Gorakhpur News: डीडीयू विश्वविद्यालय में आरटीआई से मचा बवाल, मानदेय भुगतान पर उठे गंभीर सवाल
Gorakhpur News में बड़ा खुलासा, डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर की आरटीआई से परिसर में चर्चाएं तेज, प्रशासनिक प्रकोष्ठ में मानदेय भुगतान की मांगी गई पूरी जानकारी
कभी कभी एक आरटीआई पूरे सिस्टम की परतें खोलने की ताकत रखती है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में ऐसा ही एक मामला इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। Gorakhpur News के मुताबिक कला संकाय के एक प्रोफेसर द्वारा 20 नवंबर को दायर की गई आरटीआई अब विश्वविद्यालय परिसर से निकलकर आम बहस का विषय बन चुकी है। यह आरटीआई हाल के दिनों में वायरल हुई, जिसके बाद शिक्षक, कर्मचारी और छात्र सभी के बीच सवाल उठने लगे हैं।
इस आरटीआई में प्रोफेसर ने विश्वविद्यालय के एक महत्वपूर्ण प्रकोष्ठ से जुड़े पांच बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। खास तौर पर उस प्रकोष्ठ में प्रशासनिक दायित्व निभा रहे शिक्षकों को मानदेय के रूप में दी गई राशि का पूरा ब्योरा तलब किया गया है। Gorakhpur News में सामने आई जानकारी के अनुसार, यह प्रकोष्ठ विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है, ऐसे में सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।
आरटीआई के सामने आने के बाद डीडीयू परिसर में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे विश्वविद्यालय के भीतर चल रही गुटबाजी से जोड़कर देख रहे हैं। Gorakhpur News से जुड़े जानकारों का कहना है,कि उच्च शिक्षण संस्थानों में RTI Act का इस्तेमाल पहले भी कई बार वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को उजागर करने में अहम साबित हुआ है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आरटीआई का आधिकारिक जवाब आना बाकी है। Gorakhpur News में इस मुद्दे को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि मामला सीधे तौर पर मानदेय भुगतान और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है, कि यदि सभी भुगतान नियमों के तहत हुए हैं, तो स्पष्ट जानकारी सामने आने से विवाद स्वतः खत्म हो जाएगा।
यह भी एक सच्चाई है कि Gorakhpur News जैसे मामलों में जवाबदेही तय होना विश्वविद्यालय की साख के लिए जरूरी होता है। आरटीआई का उद्देश्य किसी व्यक्ति को कटघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है। आने वाले दिनों में जैसे ही आरटीआई का जवाब सार्वजनिक होगा, यह साफ हो जाएगा कि मामला संभावित अनियमितता का है, या केवल आंतरिक मतभेद का।
कुल मिलाकर Gorakhpur News में डीडीयू विश्वविद्यालय से जुड़ा यह घटनाक्रम यह संदेश देता है, कि अब शैक्षणिक संस्थानों में भी सवाल पूछे जा रहे हैं, और जवाब की उम्मीद की जा रही है। यह प्रक्रिया जितनी साफ होगी, उतना ही भरोसा मजबूत होगा।
Disclaimer यह समाचार उपलब्ध तथ्यों और सूत्रों पर आधारित है। आरटीआई का अंतिम जवाब आने के बाद स्थिति में बदलाव संभव है। लेख का उद्देश्य सूचना देना है, किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं।