Panchayat Secretary Bribery Video कैमरे में कैद घूस, सिस्टम की चुप्पी पर सवाल इटावा में पंचायत सेक्रेटरी का 20 हजार लेते वीडियो वायरल 5 महीने बाद भी कार्रवाई शून्य
इटावा में पंचायत सेक्रेटरी Panchayat Secretary Bribery Video बनवारीलाल का 20 हजार की रिश्वत लेते वीडियो वायरल, शिकायत के 5 महीने बाद भी यूपी सरकार की चुप्पी
उत्तर प्रदेश के इटावा से सामने आया मामला प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन गया है। पंचायत सेक्रेटरी बनवारीलाल का कथित तौर पर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल है, जिसे लेकर Etawah Panchayat Secretary Bribery Video चर्चा के केंद्र में है। वीडियो में घूसखोरी का दृश्य साफ दिखने का दावा किया जा रहा है, इसके बावजूद कार्रवाई न होना सवाल खड़े करता है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि Etawah Panchayat Secretary Bribery Video के साथ औपचारिक शिकायत उत्तर प्रदेश सरकार को भेजे पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन न निलंबन, न विभागीय जांच का ठोस परिणाम सब कुछ ठहरा हुआ नजर आता है। क्या खुले सबूत भी अब कार्रवाई के लिए काफी नहीं
शिकायतकर्ता का कहना है कि वीडियो प्रमाणिक है और इसे संबंधित विभागों तक पहुंचाया गया, फिर भी फाइलें आगे नहीं बढ़ीं। Etawah Panchayat Secretary Bribery Video पर सिस्टम की यह खामोशी आम नागरिकों के भरोसे को कमजोर करती है।
सरकार की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति के दावों के बीच Etawah Panchayat Secretary Bribery Video यह सवाल पूछता है कि क्या भ्रष्टाचार पर कार्रवाई रसूख देखकर तय होती है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि आम कर्मचारी होता तो अब तक सख्त कदम उठ चुके होते।
राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज है क्या घूसखोरी पर कार्रवाई के लिए भी “परमिट” चाहिए? Etawah Panchayat Secretary Bribery Video ने शासन के सुशासन और पारदर्शिता के दावों को कठघरे में ला खड़ा किया है।
जब सरेआम सबूत होने के बावजूद सिस्टम ‘कुंभकर्णी नींद’ में रहे, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद कैसे करे? Etawah Panchayat Secretary Bribery Video यही सवाल जनता की आवाज बनकर उठा रहा है।
अब निगाहें प्रशासन पर हैं क्या इस Etawah Panchayat Secretary Bribery Video में निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई होगी, या फिर मामला फाइलों के ढेर में दब जाएगा?
यह लेख सार्वजनिक रूप से वायरल वीडियो, शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। सभी आरोप जांचाधीन हैं। दोष सिद्ध होने तक किसी को अपराधी नहीं माना जाना चाहिए। प्रकाशक निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करता है।
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