Sukesh Chandrashekhar Extortion Case सुकेश चंद्रशेखर रंगदारी केस में बड़ा मोड़: ₹200 करोड़ विवाद में ₹217 करोड़ के सेटलमेंट ऑफर पर कोर्ट की नजर, 3 जनवरी को अगली सुनवाई
Sukesh Chandrashekhar Extortion Case सुकेश चंद्रशेखर ने ₹200 करोड़ के रंगदारी मामले में ₹217 करोड़ का सेटलमेंट ऑफर कोर्ट में दिया। पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई, ED, PMLA, MCOCA और जैकलीन फर्नांडिस से जुड़ा पूरा मामला पढ़ें।
दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कुख्यात ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े हाई प्रोफाइल Sukesh Chandrashekhar Extortion Case में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ₹200 करोड़ की कथित रंगदारी और ठगी के इस मामले में सुकेश चंद्रशेखर ने शिकायतकर्ता अदिति सिंह को ₹217 करोड़ का सेटलमेंट ऑफर दिया है। यह प्रस्ताव उनके वकील अनंत मलिक के माध्यम से पटियाला हाउस कोर्ट में दाखिल अर्जी के जरिए रखा गया, जिस पर फिलहाल अदालत ने कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
अर्जी में यह साफ किया गया है, कि यह सेटलमेंट ऑफर किसी भी कानूनी अधिकार को प्रभावित किए बिना दिया गया है,और इसे आरोप स्वीकार करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वकील की ओर से कोर्ट से यह भी आग्रह किया गया है,कि शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर इस सेटलमेंट प्रस्ताव को रिकॉर्ड पर लिया जाए, ताकि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जा सके। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस Sukesh Chandrashekhar Extortion Case में अगली सुनवाई की तारीख 3 जनवरी तय की है।
यह मामला दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर और उसके सहयोगियों ने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह की पत्नियों को निशाना बनाकर खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताने का दावा किया। आरोप है, कि इसी डर और दबाव के जरिए उनसे करीब ₹200 करोड़ की जबरन वसूली की गई। इस केस में सुकेश के करीबी सहयोगी ए पॉलोज को भी गिरफ्तार किया गया था।
जांच एजेंसियों का कहना है, कि यह सिर्फ एक साधारण ठगी नहीं बल्कि एक संगठित अपराध का हिस्सा था। इसी वजह से सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ Sukesh Chandrashekhar Extortion Case के साथ साथ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत भी कार्रवाई की गई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है,और आरोप है,कि अवैध रूप से वसूली गई रकम को हवाला नेटवर्क और शेल कंपनियों के जरिए छिपाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इसमें महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) भी लगाया है। यह कानून संगठित अपराध से जुड़े मामलों में बेहद सख्त माना जाता है,और इसके तहत आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलती। जांच एजेंसियों का दावा है,कि Sukesh Chandrashekhar Extortion Case में इस्तेमाल किया गया पूरा नेटवर्क सुनियोजित और प्रोफेशनल तरीके से संचालित किया गया था।
इस पूरे प्रकरण में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस का नाम भी लगातार चर्चा में रहा है। ₹200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने उन्हें आरोपी बनाया है। जांच में सामने आया कि सुकेश चंद्रशेखर ने खुद को बड़ा बिजनेसमैन बताकर जैकलीन से नजदीकियां बढ़ाईं और उन्हें महंगे गिफ्ट्स दिए, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये बताई गई। ईडी का आरोप है,कि ये तोहफे अपराध से अर्जित धन से खरीदे गए थे, जो Sukesh Chandrashekhar Extortion Case से जुड़ा हुआ है।
हालांकि, जैकलीन फर्नांडिस का कहना है, कि उन्हें सुकेश चंद्रशेखर के आपराधिक बैकग्राउंड की जानकारी नहीं थी। दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एक्सटॉर्शन केस में उन्हें आरोपी नहीं बल्कि गवाह के तौर पर शामिल किया गया है। इसके बावजूद ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।
इससे पहले 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने जैकलीन फर्नांडिस की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग केस को रद्द करने की मांग की थी। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद यह साफ हो गया कि जांच एजेंसियां इस मामले में आगे की कार्रवाई जारी रखेंगी और Sukesh Chandrashekhar Extortion Case कानूनी रूप से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ेगा।
सुकेश चंद्रशेखर उस समय भी सुर्खियों में आए थे, जब जेल से जैकलीन फर्नांडिस के नाम उनके कथित पत्र और संदेश सामने आए। इन पत्रों में सुकेश ने जैकलीन को अपनी ताकत बताया और उनके गानों की तारीफ की। हालांकि, जांच एजेंसियों का कहना है,कि इन पत्रों का सीधा संबंध कानूनी प्रक्रिया से नहीं है, लेकिन इससे मामले की संवेदनशीलता और सार्वजनिक चर्चा जरूर बढ़ी है।
फिलहाल, पटियाला हाउस कोर्ट में 3 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि अदालत सेटलमेंट ऑफर को स्वीकार करने की अनुमति देती है या फिर Sukesh Chandrashekhar Extortion Case अपने मौजूदा कानूनी ट्रैक पर ही आगे बढ़ता है। इस मामले का फैसला मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध से जुड़े भविष्य के मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार न्यायालय में चल रही कार्यवाही और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। मामला विचाराधीन है और कानूनन दोष सिद्ध होने तक सभी आरोप आरोप मात्र हैं।