कठपुतली शैली में जीवंत हुई रामायण रंगश्री की Puppet Ramayana ने जीता दर्शकों का दिल
Puppet Ramayana गोरखपुर रंग महोत्सव में रंगश्री लिटिल बैले द्वारा कठपुतली शैली में रामायण का मनोहारी मंचन संगीत, भाव और लोककला का संगम।
गोरखपुर। रंग महोत्सव के तीसरे दिन ऐसा लगा मानो पुरानी लोककथाएँ फिर से जी उठीं गाँव की हाट की हलचल, माटी की खुशबू और लोकगीतों की तान ने त्रिकोण बना दिया। इस समां को सबसे अलग बनाते हुए भोपाल की रंगश्री लिटिल बैले ने कठपुतली शैली में प्रस्तुत की गई Puppet Ramayana, जिसने न सिर्फ आंखें मोहित कीं बल्कि दिलों में घर भी कर लिया। Puppet Ramayana ने दर्शकों को उस समय यात्रा पर ले जाया जहाँ कथा, संगीत और पारंपरिक कला का अद्भुत मेल दिखा।
गाँव की हाट से मंच तक Puppet Ramayana का असरदार आरम्भ
नाटिका की शुरुआत गाँव के बाजार के जीवन्त दृश्य से होती है। वहां एक कठपुतली कथा सुनाती है,और धीरे-धीरे वही दर्शक स्वयं नाटक के पात्र बन जाते हैं,यह रूपांतरण ही Puppet Ramayana की पहली खासियत है। प्रस्तुति प्रभु राम के वनगमन से शुरू होकर पंचवटी, सीताहरण, जटायु का बलिदान और अंततः रावण वध तथा राज्याभिषेक तक की भावनात्मक यात्रा दर्शाती है। Puppet Ramayana ने पारंपरिक कथानकों को एक नई संवेदना के साथ प्रस्तुत किया है।
संगीत और लोकताल Puppet Ramayana की आत्मा
Puppet Ramayana में संगीत का स्थान केंद्रीय है। दशरथलाल सिंह के गीत और बहादुर हुसैन खान व अवधि दासगुप्ता के मधुर संगीत ने कथा में जान भर दी। हर लोकधुन ने पात्रों के भावों को पुकारा क्रोध, विरह, त्याग और विजय सबकी झलक संगीत के भीतर मिलती है। Puppet Ramayana ने यह साबित किया कि संगीत सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि कहानी का एक सक्रिय किरदार हो सकता है।
कथा पुराना विषय, नया अंदाज
रामायण के प्रमुख प्रसंग मंथरा की शरारत से लेकर राम का वनवास, केवट प्रसंग, सूर्पनखा का प्रकोप, सीताहरण, और जटायु का बलिदान सब कुछ नाटकीय रूप में सजीव हुआ। Puppet Ramayana ने इन प्रसंगों को कठपुतलियों की सूक्ष्म अदाओं, सूत्रधारों के व्यंजन और लोकभवनाओं के माध्यम से इस तरह उकेरा कि हर दृश्य दर्शक के मानस में ठहर गया। दो सूत्रधार राजस्थान की कठपुतली पद्धति में कहानी को आगे बढ़ाते रहे और उनके सहज संवाद ने कथा को और मजबूत किया।
कलाकार और निर्देशन 12 कलाकारों में 52 रूप
एक और बड़ी बात यह रही कि इस नाटिका के मूल निर्देशक शांति वर्धन और गुलवर्धन के निधन के बाद भी कलाकारों ने मिलकर निर्देशन का दायित्व संभाला। पुरानी वेशभूषा और मुखौटे आज भी वैसे ही उपयोग किए जा रहे हैं, सम्मानपूर्वक संरक्षित। कुल 12 कलाकारों ने 52 भूमिकाएँ निभाईं प्रताप मोहंता (राम), उपेन्द्र मोहता (लक्ष्मण), दीप्ति मोहंत (सीता), दयानिधि मोहंता (दशरथ/हनुमान), अपूर्व दत्त मिश्रा (रावण) सहित संजय इंगले, मोनिका पांडेय, पद्मा सोनकर, सपना यादव, लक्ष्मण सावंत व अर्पित पांडेय आदि ने जबरदस्त अभिनय दिखाया। Puppet Ramayana में कठपुतलियों के संतुलन और भाव-भंगिमा ने यह एहसास दिलाया कि पक्ष ही जीवित हैं,और यही जादू का आधार था।
विधा और परंपरा का संगम
Puppet Ramayana ने लोकपरंपरा और आधुनिक रंगमंच का बेहतरीन मेल किया। पुरातन मुखौटों और परिधानों का प्रयोग, पुराने गीतों की ताज़गी, और कठपुतलियों की पारंपरिक तकनीक ये सब मिलकर देखने वालों को एक सांस्कृतिक समारोह का अनुभव देते हैं। तथ्य यह भी है,कि 1953 से मंचित यह नाटक आज भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है, और Puppet Ramayana इसकी जीती-जागती मिसाल बन गया है।
महोत्सव का आयोजन और विशिष्ट अतिथि
कार्यक्रम का शुभारम्भ डा. रोली लाट और विशिष्ट अतिथि विकास केजरीवाल तथा स्थानीय उद्योगपति नितिन मातनहेलिया, संदीप टेकरीवाल और शोभित मोहन अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। आयोजन समिति के उपाध्यक्ष माधवेंद्र पांडेय, सचिव बृजेन्द्र नारायण व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। स्वागत, संचालन और धन्यवाद के रंगमंचीय क्रम ने कार्यक्रम को एक औपचारिक व गरिमापूर्ण रूप दिया। Puppet Ramayana ने यहाँ न केवल कला प्रस्तुत की, बल्कि स्थानीय साहित्यिक और सांस्कृतिक मंच को भी सशक्त किया।
समीक्षा दर्शकों का भाव और आगामी कार्यक्रम
दर्शक दल ने Puppet Ramayana की प्रस्तुति को भावनात्मक और तकनीकी दोनों स्तरों पर सराहा। कई लोगों ने कहा कि कठपुतलियों के माध्यम से रामायण का यह रूप बच्चों और बड़ों दोनों के लिए शिक्षाप्रद और मनोरंजक था। महोत्सव के चौथे दिन लखनऊ की भारतेन्दु नाट्य अकादमी का “कर्ण गाथा” मंचन और थियेटर वर्कशॉप की गतिविधियाँ भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगी। Puppet Ramayana जैसी प्रस्तुतियाँ दिखाती हैं कि हमारी लोककलाएँ जिंदा हैं,और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाने की जिम्मेदारी सभी की है।
Focus Keyword (English): Puppet Ramayana
(नोट: लेख में ऊपर Puppet Ramayana शब्द स्वाभाविक रूप से कई बार प्रयुक्त हुआ है ताकि SEO और पठनीयता दोनों बनी रहें।)
Disclaimer
यह लेख सांस्कृतिक समीक्षा और जनसामान्य की जानकारी हेतु लिखा गया है। कार्यक्रम के समय, प्रतिभागियों के नाम या किसी आयोजन संबंधी विवरण में बदलाव संभव है, कृपया आधिकारिक आयोजकों से पुष्टि कर लें।