Purvanchal Expressway CCTV Case पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे CCTV कांड: निजी वीडियो, टोल मैनेजर का कबूलनामा, गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई

Written by: akhtar husain

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Purvanchal Expressway CCTV Case पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे CCTV कांड निजी पलों की रिकॉर्डिंग टोल मैनेजर का कबूलनामा और यूपी पुलिस की बड़ी कार्रवाई

Purvanchal Expressway CCTV Case पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर CCTV के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। निजी वीडियो लीक, ATMS मैनेजर का बयान, कर्मचारियों की गिरफ्तारी नौकरी से निकाले जाने और यूपी पुलिस की पूरी कार्रवाई पढ़ें।

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, जिसे उत्तर प्रदेश की सबसे आधुनिक और सुरक्षित सड़कों में गिना जाता है, अब एक ऐसे मामले को लेकर चर्चा में है,जिसने लोगों के भरोसे को झकझोर कर रख दिया है। Purvanchal Expressway CCTV Case में कार के अंदर बैठे कपल के निजी पलों की रिकॉर्डिंग, फिर उसका लीक होना और कथित वसूली के आरोप सामने आए। यह मामला केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है।

Purvanchal Expressway CCTV Case पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे CCTV कांड: निजी वीडियो, टोल
Purvanchal Expressway CCTV Case पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे CCTV कांड: निजी वीडियो, टोल

बल्कि इसमें निगरानी तंत्र के दुरुपयोग, निजता के उल्लंघन और सिस्टम की कमजोरियों की पूरी कहानी छिपी है। पुलिस जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और ठेका कंपनी की सख्त कार्रवाई ने इसे उत्तर प्रदेश के सबसे संवेदनशील CCTV मामलों में बदल दिया है।

मामले की शुरुआत 25 दिसंबर को हुई, जब आजमगढ़ से लखनऊ जा रहे एक कपल का कार में रोमांस करते हुए CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में गाड़ी का नंबर साफ दिखाई दे रहा था। इसके बाद 2 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक इस मामले की लिखित शिकायत पहुंची। शिकायत में आरोप लगाया गया कि एंटी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) के तत्कालीन मैनेजर आशुतोष सरकार ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर लगे CCTV कैमरों से नवविवाहित जोड़े का वीडियो रिकॉर्ड किया और 32 हजार रुपये की वसूली की। शिकायत में इसी तरह की तीन अन्य घटनाओं का भी उल्लेख किया गया। इस खुलासे के बाद Purvanchal Expressway CCTV Case ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी।

शिकायत सामने आते ही ATMS का काम देख रही ठेका कंपनी सुपर वेव कम्युनिकेशन एंड इंफ्रा सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड (SCIPL) ने आशुतोष सरकार को बैक डेट में टर्मिनेट कर दिया। 9 दिसंबर को उत्तर प्रदेश पुलिस ने आशुतोष सरकार को गिरफ्तार कर FIR दर्ज की। जांच आगे बढ़ी तो उनके सहयोगी अभिषेक तिवारी को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। अभिषेक तिवारी संग्रामपुर क्षेत्र के बदलापुर पूरे खुशियाल तिवारी का पुरवा गांव का रहने वाला है।

और वह हलियापुर टोल प्लाजा कंट्रोल रूम में तकनीकी सहायक के पद पर तैनात था। इस बीच कंपनी ने आशुतोष सरकार के अलावा सिस्टम टेक्नीशियन आशुतोष तिवारी, ट्रैफिक मैनेजर शशांक शेखर और सिस्टम इंजीनियर प्रमोद कुमार को भी नौकरी से हटा दिया। यह कार्रवाई Purvanchal Expressway CCTV Case में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक सख्ती मानी जा रही है।

Purvanchal Expressway CCTV Case गिरफ्तारी के बाद पूर्व मैनेजर आशुतोष सरकार ने पुलिस पूछताछ में कई चौंकाने वाले दावे किए। उसने कहा कि ढाई साल के कार्यकाल में CCTV में ऐसे हजारों मामले रिकॉर्ड हुए लेकिन उसने कभी कोई वीडियो वायरल नहीं किया। उसके अनुसार, वायरल हुआ वीडियो टोल पर काम कर चुके एक पूर्व कर्मचारी ने किसी ड्राइवर को दिया था। आशुतोष ने पुलिस को बताया कि कुछ कर्मचारियों को ड्यूटी में लापरवाही के कारण हटाया गया था, जिससे नाराज होकर उन्होंने बदनाम करने की साजिश रची। उसने यह भी दावा किया कि शशांक शेखर नाम के कर्मचारी ने खुद स्वीकार किया है।

