Bareilly Fraud Case बरेली में ठगी का सबसे बड़ा खुलासा: कन्हैया गुलाटी पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई, 800 करोड़ की ठगी में पुलिस का शिकंजा
Bareilly Fraud Case बरेली में कैनविज ग्रुप के मालिक कन्हैया गुलाटी पर गैंगस्टर एक्ट, 40 से ज्यादा मुकदमे, 800 करोड़ की ठगी में पुलिस का बड़ा एक्शन।
बरेली। उत्तर प्रदेश में आर्थिक अपराधों के खिलाफ चल रही सख्त मुहिम के तहत बरेली में ठगी के सबसे बड़े मामलों में से एक पर निर्णायक कार्रवाई शुरू हो गई है। कैनविज ग्रुप के मालिक और सैकड़ों निवेशकों से अरबों रुपये ठगकर फरार हुए कन्हैया लाल गुलाटी पर अब पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत शिकंजा कस दिया है। बरेली रेंज के डीआईजी अजय कुमार साहनी ने गुलाटी के खिलाफ गैंग पंजीकरण, हिस्ट्रीशीट खोलने और संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। यह मामला अब पूरे प्रदेश में Bareilly Fraud Case के नाम से चर्चा में है।
Bareilly Fraud Case
देशभर में फैला ठगी का नेटवर्क, 40 से ज्यादा मुकदमे
पुलिस जांच में सामने आया है, कि कन्हैया गुलाटी और उसके गिरोह के खिलाफ देश के अलग अलग राज्यों में 40 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। अकेले बरेली जिले में गुलाटी पर 34 मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा शाहजहांपुर में दो, अयोध्या, कासगंज, बिहार के बेरोह और झारखंड के रांची में भी मामले दर्ज पाए गए हैं। इतने बड़े पैमाने पर दर्ज मुकदमे इस Bareilly Fraud Case को अंतरराज्यीय ठगी का संगठित अपराध साबित करते हैं।
800 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी का आरोप
डीआईजी अजय कुमार साहनी के अनुसार, प्राथमिक जांच और शिकायतों के आधार पर यह सामने आया है, कि कन्हैया गुलाटी करीब 800 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। कैनविज ग्रुप के नाम पर उसने निवेशकों को कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच दिया और भरोसा जीतने के बाद पैसा समेटकर फरार हो गया। यही वजह है, कि Bareilly Fraud Case को अब गैंगस्टर एक्ट के दायरे में लाया गया है।
गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति जब्ती की तैयारी
पुलिस ने बताया कि गैंगस्टर अधिनियम की धारा 14(1) के तहत कन्हैया गुलाटी और उसके गिरोह की चल-अचल संपत्तियों की पहचान और जब्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही गुलाटी की हिस्ट्रीशीट खोली जा रही है, ताकि उसके आपराधिक रिकॉर्ड को स्थायी रूप से दर्ज किया जा सके। इस कार्रवाई से Bareilly Fraud Case में आर्थिक चोट सबसे बड़ी मानी जा रही है।
गुर्गों की भी जांच, संपत्ति होगी जब्त
जांच में इज्जतनगर के उदित पार्ट-2 निवासी मोहम्मद यासीन और डीडीपुरम निवासी आशीष महाजन को गुलाटी के प्रमुख सहयोगियों के रूप में चिन्हित किया गया है। इन दोनों के खिलाफ भी कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस का कहना है, कि Bareilly Fraud Case में गुलाटी के साथ-साथ उसके नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों पर समान कार्रवाई होगी और भविष्य में उनकी संपत्ति भी गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त की जाएगी।
भाजपा जिला कोषाध्यक्ष से भी 13 लाख की ठगी
ठगी का यह जाल केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहा। कैनविज ग्रुप के जरिए भाजपा जिला कोषाध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता से भी 13 लाख रुपये की ठगी की गई। इस मामले में किला थाने में कन्हैया गुलाटी, उसकी पत्नी राधिका गुलाटी, बेटे गोपाल गुलाटी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह घटना Bareilly Fraud Case की गंभीरता और पहुंच को साफ तौर पर दिखाती है।
भरोसा जीतकर ठगी, फिर फरारी
पीड़ितों के मुताबिक गुलाटी के एजेंट पहले छोटी रकम निवेश कराकर कुछ ब्याज लौटाते थे, ताकि निवेशकों का भरोसा जीता जा सके। इसके बाद लाखों रुपये निवेश कराए गए। जब गुलाटी फरार हुआ तो उसके गुर्गे लगातार बहाने बनाते रहे। अंततः पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। यही तरीका Bareilly Fraud Case को क्लासिक चिटफंड घोटाले की मिसाल बनाता है।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत कड़ी पैरवी
डीआईजी ने बताया कि जिन मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, उनमें ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी और तेज पैरवी की जा रही है। पुलिस का लक्ष्य है,कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए और पीड़ितों को न्याय मिले। Bareilly Fraud Case में पुलिस किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
कड़ा संदेश: ठगी करने वालों के लिए यूपी में कोई जगह नहीं
पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है, कि जनता की गाढ़ी कमाई से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। कन्हैया गुलाटी का मामला आने वाले समय में ठगों के लिए चेतावनी बनेगा कि कानून से बचना नामुमकिन है। Bareilly Fraud Case में आगे और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
डिस्क्लेमर यह समाचार पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी, दर्ज एफआईआर और उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है। लेख का उद्देश्य केवल सूचना देना है। सभी आरोपी तब तक निर्दोष माने जाएंगे जब तक न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध न हो जाए। जांच प्रक्रिया जारी है, आगे प्राप्त होने वाली जानकारी के आधार पर तथ्यों में बदलाव संभव है।