Prashant Kumar Singh Allegations GST योगीभक्त अफसर’ के घड़ियाली आंसू? GST अधिकारी प्रशांत कुमार सिंह पर फर्जी विकलांगता सर्टिफिकेट से नौकरी पाने के गंभीर आरोप कोर्ट के आदेश पर जांच के घेरे में अफसर
Prashant Kumar Singh Allegations GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह पर फर्जी विकलांगता प्रमाणपत्र से नौकरी पाने के आरोप, कोर्ट के आदेश पर CMO जांच, इस्तीफे पर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश की नौकरशाही इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। अयोध्या में तैनात GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का नाम ऐसे आरोपों से जुड़ गया है, जिसने प्रशासनिक ईमानदारी और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में दिया गया उनका इस्तीफा अब Prashant Kumar Singh Allegations की वजह से नई बहस का कारण बन गया है।
ट्यूशन से सरकारी सेवा तक सवालों में घिरा सफर
आरोप लगाने वालों का दावा है,कि मऊ जिले से आने वाले प्रशांत कुमार सिंह कभी ट्यूशन पढ़ाकर जीवन यापन करते थे और राजनीति में सक्रिय होकर विधायक बनने का सपना देखते थे। यह भी कहा जा रहा है, कि वे समाजवादी पार्टी से जुड़े एक प्रभावशाली नेता के करीबी रहे।
हालांकि ये सभी बातें दावे और आरोप के दायरे में आती हैं, लेकिन इन्हीं बिंदुओं के चलते Prashant Kumar Singh Allegations लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।
फर्जी विकलांगता प्रमाणपत्र का गंभीर आरोप
इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू वह आरोप है, जिसमें कहा गया है, कि प्रशांत कुमार सिंह ने कथित तौर पर आंख से विकलांग होने का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाया और उसी आधार पर विकलांग कोटे से GST विभाग में नौकरी हासिल की।
यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन होगा बल्कि वास्तविक दिव्यांग अभ्यर्थियों के अधिकारों पर भी सवाल खड़ा करेगा। यही कारण है,कि Prashant Kumar Singh Allegations को गंभीर माना जा रहा है।
चचेरे भाई की शिकायत और दबे रहने का दावा
आरोपों के मुताबिक, प्रशांत कुमार सिंह के चचेरे भाई विश्वजीत ने करीब पांच साल पहले इस मामले की शिकायत की थी। शिकायत में फर्जी सर्टिफिकेट और नौकरी हासिल करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।
दावा किया जा रहा है, कि उस समय प्रभाव और पहुंच के चलते जांच आगे नहीं बढ़ सकी। यही दावा Prashant Kumar Singh Allegations को राजनीतिक और प्रशासनिक रंग देता है।
कोर्ट की दखल CMO को जांच का आदेश
मामला तब निर्णायक मोड़ पर पहुंचा, जब शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। बताया जा रहा है,कि कोर्ट ने मऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को इस पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, CMO की ओर से कई बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद प्रशांत कुमार सिंह कथित तौर पर मेडिकल परीक्षण के लिए उपस्थित नहीं हुए। यह पहलू Prashant Kumar Singh Allegations को और गंभीर बनाता है।
इस्तीफा आत्मबलिदान या रणनीति
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में दिया गया इस्तीफा भी सवालों के घेरे में है। आलोचकों का कहना है, कि यह कदम नैतिकता से ज्यादा परिस्थितिजन्य दबाव से जुड़ा हो सकता है।
हालांकि, समर्थक इसे व्यक्तिगत आस्था और निष्ठा का फैसला बता रहे हैं। लेकिन जब तक जांच पूरी नहीं होती, Prashant Kumar Singh Allegations को नजरअंदाज करना आसान नहीं है।
प्रशासनिक जवाबदेही और आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है, कि यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पारदर्शिता की परीक्षा है।
यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो अधिकारी को स्पष्ट रूप से क्लीन चिट मिलनी चाहिए, और यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
निष्पक्ष जांच ही Prashant Kumar Singh Allegations पर अंतिम सत्य सामने ला सकती है।
यह लेख आरोपों, शिकायतों, न्यायिक आदेशों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। सभी आरोप कथित हैं और मामला जांचाधीन है। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का उद्देश्य नहीं है। अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय या जांच एजेंसी द्वारा किया जाएगा।