Panchgavya Research Scam: जबलपुर में गोबर गौमूत्र रिसर्च के नाम पर ₹3.50 करोड़ का खेल, 10 साल बाद भी कोई नतीजा नहीं
Panchgavya Research Scam में जबलपुर में 10 साल की रिसर्च के बावजूद कोई इलाज नहीं मिला। गोबर-गौमूत्र रिसर्च के नाम पर ₹3.50 करोड़ खर्च, जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी गई।
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां गाय के गोबर, गौमूत्र और दूध से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज पर रिसर्च के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन दस साल बीतने के बावजूद कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। यह मामला अब Panchgavya Research Scam के रूप में प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
2011 में शुरू हुई पंचगव्य योजना, 8 करोड़ की मांग
दरअसल, वर्ष 2011 में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान पंचगव्य योजना के तहत एक विश्वविद्यालय ने दावा किया कि गाय के गोबर, गौमूत्र और दूध के जरिए कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का इलाज खोजा जा सकता है। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने सरकार से करीब 8 करोड़ रुपये की मांग की थी। हालांकि सरकार ने आंशिक स्वीकृति देते हुए ₹3.50 करोड़ की राशि मंजूर की। यही परियोजना आगे चलकर Panchgavya Research Scam की जड़ बन गई।
10 साल की रिसर्च, लेकिन न इलाज मिला न वैज्ञानिक सफलता
करीब एक दशक तक चली इस रिसर्च के बावजूद न तो कैंसर जैसी बीमारी का कोई इलाज सामने आया और न ही कोई मान्य वैज्ञानिक निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया। इसके बावजूद सरकारी धन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता रहा। हाल ही में इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर एक गंभीर शिकायत जबलपुर कलेक्टर को मिली, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए। जांच रिपोर्ट ने Panchgavya Research Scam की परतें खोल दीं।
1.92 करोड़ की खरीदी, बाजार कीमत सिर्फ 15–20 लाख
जांच में सामने आया कि वर्ष 2011 से 2018 के बीच गोबर, गौमूत्र, गमले, कच्चे पदार्थ और कुछ मशीनों की खरीद के नाम पर करीब ₹1.92 करोड़ खर्च दिखाया गया, जबकि इन सभी सामग्रियों की वास्तविक बाजार कीमत मात्र ₹15 से ₹20 लाख के आसपास थी। यह अंतर सीधे तौर पर Panchgavya Research Scam की ओर इशारा करता है।
रिसर्च के नाम पर हवाई यात्राएं और कार खरीदी
जांच रिपोर्ट के अनुसार, रिसर्च के नाम पर गोवा, बेंगलुरु समेत कई शहरों की कुल 24 हवाई यात्राएं की गईं। इसके अलावा लगभग ₹7.5 लाख की एक कार खरीदी गई। साढ़े सात लाख रुपये पेट्रोल, डीजल और मेंटनेंस पर खर्च दिखाए गए। इन खर्चों का रिसर्च से कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया, जिससे Panchgavya Research Scam और गहराता नजर आया।
टेबल, इलेक्ट्रॉनिक आइटम और लेबर पेमेंट में भी गड़बड़ी
जांच में यह भी सामने आया कि करीब ₹15 लाख के टेबल, कुर्सियां और इलेक्ट्रॉनिक आइटम खरीदे गए, जबकि प्रोजेक्ट में इसका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इसके अलावा ₹3.50 लाख का लेबर पेमेंट भी दिखाया गया। कई मामलों में जरूरी दस्तावेज या तो नष्ट कर दिए गए या जानबूझकर जांच एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराए गए। यह सब Panchgavya Research Scam को गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में लाता है।
कलेक्टर को सौंपी गई जांच रिपोर्ट, आगे की कार्रवाई तय
पूरी जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट जबलपुर कलेक्टर को सौंप दी गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थानों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है, कि आने वाले दिनों में Panchgavya Research Scam में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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