Cyber Fraud in Gorakhpur: रिटायर्ड शिक्षक से 14 लाख की ठगी, पुलिस ने वापस दिलाए 13.87 लाख
प्रस्तावना गोरखपुर में बढ़ते साइबर अपराध
Cyber Fraud in Gorakhpur: गोरखपुर में साइबर अपराधियों ने एक और बड़ी ठगी को अंजाम दिया। इस बार शिकार बने एक सेवानिवृत्त शिक्षक, जिनसे जालसाजों ने NIA अधिकारी बनकर 14 लाख रुपये ठग लिए।
यह घटना आज (27 अगस्त 2025) के प्रमुख अखबारों जागरण और लाइव हिंदुस्तान में प्रमुखता से प्रकाशित हुई।
घटना की पूरी कहानी
ठगी कब और कैसे हुई?
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यह साइबर फ्रॉड जुलाई 2025 के अंतिम हफ्ते (लगभग 27 जुलाई) को हुआ।
जालसाजों ने शिक्षक को फोन कर कहा कि उनका नाम आतंकवादियों के साथ जुड़ा हुआ है।
कॉलर ने खुद को NIA का अधिकारी बताते हुए धमकी दी कि अगर तुरंत पैसे नहीं दिए गए तो उन्हें डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) कर लिया जाएगा।
घबराकर शिक्षक ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹14 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
पीड़ित कौन हैं Cyber Fraud in Gorakhpur:
पीड़ित गोरखपुर शहर के निवासी और सेवानिवृत्त शिक्षक हैं।
पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उनका नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
बताया जा रहा है कि वे एक जिम्मेदार और पढ़े-लिखे नागरिक हैं, लेकिन ठगों के डराने-धमकाने के तरीके ने उन्हें जाल में फंसा दिया।
ठगी का तरीका – Digital Arrest Scam
H3: डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?
साइबर अपराधी खुद को पुलिस, NIA या CBI का अधिकारी बताकर कॉल करते हैं।
फिर पीड़ित से कहते हैं, कि उसका नाम किसी गंभीर अपराध या आतंकवाद से जुड़ा है।
अगर तुरंत जुर्माना या “सिक्योरिटी डिपॉज़िट” नहीं दिया गया तो उन्हें वीडियो कॉल के जरिए हिरासत में ले लिया जाएगा।
इसे ही डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है
इस केस में ठगों ने क्या किया?
शिक्षक को कहा गया कि अगर तुरंत कार्रवाई नहीं की तो उन्हें जेल भेजा जाएगा।
इस मानसिक दबाव में आकर उन्होंने बिना सोचे-समझे 14 लाख रुपये ठगों के खातों में डाल दिए।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई Cyber Fraud in Gorakhpur:
शिकायत दर्ज करना
पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर तुरंत गोरखपुर साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई।
रकम की रिकवरी
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जालसाजों के बैंक खातों को फ्रीज़ कराया।
नतीजतन, ठगों द्वारा ट्रांसफर की गई रकम में से ₹13.87 लाख रुपये वापस दिला दिए गए
अधिकारियों का बयान
एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि साइबर टीम लगातार इस तरह के मामलों पर निगरानी कर रही है।
उन्होंने कहा कि गोरखपुर में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति ऐसी ठगी का शिकार न बने।
खबर में मीडिया कवरेज
जागरण की रिपोर्ट
जागरण ने आज (27 अगस्त 2025) सुबह प्रकाशित किया –
“Cyber Crime: खुद को NIA अधिकारी बताकर लगा दिया 14 लाख का चूना, साइबर पुलिस ने लौटाए 13.87 लाख”।
लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट
लाइव हिंदुस्तान ने इसी खबर को शीर्षक दिया –“डिजिटल अरेस्ट कर रिटायर्ड शिक्षक से वसूले गए रुपये वापस कराए”।
दोनों अखबारों ने पुलिस की सक्रियता की सराहना की और पीड़ित को न्याय दिलाने के प्रयासों को रेखांकित किया।
साइबर ठगी से बचाव के उपाय
क्या करें
हमेशा अज्ञात नंबर से आए कॉल को वेरिफाई करें।
किसी भी सरकारी अधिकारी या संस्था का कॉल आने पर उनकी पहचान की पुष्टि करें।
तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
क्या न करें
डर और दबाव में आकर कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें।
बैंक डिटेल्स, OTP या पर्सनल जानकारी साझा न करें।
“डिजिटल अरेस्ट” जैसी धमकियों से न घबराएँ।
निष्कर्ष
गोरखपुर में हुआ यह मामला दिखाता है, कि साइबर अपराधी किस तरह से डर और धमकी का इस्तेमाल कर भोले-भाले नागरिकों से बड़ी रकम ठग लेते हैं।
हालांकि गोरखपुर पुलिस और साइबर सेल ने सराहनीय काम करते हुए लगभग पूरी रकम वापस करा दी, लेकिन यह घटना सभी के लिए एक चेतावनी है।
अगर आपके पास भी कोई ऐसा कॉल या मैसेज आता है, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।