Rajasthan University Protest राजस्थान विश्वविद्यालय में शांतिपूर्ण धरने पर पुलिस की कथित मारपीट, क्या माननीय न्यायालय करेगा सख्त कार्रवाई
Rajasthan University Protest राजस्थान विश्वविद्यालय में शांतिपूर्ण धरने के दौरान पुलिस पर छात्रों से मारपीट और अशांति फैलाने के गंभीर आरोप लगे हैं। सवाल उठता है,कि क्या माननीय न्यायालय इन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करेगा
राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में शांति से चल रहे छात्र धरना-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई ने एक बार फिर लोकतांत्रिक अधिकारों और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है,कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, इसके बावजूद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बल प्रयोग कर माहौल को बिगाड़ने का प्रयास किया। इस घटनाक्रम को अब Rajasthan University Protest के रूप में देखा जा रहा है, जो राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बनता जा रहा है।
छात्रों का कहना है,कि वे अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक मांगों को लेकर अनुशासित तरीके से धरना दे रहे थे। किसी प्रकार की न तो नारेबाज़ी थी और न ही अव्यवस्था। इसी दौरान अचानक पुलिस की सख्ती बढ़ गई और लाठीचार्ज जैसी स्थिति बन गई। आरोप है,कि इस कार्रवाई में कई छात्रों को चोटें आईं, जबकि धरने से किसी भी तरह की सार्वजनिक शांति भंग नहीं हुई थी। Rajasthan University Protest से जुड़े इन आरोपों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने मामले को और गंभीर बना दिया। एक्स (पूर्व ट्विटर) सहित अन्य प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे वीडियो में छात्र शांत बैठे दिखाई देते हैं, जबकि पुलिस की ओर से आक्रामक रवैया नजर आता है। छात्रों का आरोप है, कि इसके बाद पूरे घटनाक्रम का दोष उन्हीं पर डालने की तैयारी की गई, ताकि कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके। यही कारण है, कि Rajasthan University Protest अब केवल एक स्थानीय मामला नहीं रह गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है, कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है। यदि किसी धरना-प्रदर्शन के दौरान बिना उकसावे के बल प्रयोग किया जाता है, तो यह अधिकारों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में माननीय न्यायालय स्वतः संज्ञान लेकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दे सकता है। पूर्व में भी अदालतें पुलिसिया ज्यादती के मामलों में स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाती रही हैं, जिससे Rajasthan University Protest में भी न्यायिक हस्तक्षेप की उम्मीद बढ़ गई है।
छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है, कि पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए। उनका कहना है, कि यदि दोषी पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संदेश होगा। साथ ही घायल छात्रों को मुआवज़ा और छात्रों पर लगाए गए सभी आरोप वापस लेने की भी मांग की जा रही है। इन मांगों के साथ Rajasthan University Protest लगातार मजबूत होता जा रहा है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है,कि इस तरह की घटनाएं युवाओं के भीतर व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करती हैं। विश्वविद्यालय विचार और संवाद के केंद्र होते हैं, जहां शांतिपूर्ण असहमति को सुना जाना चाहिए, न कि दबाया जाना चाहिए। Rajasthan University Protest इस बात की परीक्षा बन गया है,कि प्रशासन और न्याय व्यवस्था नागरिक अधिकारों की रक्षा में कितनी संवेदनशील है।
फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। वहीं छात्रों और आम नागरिकों की नजरें माननीय न्यायालय पर टिकी हैं,कि क्या वह इस मामले में हस्तक्षेप कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आदेश देगा। आने वाले दिनों में Rajasthan University Protest न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए एक अहम मिसाल बन सकता है।
निष्कर्ष
राजस्थान विश्वविद्यालय में हुआ यह घटनाक्रम प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह जरूरी है,कि माननीय न्यायालय निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक कुचलने की कोशिश न हो।
अब निगाहें अदालत, प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। Rajasthan University Protest आने वाले दिनों में एक बड़ी मिसाल बन सकता है।