Gorakhpur Police Line roof collapse accidentगोरखपुर पुलिस लाइन मे बड़ा हादसा – जर्जर सरकारी मकान की छत ढही, दीवान की पत्नी गंभीर घायल, प्रशासन पर उठे सवाल
Gorakhpur Police Line roof collapse accident
गोरखपुर की पुलिस लाइन में रविवार को ऐसा हादसा हुआ जिसने फिर से सरकारी लापरवाही की पोल खोल दी। एलआईयू कार्यालय के सामने बने एक पुराने सरकारी आवास की जर्जर छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसके मलबे में दीवान की पत्नी दब गईं। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सरकारी विभागों की उदासीनता और ढीली कार्यप्रणाली का ताजा सबूत है।

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Gorakhpur Police Line roof collapse accident दशकों पुराने मकान, फाइलों में मरम्मत – हकीकत में खंडहर
पुलिस लाइन में बने अधिकांश सरकारी मकान दशकों पुराने हैं। मरम्मत के नाम पर फाइलें घूमती रहती हैं, टेंडर पास होते हैं, बजट स्वीकृत होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नाममात्र का ही होता है।
Gorakhpur Police Line roof collapse accident स्थानीय पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बाद भी विभाग ने आंखें मूंद लीं। घटना के बाद मरम्मत विभाग के इंजीनियर ने ‘हमें जानकारी नहीं थी’ कहकर पल्ला झाड़ लिया, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया।
जिम्मेदारी किसकी?
कई बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं – इससे यह स्पष्ट है कि अधिकारी केवल फाइलों में औपचारिकता निभा रहे थे।
अब तक किसी भी जिम्मेदार अफसर पर निलंबन या सख्त कार्रवाई की खबर नहीं आई जिससे करण पुलिसकर्मियों के बीच आक्रोश है।
सबसे बड़ा सवाल – वर्दीधारियों के परिवारों की सुरक्षा पर इतनी लापरवाही क्यों कौन सुनिश्चित करेगा?
जनता और पुलिस परिवार की मांग
1️⃣ सभी पुराने भवनों का तकनीकी ऑडिट तुरंत कराया जाए।
2️⃣ दोषी इंजीनियरों और अधिकारियों पर सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई हो।
3️⃣ मरम्मत कार्यों की पारदर्शी निगरानी और तय समयसीमा अनिवार्य की जाए।
4️⃣ पुलिसकर्मियों के परिवारों के लिए सुरक्षित और आधुनिक आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
Gorakhpur Police Line roof collapse accident प्रशासन की लापरवाही की असलियत
यह घटना दिखाती है कि फील्ड में काम से ज्यादा फाइलों पर हस्ताक्षर और बैठकों की औपचारिकता निभाई जाती है। धरातल पर काम नहीं होता
Gorakhpur Police Line roof collapse accidentप्रशासन के बड़े अफसर घटनास्थल पर नहीं पहुंचे, और अब तक केवल “जांच के आदेश” की खानापूर्ति की गई। कोई ठोस कार्रवाई नहीं
ऐसा लगता है कि जब तक कोई बड़ी जानलेवा घटना न हो जाए, तब तक बजट का वास्तविक उपयोग और जवाबदेही केवल कागजों में ही रहती है।
Gorakhpur Police Line roof collapse accident यह हादसा क्यों खास है?
हादसा पुलिस लाइन जैसी संवेदनशील जगह पर हुआ है,जहां सुरक्षा और संसाधनों की कमी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
यह दर्शाता है, कि जो लोग कानून-व्यवस्था संभालते हैं, उनके अपने परिवार तक सुरक्षित नहीं हैं। दूसरों की सुरक्षा करने वाले खुद मुसीबत में हूं।
घटना ने सरकारी सिस्टम की खामियों को एक बार फिर बेनकाब कर दिया।
Gorakhpur Police Line roof collapse accident लोगों का गुस्सा क्यों बढ़ रहा है?
कोई भी अधिकारी मौके पर आकर पीड़ित परिवार का हालचाल तक लेने नहीं आए
विभागीय इंजीनियर का बयान – “हमें जानकारी नहीं थी” – इस बात का सबूत है कि जवाबदेही नाम की चीज खत्म हो चुकी है।
अब तक न किसी अधिकारी का निलंबन, न किसी विभाग की जवाबदेही तय हुई।
Gorakhpur Police Line roof collapse accident अब वक्त है बदलाव का!
अगर इस बार भी कार्रवाई सिर्फ फाइलों में रह गई, तो आने वाले समय में ऐसा कोई बड़ा हादसा और बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है।
जरूरी है कि:
जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई हो।
जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए तय समयसीमा लागू हो।
मरम्मत कार्यों पर पारदर्शी निगरानी की व्यवस्था बने।
गोरखपुर पुलिस लाइन में हुआ यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं बल्कि सरकारी सिस्टम की लापरवाही का आइना है।
जब तक विभागीय जिम्मेदारियों को स्पष्ट कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
Gorakhpur Police Line roof collapse accident अब वक्त आ गया है कि प्रशासन सिर्फ जांच के आदेश देने की बजाय जमीन पर काम करे, वरना अगली बड़ी त्रासदी सिर्फ वक्त की बात होगी।
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