Kanpur Registry Scam कानपुर रजिस्ट्री विभाग में 2500 करोड़ की गड़बड़ी का खुलासा, आयकर सर्वे में सरकार को 500 करोड़ के टैक्स नुकसान के सबूत
Kanpur Registry Scam कानपुर रजिस्ट्री कार्यालय जोन-वन में आयकर सर्वे के दौरान 2500 करोड़ की विसंगतियां सामने आईं। सरकार को 500 करोड़ के टैक्स नुकसान का अनुमान, जानिए पूरा मामला | Kanpur Registry Scam
Kanpur Registry Scam ने खोली सिस्टम की परतें, पांच साल से चल रहा था फर्जीवाड़े का खेल
कानपुर में रजिस्ट्री विभाग की कार्यप्रणाली पर आयकर विभाग की कार्रवाई ने बड़ा सवाल खड़ा Back दिया है। सिविल लाइंस स्थित रजिस्ट्री कार्यालय के जोन वन में हुए आयकर सर्वे के दौरान ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं, जिन्होंने सरकारी तंत्र में गहराई तक जमी अनियमितताओं को उजागर कर दिया है। शुरुआती जांच में करीब 2500 करोड़ रुपये की विसंगतियां मिलने की बात सामने आई है, जिससे सरकार को लगभग 500 करोड़ रुपये के टैक्स राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। इस पूरे मामले को अब Kanpur Registry Scam के तौर पर देखा जा रहा है।
छह घंटे चला आयकर सर्वे, रिकॉर्ड खंगालने में जुटी रही टीम
आयकर निदेशक (आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण) के निर्देश पर यह सर्वे सहायक निदेशक विमलेश राय के नेतृत्व में किया गया। टीम में आयकर निरीक्षक कुलदीप गुप्ता, बिनोद केशरी, राजेंद्र कुमार और अंकित श्रीवास्तव शामिल रहे। सर्वे के दौरान भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया था ताकि जांच प्रक्रिया बिना किसी व्यवधान के पूरी हो सके।
आयकर अधिकारियों ने वर्ष 2020 से 2025 तक अचल संपत्तियों की रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। इसी दौरान कई ऐसी फाइलें सामने आईं, जिनमें दर्ज जानकारी और वास्तविक रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड में बड़ा अंतर पाया गया। यही अंतर आगे चलकर Kanpur Registry Scam की जड़ साबित हुआ।
डेटा मेल नहीं खा रहा, यहीं से खुली गड़बड़ी की परत
जांच में सामने आया कि रजिस्ट्री विभाग द्वारा आयकर विभाग को जो डिजिटल डेटा भेजा गया था, वह असल रजिस्ट्री रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था। कई करोड़ की संपत्तियों को कागजों में कम कीमत का दिखाया गया, जिससे टैक्स देनदारी जानबूझकर कम हो गई।
आयकर सूत्रों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े का सिलसिला पिछले पांच वर्षों से लगातार चल रहा था। वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई रजिस्ट्रियों में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां पाई गईं। इसी अवधि को Kanpur Registry Scam का सबसे संवेदनशील दौर माना जा रहा है।
खेती किसानी दिखाकर लिया गया फार्म 60 का फायदा
जांच में यह भी सामने आया कि कई महंगी आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों को कागजों में खेती-किसानी की जमीन बताकर दिखाया गया। ऐसा करने से संबंधित पक्षों को फार्म-60 का लाभ दे दिया गया और पैन कार्ड की अनिवार्यता से बचा लिया गया।
इस तरीके से न केवल टैक्स चोरी की गई, बल्कि आयकर विभाग की निगरानी प्रणाली को भी गुमराह किया गया। यही वजह है कि अब Kanpur Registry Scam को एक संगठित और सुनियोजित घोटाले के रूप में देखा जा रहा है।
पैन नंबर में मनमानी, मोबाइल नंबर तक गलत
आयकर सर्वे के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। अधिकारियों के मुताबिक, कई रजिस्ट्रियों में मनमर्जी से पैन नंबर लिख दिए गए। कुछ मामलों में तो ऐसा पैन नंबर दर्ज था, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध ही नहीं था।
इतना ही नहीं, कई रजिस्ट्रियों में खरीदार और विक्रेता के मोबाइल नंबर तक गलत पाए गए। यह लापरवाही नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों से बचने की सोची समझी रणनीति मानी जा रही है। ये सभी तथ्य Kanpur Registry Scam को और गंभीर बनाते हैं।
अधिकारियों को 10 दिन का समय, आगे और खुलासों की उम्मीद
फिलहाल आयकर विभाग ने संबंधित अधिकारियों को 10 दिन के भीतर सभी जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जांच अभी शुरुआती चरण में है, और कई रजिस्ट्रियों की फाइलें अभी खंगाली जानी बाकी हैं।
सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में टैक्स चोरी की रकम और बढ़ सकती है। यदि सभी दस्तावेजों की गहन जांच होती है, तो Kanpur Registry Scam में शामिल लोगों की संख्या भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
कानपुर के बाद अलीगढ़ में भी आयकर विभाग की कार्रवाई
कानपुर के साथ साथ आयकर विभाग ने अलीगढ़ में भी सख्ती दिखाई है। सब रजिस्ट्रार इगलास के कार्यालय में किए गए सर्वे में बैनामे से जुड़ी सूचनाओं में पैन कार्ड का मिलान न होने की पुष्टि हुई है।
एक दिन पहले सासनी में भी इसी तरह का सर्वे किया गया था। इससे यह साफ हो गया है, कि रजिस्ट्री से जुड़ी गड़बड़ियां केवल एक जिले तक सीमित नहीं हैं। जांच एजेंसियां मान रही हैं,कि Kanpur Registry Scam जैसे मामले अन्य जिलों में भी सामने आ सकते हैं।
राजस्व प्रणाली पर बड़ा सवाल
यह मामला केवल टैक्स चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी राजस्व प्रणाली और निगरानी तंत्र की कमजोरियों को भी उजागर करता है। यदि समय रहते आयकर विभाग की नजर इस पर नहीं पड़ती, तो सरकार को और भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता था।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है, कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है, और क्या इससे भविष्य में ऐसे घोटालों पर रोक लग पाएगी।
निष्कर्ष
कानपुर और अलीगढ़ में सामने आए ये मामले इस बात का संकेत हैं,कि रजिस्ट्री व्यवस्था में पारदर्शिता और सख्त निगरानी की सख्त जरूरत है। Kanpur Registry Scam ने साबित कर दिया है,कि यदि सरकारी विभागों के बीच डेटा का सही मिलान न हो, तो बड़े स्तर पर टैक्स चोरी संभव हो जाती है। आने वाले दिनों में यह जांच कई और बड़े नामों को बेनकाब कर सकती है।
डिस्क्लेमर यह समाचार लेख आयकर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय मीडिया स्रोतों पर आधारित है। इसमें वर्णित तथ्य प्रारंभिक जांच और आधिकारिक जानकारियों के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं। किसी भी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था को दोषी ठहराने का उद्देश्य नहीं है। सभी संबंधित पक्ष कानून की दृष्टि में तब तक निर्दोष माने जाएंगे, जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध न हो जाए। लेख का उद्देश्य केवल जनहित में सूचना देना है, न कि किसी की छवि को ठेस पहुंचाना।