Chandauli SDM Suspension Case: सरकारी जमीन अनियमितता में तीन एसडीएम निलंबित, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

Written by: Tanu K

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Chandauli SDM Suspension Case सरकारी जमीन पर अनियमितता से मचा प्रशासनिक भूचाल तीन एसडीएम निलंबित

Chandauli SDM Suspension Case में चंदौली की सरकारी जमीन से कब्जा हटाने में अनियमितता पर तीन एसडीएम निलंबित, डीएम जांच में खुलासा, जानिए पूरा मामला और प्रशासनिक कार्रवाई की पूरी जानकारी।

सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और नियमों का पालन बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि यह सीधे जनता के अधिकारों और सरकारी संसाधनों से जुड़ा विषय होता है। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में सामने आया Chandauli SDM Suspension Case प्रशासनिक सिस्टम के लिए एक बड़ा संकेत बनकर सामने आया है।

Chandauli SDM Suspension Case: सरकारी जमीन अनियमितता में तीन एसडीएम निलंबित, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
Chandauli SDM Suspension Case: सरकारी जमीन अनियमितता में तीन एसडीएम निलंबित, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

गांव समाज और सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटाने की प्रक्रिया में कथित अनियमितता पाए जाने के बाद शासन ने तीन एसडीएम को निलंबित कर दिया है। यह मामला सिर्फ एक कार्रवाई नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, भूमि प्रबंधन और सरकारी निर्णय प्रक्रिया की गंभीरता को भी उजागर करता है।

डीएम की जांच में खुलासा कैसे सामने आया Chandauli SDM Suspension Case

पूरे मामले की शुरुआत जिलाधिकारी द्वारा किए गए नियमित निरीक्षण से हुई। डीएम चन्द्रमोहन गर्ग ने जब निस्तारित पत्रावलियों की जांच की तो कई संदिग्ध फैसले सामने आए। जांच में पाया गया कि बेशकीमती खलिहान, चकमार्ग, कब्रिस्तान और परती जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए जारी आरसी को अचानक वापस ले लिया गया था। यहीं से Chandauli SDM Suspension Case ने गंभीर रूप ले लिया।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में पहले से बेदखली के आदेश पारित थे, लेकिन बाद में नियमों के विपरीत बदलाव किए गए। प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी भूमि प्रबंधन में इस तरह की अनियमितता administrative accountability और land governance जैसे मुद्दों को सीधे प्रभावित करती है। इस Chandauli SDM Suspension Case ने दिखाया कि नियमित मॉनिटरिंग और फाइल ऑडिट कितने जरूरी होते हैं ताकि सरकारी संपत्ति सुरक्षित रह सके।

तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट कैसे मजबूत हुआ मामला

Chandauli SDM Suspension Case: सरकारी जमीन अनियमितता में तीन एसडीएम निलंबित, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
Chandauli SDM Suspension Case: सरकारी जमीन अनियमितता में तीन एसडीएम निलंबित, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

डीएम ने मामले की गंभीरता देखते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई, जिसमें एडीएम न्यायिक, एसडीएम चकिया और एसडीएम चंदौली शामिल थे। समिति ने संबंधित सभी फाइलों, आदेशों और रिकॉर्ड की समीक्षा की। जांच में पाया गया कि जब तीनों अधिकारी तहसीलदार पद पर थे, तब उन्होंने पीठासीन अधिकारी के रूप में ऐसे आदेश जारी किए जो सार्वजनिक भूमि संरक्षण के नियमों के खिलाफ थे।

रिपोर्ट में कहा गया कि पहले जारी वसूली आदेशों को बदलकर अवैध कब्जाधारियों के पक्ष में निर्णय दिए गए, जिससे सरकारी जमीन को नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर Chandauli SDM Suspension Case में कार्रवाई की सिफारिश की गई। विशेषज्ञ बताते हैं कि public land management में पारदर्शिता के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और स्पष्ट प्रशासनिक प्रक्रिया बेहद जरूरी होती है।

यह Chandauli SDM Suspension Case भविष्य में सरकारी अधिकारियों के लिए एक उदाहरण बन सकता है कि भूमि मामलों में नियमों से समझौता कितना गंभीर परिणाम ला सकता है।

शासन की सख्त कार्रवाई तीनों एसडीएम निलंबित, आगे क्या होगा

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक ने तीनों अधिकारियों  लालता प्रसाद, सतीश कुमार और विराग पांडेय  को निलंबित करने का आदेश जारी किया। वर्तमान में ये अधिकारी अलग अलग जिलों में एसडीएम पद पर तैनात थे। अब उन्हें आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद कार्यालय से संबद्ध किया गया है।

Chandauli SDM Suspension Case: सरकारी जमीन अनियमितता में तीन एसडीएम निलंबित, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
Chandauli SDM Suspension Case: सरकारी जमीन अनियमितता में तीन एसडीएम निलंबित, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि Chandauli SDM Suspension Case सरकार का सख्त संदेश है कि सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में नियमों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार ने अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान तेज किया है।

डिजिटल मैपिंग, रिकॉर्ड अपडेट और निगरानी सिस्टम को मजबूत करने की कोशिश भी इसी दिशा में कदम हैं। इसलिए Chandauli SDM Suspension Case केवल एक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं बल्कि प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

यह आर्टिकल उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। जांच प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय संबंधित विभाग और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही माना जाएगा। किसी भी अधिकारी को दोषी सिद्ध होने तक निर्दोष माना जाता है।

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Tanu K

Tarannum, born on July 12, 1993, in the vibrant city of Gorakhpur, Uttar Pradesh, is a passionate content writer with a knack for storytelling. After earning her Bachelor’s in English from DDU, Gorakhpur, she dove into the world of words, driven by her love for crafting meaningful narratives. With seven years of experience, Tarannum has penned captivating content for niches like wellness, education, and e-commerce. Her writing is fresh, relatable, and SEO-savvy, connecting effortlessly with readers. From freelancing for local startups to strategizing content for a leading digital agency, she’s honed her skills in blogs, ad copy, and social media. In her downtime, Tarannum enjoys reading fiction and mentoring young writers, dreaming of stories that spark change.

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