Basti GGIC Education Scam बस्ती GGIC में शिक्षा घोटाले के आरोप, लाखों की सैलरी और अधूरा ज्ञान बना चिंता का कारण

Written by: Tanu K

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 Basti GGIC Education Scam बस्ती का GGIC सवालों के घेरे में लाखों की सैलरी, अधूरा ज्ञान और बदहाल शिक्षा व्यवस्था ने खोली सिस्टम की पोल

Basti GGIC Education Scam बस्ती के आर्य कन्या इंटर कॉलेज में प्रिंसिपल और शिक्षकों के अधूरे ज्ञान, मिड-डे मील अनियमितता और घटती छात्र संख्या ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Basti GGIC Education Scam बस्ती GGIC में शिक्षा घोटाले के आरोप, लाखों की सैलरी और अधूरा ज्ञान बना चिंता का कारण
Basti GGIC Education Scam बस्ती GGIC में शिक्षा घोटाले के आरोप, लाखों की सैलरी और अधूरा ज्ञान बना चिंता का कारण

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का प्रतिष्ठित सरकारी विद्यालय आर्य कन्या इंटर कॉलेज (GGIC) आज गंभीर सवालों के घेरे में है। जिस संस्थान से छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद की जाती है, वहां शिक्षा का स्तर, प्रशासनिक क्षमता और बुनियादी सुविधाएं लगातार गिरती नजर आ रही हैं। Basti GGIC Education Scam अब सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं रह गया, बल्कि यह पूरे सरकारी शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े करता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस स्कूल पर हर महीने करीब 16 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, प्रति छात्र लगभग 8 हजार रुपये मासिक खर्च के बावजूद न तो पढ़ाई का स्तर संतोषजनक है,और न ही स्कूल का बुनियादी ढांचा सुरक्षित। यही कारण है, कि कभी 800 छात्राओं वाला यह स्कूल अब सिमटकर करीब 200 छात्राओं तक पहुंच गया है। Basti GGIC Education Scam की सबसे बड़ी मार सीधे बच्चों के भविष्य पर पड़ती दिख रही है।

दरकती दीवारें और डर के साए में पढ़ाई

आर्य कन्या इंटर कॉलेज की इमारत जर्जर हालत में है। दीवारों में दरारें, छत से गिरता प्लास्टर और असुरक्षित कक्षाएं छात्राओं के लिए खतरा बन चुकी हैं। अभिभावकों में यह डर लगातार बना हुआ है,कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए। यही कारण है,कि कई परिवार अपनी बेटियों को इस स्कूल से निकाल चुके हैं, जिससे छात्र संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। Basti GGIC Education Scam का यह पहलू प्रशासनिक लापरवाही को साफ दिखाता है।

प्रिंसिपल माया कुमारी की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

स्कूल की प्रिंसिपल माया कुमारी को सरकार हर महीने लगभग 1 लाख 15 हजार रुपये वेतन देती है, लेकिन उनके बुनियादी शैक्षिक ज्ञान को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। कैमरे पर पूछे गए बेहद साधारण सवालों के जवाब देने में वे असहज नजर आईं। अंग्रेजी तो दूर, हिंदी भाषा की मात्राओं और सामान्य शब्दों की स्पेलिंग में भी भारी गलतियां सामने आईं। उनके द्वारा लिखे गए आधिकारिक पत्रों में व्याकरणिक त्रुटियां स्कूल की साख पर सीधा असर डालती हैं। Basti GGIC Education Scam में यह मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।

