आठवीं फेल ने यूट्यूब को बनाया गुरु, गाजियाबाद में ढाई करोड़ की fake cream factory का पर्दाफाश
fake cream factory दिल्ली क्राइम ब्रांच ने गाजियाबाद के लोनी में चल रही फेक क्रीम फैक्ट्री का खुलासा किया। यूट्यूब से सीखकर बेटनोवेट सी और क्लोप जी जैसी नकली क्रीम बना रहे थे आरोपी, करोड़ों का कारोबार उजागर।
सोचिए, अगर कोई आपसे कहे कि दवाइयों की फैक्ट्री चलाने वाला शख्स पढ़ा लिखा नहीं, बल्कि यूट्यूब देखकर दवा बनाना सीख गया। सुनने में अजीब लगता है, लेकिन गाजियाबाद की यह सच्ची घटना है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने लोनी इलाके में छापा मारकर ऐसी ही एक fake cream factory का खुलासा किया है, जहां से करोड़ों रुपये की नकली मेडिकेटेड क्रीम बरामद की गई।
रविवार को क्राइम ब्रांच की टीम ने गाजियाबाद के लोनी स्थित मीरपुर क्षेत्र में छापा मारा। यहां से बेटनोवेटबेटनोवेट सी, क्लोप जी और अन्य मेडिकेटेड स्किन क्रीम की बड़ी खेप जब्त की गई। पुलिस के मुताबिक, जब्त नकली माल की बाजार कीमत करीब ढाई करोड़ रुपये है। मौके से क्रीम बनाने की मशीनें, भारी मात्रा में पैकिंग मटेरियल, कच्चा माल और तैयार व अधबना स्टॉक भी बरामद हुआ। इस कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी पहचान मुख्य आरोपी गौरव भगत और उसके साथी के रूप में हुई है।
जांच में जो बात सामने आई, उसने पुलिस अधिकारियों को भी चौंका दिया। गिरफ्तार आरोपी पढ़े लिखे नहीं हैं,और आठवीं कक्षा से आगे नहीं पढ़े। मुख्य आरोपी गौरव भगत पहले एक दवा कंपनी से जुड़ा था और दवाइयों की सप्लाई करता था। इसी दौरान उसके दिमाग में नकली दवाएं बनाने का विचार आया। उसने इंटरनेट और यूट्यूब वीडियो देखकर बेटनोवेट-सी और क्लोप-जी जैसी क्रीम बनाने का तरीका सीखा। धीरे धीरे यही सीख एक संगठित fake cream factory में बदल गई।
आरोपियों ने आनंद पर्वत इलाके से मशीनें खरीदीं और अलग अलग राज्यों से कच्चा माल मंगाया। करीब छह साल पहले इस अवैध धंधे की शुरुआत की गई। पहले सीमित मात्रा में नकली क्रीम बाजार में उतारी गई, ताकि किसी को शक न हो। जैसे जैसे मांग बढ़ी, वैसे वैसे सप्लाई भी बढ़ती चली गई। पुलिस जांच में सामने आया है, कि यूपी और दिल्ली के अलावा कई अन्य राज्यों में भी इस fake cream factory की सप्लाई पहुंच रही थी। बीते तीन महीनों से यह फैक्ट्री लोनी के मीरपुर इलाके में सक्रिय थी।
सबसे गंभीर पहलू मुनाफे का गणित है। पुलिस के अनुसार, एक ट्यूब नकली क्रीम बनाने में महज डेढ़ से दो रुपये का खर्च आता था। इन्हें होलसेल में 12 से 15 रुपये में बेचा जाता था जबकि बाजार में यही क्रीम 70 से 100 रुपये तक में बिकती है। इसी बड़े अंतर ने आरोपियों को मोटा मुनाफा दिया। लेकिन इस मुनाफे की कीमत आम लोगों की सेहत ने चुकाई। नकली मेडिकेटेड क्रीम त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है और लंबे समय में जानलेवा भी साबित हो सकती है।
दिल्ली स्पेशल क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है,कि इस fake cream factory से जुड़े आरोपियों ने अवैध तरीके से करोड़ों की संपत्ति बनाई है। अब उनकी चल अचल संपत्तियों की जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई भी की जाएगी। साथ ही, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश के लिए लगातार पूछताछ जारी है।
यह मामला सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि एक चेतावनी भी है। सस्ती दवाइयों और क्रीम के लालच में लोग अक्सर यह नहीं देखते कि वे किससे खरीद रहे हैं। fake cream factory जैसे रैकेट इसी लापरवाही का फायदा उठाते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है, कि हमेशा अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदें और संदिग्ध पैकिंग या बेहद सस्ते दाम देखकर सतर्क हो जाएं।
दिल्ली क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई बताती है,कि पुलिस की सतर्कता से ऐसे खतरनाक रैकेट पर लगाम लगाई जा सकती है। लेकिन समाज को भी जागरूक होना होगा, ताकि भविष्य में कोई और fake cream factory लोगों की सेहत से खिलवाड़ न कर सके।
Disclaimer यह समाचार पुलिस जांच और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। मामले में आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान तथ्य बदल सकते हैं। किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने का अंतिम निर्णय न्यायालय का अधिकार क्षेत्र है।