UP IAS Asset Disclosure यूपी के 443 IAS अफसरों ने नहीं दी संपत्तियों की जानकारी, योगी सरकार सख्त, नियुक्ति विभाग ने जारी किया गोपनीय अलर्ट
UP IAS Asset Disclosure उत्तर प्रदेश में 443 IAS अफसरों ने SPARROW पोर्टल पर संपत्तियों का विवरण नहीं दिया। योगी सरकार ने लापरवाही को गंभीर मानते हुए सख्त निर्देश और आंतरिक अलर्ट जारी किया है।
उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर एक अहम और गंभीर मामला सामने आया है। यूपी कैडर के कुल 683 आईएएस अधिकारियों में से 443 अफसरों ने अब तक अपनी चल अचल संपत्तियों का विवरण सरकार को उपलब्ध नहीं कराया है। इस लापरवाही को योगी सरकार ने गंभीरता से लिया है,और नियुक्ति विभाग की ओर से इस संबंध में गोपनीय रूप से आंतरिक अलर्ट जारी किया गया है। यह पूरा मामला सीधे तौर पर UP IAS Asset Disclosure से जुड़ा हुआ है, जिसे सरकार पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की बुनियाद मानती है।
नियमों के अनुसार, प्रत्येक आईएएस अधिकारी को हर वर्ष अर्जित की गई अपनी चल और अचल संपत्तियों का विवरण अनिवार्य रूप से SPARROW (Smart Performance Appraisal Report Recording Online Window) पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करना होता है। वर्ष 2025 में अर्जित संपत्तियों की जानकारी सभी अधिकारियों को 31 जनवरी तक पोर्टल पर अपलोड करनी है, लेकिन नियुक्ति विभाग की समीक्षा में सामने आया है, कि बड़ी संख्या में अधिकारी इस अनिवार्यता को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। यही वजह है,कि UP IAS Asset Disclosure को लेकर सरकार का रुख अब और सख्त हो गया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यूपी कैडर के 683 आईएएस अधिकारियों में से सिर्फ 240 अधिकारियों ने ही समय पर संपत्तियों का पूरा विवरण स्पैरो पोर्टल पर दर्ज किया है, जबकि 443 अधिकारियों ने अब तक कोई जानकारी सबमिट नहीं की है। यह संख्या प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चिंता का विषय मानी जा रही है, क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी को महज तकनीकी चूक नहीं माना जा सकता। सरकार का मानना है कि UP IAS Asset Disclosure में की जा रही यह हिलाहवाली पारदर्शिता की मूल भावना के खिलाफ है।
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सूत्रों के अनुसार जिन 443 अधिकारियों ने जानकारी नहीं दी है, उनमें से 12 ऐसे आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं,जिन्होंने संपत्तियों का विवरण पोर्टल पर ड्राफ्ट के रूप में भर तो दिया है, लेकिन उसे अब तक अंतिम रूप से सबमिट नहीं किया है। नियुक्ति विभाग ने साफ किया है,कि ड्राफ्ट में जानकारी भरना नियमों के पालन की श्रेणी में नहीं आता। जब तक विवरण को अंतिम रूप से सबमिट नहीं किया जाता, तब तक UP IAS Asset Disclosure अधूरा ही माना जाएगा।
इस पूरी स्थिति को देखते हुए नियुक्ति विभाग ने गोपनीय आंतरिक अलर्ट जारी करते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी संपत्तियों का पूरा विवरण स्पैरो पोर्टल पर अपलोड करें। विभाग ने यह भी संकेत दिया है, कि तय समय के बाद भी यदि जानकारी नहीं दी जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई उनकी वार्षिक गोपनीय आख्या, सेवा रिकॉर्ड और भविष्य की पदोन्नति पर भी असर डाल सकती है।
योगी सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है, कि प्रशासन में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। ऐसे में UP IAS Asset Disclosure को लेकर बरती जा रही लापरवाही को सरकार ने गंभीर अनुशासनहीनता के रूप में देखा है। यही कारण है, कि इस बार केवल मौखिक निर्देश नहीं, बल्कि औपचारिक और लिखित चेतावनी के साथ आंतरिक अलर्ट जारी किया गया है।
इस अलर्ट के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कई आईएएस अधिकारी तेजी से अपने दस्तावेज जुटाकर स्पैरो पोर्टल अपडेट करने में लगे हुए हैं। जानकारों का मानना है, कि यह सख्ती केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि सरकार आने वाले समय में UP IAS Asset Disclosure को लेकर और कठोर कदम भी उठा सकती है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
इसी बीच राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर एक और अहम फैसला लिया है। दो पीसीएस अधिकारियों अविनाश गौतम (एसडीएम कन्नौज) और अभिषेक वर्मा (एसडीएम रायबरेली) को राज्य निर्वाचन आयोग में तैनात किया गया है। यह तैनाती पंचायत चुनाव की व्यवस्थाओं को सुचारु और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से की गई है, ताकि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो सके।
कुल मिलाकर, यह पूरा घटनाक्रम साफ संकेत देता है, कि उत्तर प्रदेश सरकार अब सिर्फ नीतियों की बात नहीं कर रही, बल्कि उनके सख्त क्रियान्वयन की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। UP IAS Asset Disclosure अब केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता का अहम पैमाना बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने अधिकारी समय सीमा के भीतर जानकारी देते हैं,और किन अधिकारियों पर सरकार कार्रवाई करती है।
डिस्क्लेमर
यह समाचार रिपोर्ट सरकारी सूत्रों, विभागीय जानकारी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। लेख का उद्देश्य किसी अधिकारी, विभाग या संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं है। रिपोर्ट में उल्लिखित आंकड़े और विवरण प्रारंभिक एवं सूचना आधारित हैं, जिनमें आधिकारिक अद्यतन या स्पष्टीकरण आने पर परिवर्तन संभव है। संपत्तियों के विवरण से संबंधित प्रक्रिया कानून और सेवा नियमों के अंतर्गत आती है, जिनका अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाता है। पाठकों से अनुरोध है, कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पूर्व आधिकारिक सूचना और प्रामाणिक स्रोतों की पुष्टि अवश्य करें।