IAS Abhishek Prakash bribery case अभिषेक प्रकाश घूसकांड: सोलर प्रोजेक्ट मंजूरी के बदले रिश्वत मामले में निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश आरोपी, SIT दर्ज करेगी बयान; ED भी जांच में जुटी
IAS Abhishek Prakash bribery case इन्वेस्ट यूपी सोलर प्रोजेक्ट घूस मामले में निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश को SIT ने आरोपी बनाया। बयान दर्ज होंगे, ED और विजिलेंस जांच भी जारी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निवेश के नाम पर कथित भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से सोलर पावर प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित चल रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को अब इस केस में औपचारिक रूप से आरोपी बना दिया गया है। विशेष जांच दल (SIT) ने जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह अहम कदम उठाया है।
यह मामला अब IAS Abhishek Prakash bribery case के रूप में प्रदेश की नौकरशाही पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
एसआईटी ने क्यों बनाया आरोपी
एसआईटी की जांच में यह सामने आया कि सोलर पावर प्रोजेक्ट की फाइल को आगे बढ़ाने के लिए कथित तौर पर एक बिचौलिये के जरिए रिश्वत की मांग की गई थी। जांच में मिले कॉल रिकॉर्ड, बयान और अन्य डिजिटल सबूतों में तत्कालीन इन्वेस्ट यूपी के सीईओ अभिषेक प्रकाश की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसी आधार पर उन्हें केस में आरोपी बनाया गया है।
अब एसआईटी उनके बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है, जिसके लिए नियुक्ति विभाग से अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही आगे की कानूनी कार्रवाई तेज की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला एसएईएल सोलर पावर कंपनी से जुड़ा है। कंपनी के प्रतिनिधि विश्वजीत दास ने 20 मार्च 2025 को लखनऊ के गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर के अनुसार, कंपनी ने उत्तर प्रदेश में सोलर सेल और सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण यूनिट लगाने के लिए इन्वेस्ट यूपी में आवेदन किया था।
आरोप है, कि आवेदन के बाद एक वरिष्ठ अधिकारी के कहने पर निकांत जैन नाम के व्यक्ति को संपर्क के लिए भेजा गया, जिसने प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने के बदले कुल लागत का 5 प्रतिशत रिश्वत मांगी। जब कंपनी ने रिश्वत देने से इनकार किया, तो उनकी फाइल को रोक दिया गया।
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यहीं से IAS Abhishek Prakash bribery case की शुरुआत हुई।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुआ निलंबन
मामले के सामने आते ही मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन इन्वेस्ट यूपी सीईओ अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया। वहीं आरोपी बिचौलिये निकांत जैन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। सरकार ने यह संदेश दिया कि निवेश प्रक्रिया में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
SIT की टीम और जांच का दायरा
इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए गठित SIT में
बाराबंकी के एएसपी विकास चंद्र त्रिपाठी,
एसीपी विभूतिखंड विनय द्विवेदी,
और इंस्पेक्टर आलोक राव शामिल हैं।
IAS Abhishek Prakash bribery case पूछताछ के दौरान निकांत जैन ने स्पष्ट रूप से उस वरिष्ठ अधिकारी का नाम अभिषेक प्रकाश बताया, जिनके निर्देश पर वह काम कर रहा था। कई ऐसे सबूत भी मिले, जो दोनों के बीच लगातार संपर्क की पुष्टि करते हैं।
ED और विजिलेंस की भी समानांतर जांच
IAS Abhishek Prakash bribery case इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी जांच शुरू कर दी है। ED मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेनदेन के पहलुओं की जांच कर रही है। इसके अलावा विजिलेंस विभाग भी अलग से जांच कर रहा है।
इस तरह IAS Abhishek Prakash bribery case अब बहु एजेंसी जांच का विषय बन चुका है।
चार्जशीट के बाद नया मोड़: वादी का शपथ पत्र
SIT पहले ही आरोपी निकांत जैन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसी बीच केस में एक नया मोड़ तब आया जब वादी ने अदालत में शपथ पत्र देकर कहा कि उसके द्वारा लगाए गए आरोप गलत थे।
इस शपथ पत्र ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं,क्या वादी पर किसी तरह का दबाव बनाया गया? हालांकि जांच एजेंसियों का कहना है, कि विवेचना काफी आगे बढ़ चुकी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई जारी रहेगी।
निवेश व्यवस्था और नौकरशाही पर सवाल
इन्वेस्ट यूपी जैसे मंच का उद्देश्य निवेशकों को सुविधा देना है, लेकिन इस तरह के आरोप प्रदेश की छवि और निवेश वातावरण दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। IAS Abhishek Prakash bribery case ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है,कि भ्रष्टाचार के आरोपों में बड़े अधिकारी भी जांच से ऊपर नहीं हैं।
अब सबकी निगाहें SIT की अगली कार्रवाई, अभिषेक प्रकाश के बयान और ED की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मामला उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और निवेश नीति को लेकर बड़े खुलासे कर सकता है।
डिस्क्लेमर यह समाचार उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों, एफआईआर, जांच एजेंसियों की जानकारी और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। मामला विचाराधीन है। किसी भी व्यक्ति को दोषी या निर्दोष ठहराना न्यायालय का अधिकार क्षेत्र है।