Azamgarh Stray Dog Order आजमगढ़ में जारी हुआ बड़ा सरकारी आदेश, स्कूलों को आवारा कुत्ता मुक्त रखने की जिम्मेदारी अब नोडल अध्यापक की
Azamgarh Stray Dog Order के तहत स्कूलों को आवारा कुत्ता मुक्त रखने का निर्देश। कुत्ते के काटने पर रैबीज टीका लगवाने तक की जिम्मेदारी तय।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में आजमगढ़ जिले में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। Azamgarh Stray Dog Order के तहत जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और खेल परिसरों को आवारा कुत्तों से सुरक्षित रखने का आदेश जारी किया गया है। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
इस आदेश के अनुसार अब प्रत्येक स्कूल में एक नोडल अध्यापक की नियुक्ति अनिवार्य होगी। यह नोडल अध्यापक स्कूल परिसर को पूरी तरह से आवारा कुत्तों से मुक्त रखने के लिए जिम्मेदार होगा। यदि स्कूल परिसर या उसके आसपास किसी छात्र को कुत्ता काट लेता है, तो संबंधित छात्र को तुरंत अस्पताल ले जाकर रैबीज का टीका लगवाने की जिम्मेदारी भी नोडल अध्यापक की होगी। Azamgarh Stray Dog Order में इस प्रावधान को विशेष रूप से शामिल किया गया है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
दरअसल, हाल के महीनों में आवारा कुत्तों के हमलों की बढ़ती घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई थी। न्यायालय ने राज्यों को निर्देश दिए थे कि स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों को सुरक्षित बनाया जाए। इन्हीं निर्देशों के तहत उत्तर प्रदेश शासन ने Azamgarh Stray Dog Order को प्रभावी रूप से लागू करने का फैसला लिया है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके।
सरकारी आदेश के तहत नगर निकाय और विकास प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी दी गई है,कि वे उन स्कूलों और संस्थानों की पहचान करें, जिनके परिसर फिलहाल असुरक्षित हैं। ऐसे सभी परिसरों की एक विस्तृत सूची तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, ताकि किसी भी स्कूल में आवारा कुत्तों का खतरा बना न रहे। यह प्रक्रिया Azamgarh Stray Dog Order को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
इस संबंध में शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। आदेश में कहा गया है,कि प्रत्येक स्कूल में तैनात शिक्षकों में से किसी एक को नोडल अध्यापक नियुक्त किया जाए और नगर निकाय के साथ समन्वय बनाकर असुरक्षित स्कूल परिसरों की सूची शासन को भेजी जाए। इससे प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा, जो Azamgarh Stray Dog Order की सफलता के लिए आवश्यक है।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस आदेश को लेकर सक्रियता दिखाई दे रही है। एसडीएम न्यायिक एवं प्रभारी ईओ नगर पालिका प्रियंका सिंह ने बताया कि शासनादेश के अनुपालन में बेसिक शिक्षा अधिकारी से समन्वय किया जा रहा है और असुरक्षित स्कूल परिसरों की पहचान के बाद उनकी सूची शासन को भेजी जाएगी। वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार पाठक ने कहा कि शिक्षा निदेशक (बेसिक) का आदेश प्राप्त हो चुका है और जल्द ही सभी स्कूलों में नोडल अध्यापक की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि Azamgarh Stray Dog Order का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा।
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इस आदेश से छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर अभिभावक चिंतित रहते थे। अब Azamgarh Stray Dog Order लागू होने के बाद स्कूलों का वातावरण अधिक सुरक्षित और अनुशासित होगा, जिससे बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, यह सरकारी आदेश केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सुधार है। यदि इसका सही और सख्ती से पालन किया गया, तो आने वाले समय में आजमगढ़ जिले के स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों में आवारा कुत्तों से जुड़ी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। Azamgarh Stray Dog Order को शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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