Khan sir 90 रुपये बस किराए को तरसे थे, आज 107 करोड़ के ऑफर को ठुकरा दिया ये है खान सर की ज़िंदादिल सक्सेस स्टोरी
Khan Sir पटना, बिहार एक समय था जब एक साधारण युवक के पास 90 रुपये बस किराए तक के नहीं थे। आज वही शख्स लाखों नहीं, करोड़ों युवाओं के लिए उम्मीद की रोशनी बन चुका है। नाम है – खान सर। एक ऐसा नाम, जो अब सिर्फ कोचिंग की क्लास तक सीमित नहीं, बल्कि युवा सोच का प्रतीक, संघर्ष की आवाज़ और बदलाव की मशाल बन चुका
कहानी की शुरुआत तब हुई जहां ना जुबां थी, ना पहचान
खान सर का बचपन किसी आम गरीब भारतीय बच्चे जैसा नहीं था। कठिनाइयों से भरा, सपनों से लदा और हालात से जूझता हुआ। एक छोटे से कस्बे से निकल कर, उन्होंने अपने हौसले से खुद को तराशा।
Khan Sir कई बार ऐसा हुआ जब पढ़ाई छोड़ने का मन हुआ। जेब में पैसे नहीं थे, पेट में भूख थी, लेकिन दिल में आग थी। एक बार तो ऐसा भी हुआ कि पटना़ से गांव वापस जाने के लिए 90 रुपये नहीं थे। किसी रिश्तेदार से उधार लिया और बस से घर पहुंचे। ये वो वक्त था जब ज़िंदगी ने उन्हें तोड़ने की पूरी कोशिश की लेकिन खान सर टुटे नहीं।
Khan Sir क्यों खास है खान सर का पढ़ाने का तरीका?
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Khan Sir बाजार में सैकड़ों कोचिंग हैं, हजारों टीचर, लेकिन खान सर जैसे गिने-चुने ही होते हैं। उनके पढ़ाने का अंदाज बिल्कुल देसी, मजेदार और दिल से जुड़ा हुआ है।
वो किताबों से ज्यादा ज़मीन से जुड़ी बातें करते हैं। लहजा बिहारी, अंदाज अपना, लेकिन बात सीधी दिल तक जाती है।
उनका यूट्यूब चैनल आज देश का सबसे पॉपुलर एजुकेशन चैनल है, और वो खुद भी भारत के सबसे चहेते शिक्षक बन चुके हैं।
107 करोड़ का ऑफर खान सर ने ठुकराया
Khan Sir जहां दुनिया पैसों के पीछे भाग रही है, वहीं खान सर ने 107 करोड़ रुपये का ऑफर सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि उससे उनके स्टूडेंट्स का नुकसान होता।
एक नामी एजुकेशन कंपनी ने उन्हें करोड़ों में खरीदने का प्रस्ताव रखा, लेकिन खान सर जानते थे की उस डील पर दस्तखत करने का मतलब होगा लाखों गरीब छात्रों के सपनों की कीमत तय करना। फीस बढ़ती, पहुंच घटती लेकिन यही बात उन्हें मंजूर नहीं थी।
पैसा तो हर कोई कमा लेता है, लेकिन भरोसा बहुत मुश्किल से बनता है, ये खान सर के शब्द हैं, जो आज सोशल मीडिया पर एक मिशाल बन चुके हैं।
Khan Sir पढ़ाने वाला नहीं, एक मार्गदर्शक
Khan Sir जब कोई छात्र अपने गांव से निकल कर पहली बार पटना आता है, उसके पास ना अनुभव होता है, ना पहचान। ऐसे में उसे जो सबसे पहले संभालता है, वो है खान सर।
वो सिर्फ पढ़ाते नहीं, गाइड करते हैं, मोटिवेट करते हैं, और बच्चों के साथ एक रिश्ता बनाते हैं। यही कारण है, कि लाखों स्टूडेंट्स उन्हें सिर्फ “टीचर” नहीं, “भाई”, “गुरु”, और “मसीहा” मानते हैं।
Khan Sir जो उन्हें खास बनाते हैं:
जुनून: हर लेक्चर में उनका जुनून साफ झलकता है
सादगी: करोड़ों कमाकर भी जीवन में सादगी बनाए रखना
ईमानदारी: शिक्षा को व्यापार नहीं बनने देना
साहस: सिस्टम की खामियों को बेझिझक उजागर करना
नेतृत्व: बिना राजनीतिक मंशा के लाखों को दिशा देना
Khan Sir संघर्ष, जिसने उन्हें मजबूत बनाया:
गरीबी में बीता बचपन
कोचिंग चलाने में शुरुआती आर्थिक तंगी
राजनीतिक और सोशल मीडिया ट्रोलिंग
थ्रेट कॉल्स और धमकियां
फेक न्यूज और विवादों में जबरन घसीटना
लेकिन हर बार खान सर पहले से ज्यादा मजबूत, ज्यादा शांत, और ज्यादा प्रेरक होकर उभरे।
खान सर सिर्फ बिहार या भारत नहीं, अब ग्लोबल आइकॉन हैं
आज NRI स्टूडेंट्स भी खान सर के लेक्चर देखते हैं। विदेशों से भी उनके लिए अपॉइंटमेंट की डिमांड आती है।
उनकी भाषा भले हिंदी और अवधी में हो, लेकिन संदेश ग्लोबल है, शिक्षा सबका हक है, और सच्चा शिक्षक वही जो सबको साथ लेकर चले।
Khan Sir सीख जो हम सबको लेनी चाहिए:
. परिस्थितियां परिभाषा नहीं बनतीं, फैसला हम बनाते हैं।
2. सादगी में शक्ति है।
3. भरोसे से बड़ी कोई ब्रांडिंग नहीं होती।
4. जो कभी गिरा हो, वही ऊंचाई की असली कीमत समझता है।
5. सफलता अकेले के लिए नहीं, समाज के लिए भी होनी चाहिए।
खान सर की कहानी एक आइना है – जिसमें हर उस युवा को खुद को देखना चाहिए जो हालात से लड़ रहा है। उन्होंने बताया कि “गरीबी कोई शर्म नहीं, लेकिन सपनों को छोटा करना सबसे बड़ी हार है।”
आज जब एजुकेशन भी एक प्रोडक्ट बन चुका है, ऐसे दौर में खान सर जैसे शिक्षक समाज की आत्मा और आशा हैं।
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