कि उसने वीडियो एक ड्राइवर को दिया। इस दावे के समर्थन में आशुतोष ने पुलिस को एक ऑडियो क्लिप भी सुनाई, जिसमें शशांक यह कहते हुए सुनाई देता है,कि उसने वीडियो दिया है और वह वायरल नहीं होगा। यह बयान Purvanchal Expressway CCTV Case को और पेचीदा बना देता है।

पुलिस ने जब CCTV फुटेज में जूम किए जाने को लेकर सवाल उठाया तो आशुतोष सरकार ने कहा कि यह सामान्य प्रक्रिया है। टोल पर खड़ी गाड़ियों में पंक्चर, तकनीकी खराबी या किसी आपात स्थिति की जांच के लिए जूम किया जाता है,और जरूरत पड़ने पर फोटो लेकर ग्रुप में साझा किया जाता है। हालांकि पुलिस का कहना है,कि जब यह स्पष्ट हो गया था कि गाड़ी में कपल है, तब अतिरिक्त जूम और रिकॉर्डिंग की क्या जरूरत थी। इस सवाल ने Purvanchal Expressway CCTV Case में निगरानी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हलियापुर टोल प्लाजा, जो सुल्तानपुर मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर है, वहीं से सुल्तानपुर से गाजीपुर तक 341 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की 24 घंटे निगरानी होती है। एक शिफ्ट में 6 से 8 कर्मचारी तैनात रहते हैं,और तीन शिफ्टों में लगातार मॉनिटरिंग चलती है। जांच में सामने आया कि केवल तीन लोगों को CCTV फुटेज तक सीधी पहुंच थी। यानी वीडियो निकालने की क्षमता बेहद सीमित लोगों के पास थी। यही वजह है कि Purvanchal Expressway CCTV Case में जिम्मेदारी तय करना पुलिस के लिए अहम चुनौती बन गया है।

थाना प्रभारी तरुण पटेल के अनुसार, वायरल वीडियो में दिख रही गाड़ी के नंबर के आधार पर जब वाहन मालिक से बात की गई तो उसने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उसने बताया कि उसकी पत्नी गर्भवती है,और उस समय उसे असहज महसूस हो रहा था, इसलिए वह कार में उसके साथ था। टोल कर्मचारी खुद उनके पास आए और समस्या पूछी, जिसके लिए उसने उन्हें धन्यवाद भी दिया था। इसके बावजूद वीडियो को गलत तरीके से पेश किया गया। यह बयान Purvanchal Expressway CCTV Case में कथित अश्लीलता के आरोपों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

स्थानीय लोगों के बयान भी इस मामले को और गंभीर बनाते हैं। हलियापुर बाजार के सोनू सिंह का कहना है, कि इस तरह की चर्चाएं पहले से चल रही थीं और गांव की महिलाओं व लड़कियों के वीडियो बनाए जाने की बातें सामने आती रही हैं।

वहीं, रणविजय सिंह और आरपी सिंह जैसे स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि आरोपी रोज ऐसे वीडियो मोबाइल में रखकर लोगों को दिखाता था और वसूली करता था। एक अन्य कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ऑफिस में पार्टी कल्चर आम था और बाहर से आने वाले अधिकारियों की जमकर खातिरदारी की जाती थी। ये सभी आरोप जांच के दायरे में हैं, लेकिन Purvanchal Expressway CCTV Case को लेकर जनता की नाराजगी साफ दिखाई देती है।

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यह मामला सिर्फ कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। CCTV और ATMS जैसे सिस्टम सड़क सुरक्षा और आपात मदद के लिए बनाए जाते हैं, न कि किसी की निजी जिंदगी में झांकने के लिए। Purvanchal Expressway CCTV Case ने यह साफ कर दिया है,कि अगर निगरानी तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त नियंत्रण नहीं होगा, तो तकनीक भरोसे की जगह डर बन सकती है। अब सबकी नजरें पुलिस जांच, कोर्ट की कार्रवाई और प्रशासन द्वारा किए जाने वाले सिस्टम सुधारों पर टिकी हैं।

Disclaimer यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं, पुलिस बयानों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने का उद्देश्य नहीं है। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा। लेख का उद्देश्य केवल सूचना देना और जनहित में जागरूकता बढ़ाना है।

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