Lalitpur Fortuner Accident ललितपुर में सत्ता की फॉर्च्यूनर का कहर राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ की गाड़ी से तीन लोग कुचले, एक की मौत, मंत्री पुत्र पर नशे और फरारी का आरोप
ललितपुर में राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ Lalitpur Fortuner Accident की फॉर्च्यूनर से बड़ा हादसा, एक की मौत दो घायल, मंत्री पुत्र पर नशे में होने और फरार होने का आरोप
उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में हुआ Lalitpur Fortuner Accident सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सत्ता की जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन गया है। आरोप है, कि यूपी सरकार में राज्यमंत्री और BJP विधायक मनोहर लाल पंथ की फॉर्च्यूनर कार ने तीन लोगों को कुचल दिया, जिसमें एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना भीषण था कि सड़क पर चीख पुकार मच गई। घायलों को आनन फानन में अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया। यह Lalitpur Fortuner Accident इलाके में गुस्से और आक्रोश का कारण बन गया।
थाने में दी गई लिखित शिकायत के अनुसार, हादसे के वक्त गाड़ी में मंत्री का बेटा अपने दोस्तों के साथ मौजूद था और सभी नशे की हालत में बताए जा रहे हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि मंत्री पुत्र हादसे के बाद मौके से फरार हो गया। इस आरोप ने Lalitpur Fortuner Accident को और भी संवेदनशील और गंभीर बना दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही घटना किसी आम नागरिक की गाड़ी से हुई होती, तो अब तक सख्त कार्रवाई हो चुकी होती। लेकिन Lalitpur Fortuner Accident में सत्ता से जुड़े नाम सामने आने के बाद कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और शिकायत के आधार पर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयान खंगाले जा रहे हैं। हालांकि अभी तक इस Lalitpur Fortuner Accident में किसी की गिरफ्तारी को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी प्रभावशाली नेता या उसके परिजनों पर गंभीर आरोप लगे हों और आम लोगों को न्याय के लिए इंतज़ार करना पड़ा हो। Lalitpur Fortuner Accident ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या कानून सभी के लिए बराबर है
अब सबकी निगाहें प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि इस Lalitpur Fortuner Accident में पीड़ितों को न्याय मिलता है या मामला रसूख की ताकत में दबा दिया जाता है।
यह लेख पुलिस में दी गई शिकायत, प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी और प्रारंभिक तथ्यों पर आधारित है। सभी आरोप जांच के अधीन हैं। दोष सिद्ध होने तक किसी को भी अपराधी नहीं माना जाना चाहिए। प्रकाशक निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करता है।
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