TTD Ghee Adulteration Scam आस्था से खिलवाड़ का महाघोटाला TTD में 68 लाख किलो सिंथेटिक घी ₹250 करोड़ का फर्जीवाड़ा CBI SIT की चार्जशीट में 36 नाम
TTD Ghee Adulteration Scam में CBI-SIT की फाइनल चार्जशीट, 2021 से 2024 के बीच 68 लाख किलो नकली घी सप्लाई, NDDB रिपोर्ट से मिलावट का खुलासा
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम TTD से जुड़ा TTD Ghee Adulteration Scam देश की आस्था, स्वास्थ्य और सरकारी निगरानी व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा करता है। CBI के नेतृत्व वाली SIT ने जनवरी 2026 में नेल्लोर की ACB कोर्ट में फाइनल चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 36 आरोपियों को नामजद किया गया है। जांच के अनुसार 2021 से 2024 के बीच मंदिर को करीब 68 लाख किलोग्राम नकली या सिंथेटिक घी की सप्लाई की गई, जिसकी अनुमानित कीमत ₹250 करोड़ है।
चार्जशीट में खुलासा हुआ कि उत्तराखंड स्थित मुख्य सप्लायर भोले बाबा डेयरी ने इस पूरे समय में दूध या मक्खन की एक बूंद भी नहीं खरीदी, इसके बावजूद TTD को लगातार घी की आपूर्ति होती रही। TTD Ghee Adulteration Scam में असली देसी घी की जगह पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और केमिकल एडिटिव्स से तैयार मिश्रण भेजा गया।
CBI SIT की जांच में दिल्ली के कारोबारी अजय कुमार सुगंध A-16 की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि उसने घी की खुशबू, स्वाद और लैब वैल्यू को असली दिखाने के लिए एसिटिक एसिड एस्टर और आर्टिफिशियल फ्लेवर सप्लाई किए। यह पहलू TTD Ghee Adulteration Scam को पूरी तरह योजनाबद्ध अपराध साबित करता है।
जांच एजेंसी ने यह भी पाया कि इस घोटाले में TTD के कुछ वरिष्ठ अधिकारी और बाहरी डेयरी विशेषज्ञ शामिल थे। तत्कालीन GM (Procurement) आरएसएसवीआर सुब्रह्मण्यम सहित कई लोगों पर आरोप है कि उन्होंने रिश्वत और तोहफों के बदले फर्जी क्वालिटी रिपोर्ट तैयार कराईं और सबूत दबाए। इससे TTD Ghee Adulteration Scam की गहराई और गंभीरता सामने आती है।
NDDB की लैब रिपोर्ट (जुलाई 2024) ने पूरे मामले की पोल खोल दी। रिपोर्ट में घी सैंपल्स की S Value 19.72 पाई गई, जबकि शुद्ध देसी घी के लिए मानक 98 104 है। रिपोर्ट में सूअर की चर्बी (Lard), बीफ टैलो, वेजिटेबल ऑयल और मछली के तेल जैसे बाहरी फैट की मौजूदगी दर्ज की गई, जो TTD Ghee Adulteration Scam को जन-स्वास्थ्य और धार्मिक आस्था दोनों के लिए खतरनाक बनाती है।
ISO 17678 मानक के तहत S-4 वैल्यू से एनिमल फैट की पहचान होती है। SIT की अंतिम रिपोर्ट में माना गया कि मुख्य मिलावट केमिकल स्लज से की गई, हालांकि कुछ रिजेक्टेड टैंकरों में एनिमल फैट भी मिला, जिन्हें कथित तौर पर दोबारा सप्लाई चेन में शामिल कर दिया गया। यह तथ्य TTD Ghee Adulteration Scam को सिर्फ मिलावट नहीं, बल्कि संगठित अपराध का मामला बनाता है।
अब पूरा देश यह देख रहा है कि TTD Ghee Adulteration Scam में दोषियों को कितनी जल्दी और कितनी सख्त सजा मिलती है, और क्या भविष्य में मंदिरों व सार्वजनिक संस्थानों की सप्लाई चेन को पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा।
यह लेख आधिकारिक चार्जशीट, जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। सभी आरोप न्यायालय में विचाराधीन हैं। दोष सिद्ध होने तक किसी भी व्यक्ति को अपराधी नहीं माना जाना चाहिए। प्रकाशक निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करता है।