Angel Chakma News ‘मेरा बेटा सिर्फ सब्जी लेने गया था, नस्लीय गालियों के विरोध की कीमत बना एंजेल चकमा की जान
Angel Chakma News देहरादून में MBA छात्र एंजेल चकमा की नस्लीय हमले में हत्या से देश आक्रोशित है। पिता ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। जानिए पूरा मामला।
देहरादून में 24 वर्षीय MBA छात्र एंजेल चकमा की मौत ने एक बार फिर देश के सामने नस्लीय भेदभाव की कड़वी सच्चाई रख दी है। यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना है, जिसमें आज भी पहचान और चेहरे के आधार पर इंसान को निशाना बनाया जाता है। Angel Chakma News ने पूरे देश में गुस्से और संवेदना की लहर पैदा कर दी है।
त्रिपुरा निवासी एंजेल चकमा उत्तराखंड की जिज्ञासा यूनिवर्सिटी में MBA फाइनल ईयर का छात्र था। 9 दिसंबर को वह अपने भाई के साथ सेलाकुई बाजार में सब्जी खरीदने गया था। इसी दौरान कुछ युवकों ने उसके चेहरे और बोली को लेकर नस्लीय टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। उसे “चीनी” और “मोमो” जैसे शब्द कहे गए। एंजेल ने इसका विरोध करते हुए सिर्फ इतना कहा कि वह भारतीय है,और उसे इस तरह अपमानित क्यों किया जा रहा है। यही विरोध उसकी जान पर भारी पड़ गया।
एंजेल के पिता तरुण प्रसाद चकमा ने बताया कि विरोध के बाद हमलावरों ने उस पर बेरहमी से हमला किया। चाकू से सिर और गर्दन पर कई वार किए गए। गंभीर रूप से घायल एंजेल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे ICU में भर्ती किया गया। करीब 17 दिनों तक वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करता रहा, लेकिन अंततः उसने दम तोड़ दिया। Angel Chakma News से जुड़े इस दर्दनाक सच ने हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर दिया।
Angel Chakma News पिता ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है,कि यदि समय पर पुलिस सहायता और त्वरित कार्रवाई होती, तो शायद उनका बेटा बच सकता था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह केवल उनके परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है। उनका दर्द आज हजारों माता पिताओं की आवाज बन चुका है, जो अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में भेजते हैं।
पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद पहले मारपीट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। एंजेल की मौत के बाद इसमें हत्या की धारा जोड़ी गई। अब तक पांच आरोपियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें दो नाबालिग हैं। एक आरोपी अभी फरार है, जिसके नेपाल भागने की आशंका जताई जा रही है। उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम बनाई गई है और इनाम भी घोषित किया गया है। Angel Chakma News में यह पहलू भी लगातार चर्चा में है।
Angel Chakma News इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी हस्तक्षेप किया। आयोग ने उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए राज्य के डीजीपी को पत्र लिखा। आयोग के दखल के बाद ही मामले में सख्त धाराएं जोड़ी गईं। इससे यह साफ हुआ कि प्रशासनिक स्तर पर शुरुआती लापरवाही ने मामले को और गंभीर बना दिया।
एंजेल चकमा की मौत के बाद देशभर में खासकर पूर्वोत्तर के छात्रों और संगठनों में आक्रोश है। दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु सहित कई शहरों में कैंडल मार्च और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए गए। सोशल मीडिया पर भी #JusticeForAngelChakma ट्रेंड करने लगा। Angel Chakma News अब केवल एक खबर नहीं, बल्कि न्याय की राष्ट्रीय मांग बन चुकी है।
Angel Chakma News यह घटना भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में गहरी चिंता पैदा करती है। जहां संविधान समानता और सम्मान की गारंटी देता है, वहीं ऐसी घटनाएं सामाजिक सोच पर सवाल खड़े करती हैं। एंजेल चकमा की हत्या हमें यह सोचने पर मजबूर करती है, कि क्या हम सच में एक समावेशी और सुरक्षित समाज बना पाए हैं।
आज एंजेल चकमा इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी कहानी एक जिम्मेदारी छोड़ गई है। यह जिम्मेदारी सिर्फ कानून की नहीं, बल्कि समाज की भी है। जब तक नस्लीय सोच के खिलाफ सख्त कार्रवाई और संवेदनशीलता नहीं दिखाई जाएगी, तब तक Angel Chakma News जैसी घटनाएं बार-बार हमारे सामने आती रहेंगी। अब देश की निगाहें न्याय पर टिकी हैं,ताकि किसी और को सिर्फ अपनी पहचान की वजह से जान न गंवानी पड़े।
डिस्क्लेमर यह समाचार रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं, पीड़ित परिवार के बयानों और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित है। लेख में व्यक्त सभी तथ्य और विवरण खबर लिखे जाने के समय तक प्राप्त जानकारी के अनुसार हैं। किसी भी व्यक्ति, संस्था या समूह को दोषी ठहराने का उद्देश्य नहीं है। मामले से संबंधित सभी आरोपी कानूनन निर्दोष माने जाएंगे जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध न हो जाए। यह लेख सूचना देने के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है, न कि किसी प्रकार की अफवाह, नफरत या पूर्वाग्रह को बढ़ावा देने के लिए। पाठकों से अनुरोध है कि वे किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करें।
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