1500 Crore Scam करोड़ का महाघोटाला: महाठग रविंद्रनाथ सोनी की तलाकशुदा पत्नी पर भी FIR, अब ED कसेगी शिकंजा
1500 Crore Scam करोड़ के महाघोटाले में आरोपी रविंद्रनाथ सोनी के बाद उसकी पहली पत्नी स्वाति पर भी FIR। एनआरआई की शिकायत, छह करोड़ का चेक बाउंस और अब ED की एंट्री।
Kanpur News |1500 Crore Scam से जुड़े एक बड़े आर्थिक अपराध में अब जांच का दायरा और फैल गया है। देश-विदेश के 700 से अधिक निवेशकों से करीब 1500 करोड़ रुपये की ठगी के आरोपी रविंद्रनाथ सोनी के बाद अब उसकी तलाकशुदा पहली पत्नी स्वाति के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई एक एनआरआई निवेशक की शिकायत पर की गई है। पुलिस के मुताबिक, अब इस पूरे मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपने की तैयारी है।
क्या है पूरा मामला
कानपुर के कोतवाली क्षेत्र में दर्ज एक केस की जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी रविंद्रनाथ सोनी ने निवेश के नाम पर एक संगठित ठगी का नेटवर्क खड़ा किया था। इस 1500 Crore Scam में भारत के अलावा दुबई, शारजाह, मलेशिया, फ्रांस और जापान तक के निवेशक शामिल बताए जा रहे हैं।
कोतवाली पुलिस ने पहले 42.29 लाख रुपये की ठगी के एक मामले में रविंद्रनाथ सोनी को देहरादून से गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान ठगी के इस बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसके बाद विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया।
तलाकशुदा पत्नी स्वाति पर क्यों दर्ज हुई FIR
अब इस 1500 Crore Scam में आरोपी की पहली पत्नी स्वाति का नाम भी सामने आया है। एनआरआई संदीप पांडेय ने कोतवाली थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया कि स्वाति ने निवेशकों को पैसे लौटाने की गारंटी दी थी और बदले में कई चेक जारी किए थे, जो बाद में बाउंस हो गए।
पुलिस के अनुसार, इस शिकायत के आधार पर रविंद्रनाथ सोनी, सूरज जुमानी और स्वाति के खिलाफ धोखाधड़ी और चेक बाउंस से जुड़ी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
छह करोड़ रुपये का निवेश और चेक बाउंस का आरोप
एनआरआई संदीप पांडेय का कहना है,कि उन्होंने एक ब्लूचिप कंपनी में करीब 25 लाख दिरहम (लगभग 6 करोड़ 10 लाख रुपये) का निवेश किया था। साल 2022-23 के दौरान कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी और निवेशकों को मिलने वाला मासिक रिटर्न बंद हो गया।
जब निवेशकों ने कंपनी से पैसे वापस मांगे, तो स्वाति सामने आई और रकम लौटाने की गारंटी दी। इसके लिए उसने कई चेक दिए, लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए। यही नहीं, अन्य निवेशकों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया गया, जिससे 1500 Crore Scam की परतें और खुलने लगीं।
देश विदेश तक फैला ठगी का नेटवर्क
SIT की जांच में सामने आया है, कि यह 1500 Crore Scam केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था। आरोपी ने विदेशों में रह रहे भारतीयों और अन्य नागरिकों को भी हाई रिटर्न का लालच देकर निवेश कराया।
जांच एजेंसियों का मानना है, कि इस ठगी के लिए कई शेल कंपनियों और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। निवेशकों का पैसा अलग अलग खातों और संपत्तियों में खपाया गया।
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संपत्तियों की जांच दोनों पत्नियां रडार पर
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी की पहली पत्नी स्वाति के पास एनसीआर क्षेत्र में कई अचल संपत्तियां होने की संभावना है। हालांकि अभी तक दूसरी पत्नी के खिलाफ कोई लिखित शिकायत सामने नहीं आई है, लेकिन जांच एजेंसियां उसकी भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है, कि 1500 Crore Scam में जिन जिन लोगों ने आर्थिक या प्रशासनिक सहयोग किया, सभी की भूमिका की जांच की जाएगी।
SIT की रिपोर्ट लगभग तैयार, ED को सौंपी जाएगी
SIT अधिकारियों के अनुसार, इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट लगभग तैयार हो चुकी है। नई एफआईआर से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज अभी जुटाए जा रहे हैं, जिसके बाद पूरी रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय को सौंपी जाएगी।
सूत्रों की मानें तो ED की एक टीम जल्द ही कानपुर आ सकती है,और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से 1500 Crore Scam की जांच शुरू की जाएगी। इसमें संपत्तियों की कुर्की और खातों की जांच भी शामिल हो सकती है।
क्यों अहम है यह मामला
यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है,क्योंकि इसमें
अंतरराष्ट्रीय निवेशक शामिल हैं,
बड़ी रकम की मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका है,
कई प्रभावशाली लोग जांच के दायरे में आ सकते हैं,
विशेषज्ञों का कहना है,कि 1500 Crore Scam उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े आर्थिक अपराधों में से एक बन सकता है।
निष्कर्ष
रविंद्रनाथ सोनी से शुरू हुआ यह घोटाला अब उसकी पारिवारिक और कारोबारी परिधि तक फैल चुका है। तलाकशुदा पत्नी पर FIR और ED की संभावित एंट्री से यह साफ है,कि जांच एजेंसियां इस 1500 Crore Scam को अंजाम तक पहुंचाने के मूड में हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
डिस्क्लेमर यह समाचार रिपोर्ट पुलिस, जांच एजेंसियों और उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है। मामला जांचाधीन है। किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी न माना जाए जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध न हो।
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