Lucknow Codeine Scandal: एक साधारण कांस्टेबल का ‘महल’ और सिस्टम पर उठते बड़े सवाल
Lucknow Codeine Scandal में कांस्टेबल आलोक सिंह पर अवैध कमाई से महल बनाने के आरोप, कोडीन सिरप मौतों की जांच पुलिस कार्रवाई, सिस्टम पर उठे सवाल।
लखनऊ का यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ एक साधारण कांस्टेबल आलोक सिंह पर आरोप है,कि उसने अपनी सरकारी नौकरी की आय से कहीं अधिक मूल्य का एक आलीशान महल खड़ा कर लिया। यह मुद्दा सिर्फ एक घर का नहीं, बल्कि उस पूरे Lucknow Codeine Scandal का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें कोडीन युक्त सिरप की अवैध बिक्री का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। कोडीन से जुड़े इस अवैध धंधे ने कई मासूम बच्चों की जान ले ली, और परिवार आज भी न्याय की तलाश में हैं। इस पूरे मामले ने पुलिस प्रशासन राजनीतिक संरक्षण और सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस जांच में कई ऐसे सुराग मिले हैं,जो संकेत देते हैं,कि Illegal Codeine Trade के जरिए वर्षों से एक बड़ा गिरोह सक्रिय था। इस गिरोह में कौन कौन शामिल था, किसने संरक्षण दिया, किसने नजरअंदाज किया इन सवालों के जवाब अभी भी खोजे जा रहे हैं। लेकिन जनता का गुस्सा इस बात पर है, कि बच्चों की मौत का कारण बनी इस खतरनाक दवा से जुड़े असली अपराधी अभी तक बेखौफ घूम रहे हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है, कि Lucknow Codeine Scandal में शामिल हर व्यक्ति चाहे कितना भी बड़ा पद या राजनीतिक सामर्थ्य क्यों न रखता हो, उसे कानून के कटघरे में खड़ा होना चाहिए।
एक कांस्टेबल की वैतनिक आय बेहद सीमित होती है। ऐसे में आरोप लग रहे हैं, कि कोडीन सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े लोग अचानक अमीरी की ऊँचाइयों पर पहुँच गए। कई स्थानीय लोगों ने आरोप लगाए कि कुछ अधिकारियों ने इस अवैध व्यापार को समय रहते रोकने की जगह वर्षों तक अनदेखा किया। सोशल मीडिया और जनता के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है, कि क्या Illegal Codeine Trade वास्तव में बिना किसी राजनीतिक या आर्थिक सहयोग के चल सकता है, अगर नहीं, तो इस पूरे नेटवर्क की जड़ें कहाँ तक फैली थीं
जांच की प्रारंभिक रिपोर्टों में यह सामने आया कि कोडीन आधारित खांसी की दवाइयाँ जिनका प्रयोग सामान्य बीमारियों के लिए होना चाहिए था, उन्हें नशे के रूप में बड़ी मात्रा में बेचा जा रहा था। इस तरह के अवैध धंधे में शामिल लोग अन्य राज्यों से भी सिरप लाकर Lucknow सहित कई शहरों में सप्लाई करते थे। यही कारण है, कि इसे अब Lucknow Codeine Scandal का नाम दिया गया है, और इसे एक राज्यव्यापी नेटवर्क माना जा रहा है। पुलिस सूत्रों का कहना है,कि इस नेटवर्क में शामिल कई लोगों की पहचान कर ली गई है,और कार्रवाई जारी है।
इस मामले में कांस्टेबल आलोक सिंह का नाम इसलिए सुर्खियों में आया क्योंकि उनके विशालकाय महल को लेकर जांच एजेंसियों को आय से अधिक संपत्ति के कई सवाल मिले। हालांकि अंतिम निर्णय जांच के बाद ही होगा, लेकिन इतना तय है,कि यह मामला अब केवल “एक सिपाही की संपत्ति” का नहीं रहा। यह उस पूरे सिस्टम का आईना बन चुका है,जो अपराधियों के सामने कमजोर दिखने लगता है। यही कारण है,कि लोग पूछ रहे हैं,अगर अपराधी खुलेआम महल बनाते रहें और सिस्टम चुप रहे, तो फिर आम नागरिक किससे न्याय की उम्मीद करे?
विशेषज्ञों का कहना है,कि कोडीन के अवैध कारोबार को रोकने के लिए सख्त कानून तो हैं, लेकिन लागू करने की मंशा कमजोर पड़ जाती है, जब अपराधी सत्ता या संरक्षण के कारण बेखौफ रहते हैं। यही वजह है, कि आज लोग इसे “रामराज” का उल्टा चेहरा कहकर व्यंग्य कर रहे हैं,जहाँ अपराधी मजबूत और कानून बेबस दिखता है। लेकिन सच यही है, कि किसी भी समाज में न्याय तब तक जीवित नहीं रह सकता जब तक हर आरोपी पर समान कार्रवाई न हो, चाहे वह किसी भी पद पर हो या किसी भी प्रभाव का मालिक।
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पीड़ित परिवारों का साफ कहना है,कि Lucknow Codeine Scandal में शामिल हर छोटे बड़े व्यक्ति को सजा मिलनी चाहिए। इन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है,उनके लिए यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि ज़िंदगी भर का दर्द है। वे मांग करते हैं, कि कोडीन सिरप की अवैध बिक्री की पूरी चैन को सार्वजनिक किया जाए, और जिन्होंने भी इस नेटवर्क को मजबूत बनाया, उन सभी को जेल भेजा जाए। समाज तभी सुरक्षित हो सकता है,जब असली अपराधी सलाखों के पीछे हों और सिस्टम पर जनता का भरोसा वापस लौटे।
Disclaimer इस लेख में उल्लिखित सभी नाम, घटनाएँ और आरोप केवल उपलब्ध जानकारी, मीडिया रिपोर्ट्स, शिकायतों और जांच की सार्वजनिक स्थिति पर आधारित हैं। किसी भी व्यक्ति को दोषी साबित करने का अधिकार केवल न्यायालय और सरकारी जांच एजेंसियों के पास है। यह लेख महज जनहित, जागरूकता और समाचार आधारित विश्लेषण के उद्देश्य से लिखा गया है।
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