विज्ञान पढ़ाने वाली शिक्षिका का ज्ञान भी कटघरे में

केवल प्रिंसिपल ही नहीं, बल्कि स्कूल की साइंस टीचर रीता गौतम का विषय ज्ञान भी सवालों के घेरे में है। उनसे जब विज्ञान से जुड़े बेहद साधारण प्रश्न पूछे गए, तो वे जवाब देने में असमर्थ रहीं। यहां तक कि “Science” की स्पेलिंग पूछे जाने पर भी वे हक्का बक्का रह गईं। ऐसे में सवाल उठता है,कि जिन शिक्षकों को बच्चों का भविष्य गढ़ना है, अगर उनका खुद का ज्ञान अधूरा होगा, तो शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधरेगी। Basti GGIC Education Scam इस स्थिति को और गंभीर बनाता है।

मिड-डे मील में अनियमितता बच्चों की सेहत से खिलवाड़

स्कूल में मिड-डे मील को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। जांच के दौरान भोजन में कीड़े पाए जाने की बात सामने आई। बच्चों को दूध देने के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही थी और खिचड़ी में सोयाबीन व टमाटर महज दिखावे के लिए डाले गए थे। जिला समन्वयक द्वारा तैयार रिपोर्ट में इन अनियमितताओं का जिक्र है, जिसे बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंप दिया गया है। यह मामला Basti GGIC Education Scam को और गहरा करता है।

शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया और जांच का भरोसा

जिला विद्यालय निरीक्षक संजय सिंह ने कहा है, कि उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिल चुकी है और वे स्वयं स्कूल जाकर शिक्षा के स्तर की जांच करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि उनकी दक्षता बढ़ाई जा सके। यदि जांच में कोई गंभीर खामी पाई जाती है, तो शासन को रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। हालांकि अभिभावकों का कहना है, कि सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई जरूरी है, क्योंकि Basti GGIC Education Scam लंबे समय से चला आ रहा है।

राजनीतिक हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई की मांग

बीजेपी नेता आशीष शुक्ला ने इस पूरे प्रकरण को लेकर जिलाधिकारी से शिकायत की है। उन्होंने प्रिंसिपल माया कुमारी पर शैक्षिक अयोग्यता, वित्तीय अनियमितताओं और आरक्षण प्रक्रिया में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मांग की है,कि मामले की निष्पक्ष जांच कर प्रिंसिपल को निलंबित किया जाए। उनका कहना है, कि अगर शिक्षक और प्रधानाचार्य ही योग्य नहीं होंगे, तो सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। Basti GGIC Education Scam अब प्रशासन की साख की भी परीक्षा बन गया है।

बच्चों के भविष्य पर मंडराता खतरा

आर्य कन्या इंटर कॉलेज की स्थिति यह दर्शाती है, कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में निगरानी और जवाबदेही की कितनी बड़ी कमी है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद अगर शिक्षा की गुणवत्ता गिरती जाए, तो यह सिस्टम की विफलता है। Basti GGIC Education Scam केवल एक स्कूल की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों सरकारी स्कूलों की तस्वीर है, जहां सुधार की जरूरत बेहद जरूरी हो चुकी है।

डिस्क्लेमर यह समाचार लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों, स्थानीय स्तर पर सामने आए तथ्यों और संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित है। लेख का उद्देश्य सूचना देना है, न कि किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना। सभी आरोप जांच के अधीन हैं और संबंधित व्यक्ति कानूनन तब तक निर्दोष माने जाएंगे, जब तक सक्षम प्राधिकारी या न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध न हो जाए।

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Tanu K

Tarannum, born on July 12, 1993, in the vibrant city of Gorakhpur, Uttar Pradesh, is a passionate content writer with a knack for storytelling. After earning her Bachelor’s in English from DDU, Gorakhpur, she dove into the world of words, driven by her love for crafting meaningful narratives. With seven years of experience, Tarannum has penned captivating content for niches like wellness, education, and e-commerce. Her writing is fresh, relatable, and SEO-savvy, connecting effortlessly with readers. From freelancing for local startups to strategizing content for a leading digital agency, she’s honed her skills in blogs, ad copy, and social media. In her downtime, Tarannum enjoys reading fiction and mentoring young writers, dreaming of stories that spark change.

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