और संविदा शिक्षकों की वेतन वृद्धि जैसे निर्णय विश्वविद्यालय की उस सोच को दर्शाते हैं, जिसमें शिक्षक और छात्र दोनों केंद्र में हैं। आने वाले समय में इसका असर न सिर्फ डीडीयू की शैक्षणिक साख पर पड़ेगा, बल्कि पूर्वांचल के उच्च शिक्षा परिदृश्य को भी मजबूती मिलेगी।

Disclaimer: यह लेख आधिकारिक बैठकों, विश्वविद्यालय प्रशासन की जानकारी और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। नियम, तिथियां और वित्तीय प्रावधान समय के साथ बदल सकते हैं। पाठक किसी भी निर्णय पर भरोसा करने से पहले विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना अवश्य जांच लें।

इसे भी पढ़ें DDU Seat Allotment 2025: गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने 39 कोर्सेज की सीट अलॉटमेंट लिस्ट की घोषणा – जानें पूरी डिटेल्स

Tanu K

Tarannum, born on July 12, 1993, in the vibrant city of Gorakhpur, Uttar Pradesh, is a passionate content writer with a knack for storytelling. After earning her Bachelor’s in English from DDU, Gorakhpur, she dove into the world of words, driven by her love for crafting meaningful narratives. With seven years of experience, Tarannum has penned captivating content for niches like wellness, education, and e-commerce. Her writing is fresh, relatable, and SEO-savvy, connecting effortlessly with readers. From freelancing for local startups to strategizing content for a leading digital agency, she’s honed her skills in blogs, ad copy, and social media. In her downtime, Tarannum enjoys reading fiction and mentoring young writers, dreaming of stories that spark change.

For Feedback - newsdilsebharat@gmail.com