Medicine Shop Ban in Gorakhpur जिला अस्पताल के सामने दवा दुकानों पर गिरी गाज 7 मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस होंगे निरस्त
प्रस्तावना
Medicine Shop Ban in Gorakhpur गोरखपुर में जिला अस्पताल के सामने चल रही दवा दुकानों पर प्रशासन की कड़ी नज़र पड़ गई है। हाल ही में सामने आई घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खबर है, कि सात मेडिकल दुकानों का लाइसेंस रद्द (License Cancellation) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई उस समय सामने आई जब मरीजों से महंगी दवाएं खरीदने के लिए जबरन दबाव बनाने और एजेंटों द्वारा मारपीट करने जैसी घटनाएं उजागर हुईं।
यह सिर्फ दवा दुकानों का मामला नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र, मरीजों की सुरक्षा और पारदर्शिता की असलियत सामने लाने वाला बड़ा कदम है।
घटना की पृष्ठभूमि: मरीजों पर महंगी दवा लेने का दबाव
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गोरखपुर के जिला अस्पताल में अक्सर मरीजों और उनके परिजनों से शिकायतें मिलती रही हैं,कि कुछ मेडिकल एजेंट उन्हें खास दुकानों से दवा खरीदने के लिए दबाव डालते हैं।
जो लोग इनकार करते, उनके साथ बदसलूकी की जाती।
महंगी दवाओं को सस्ती दवा बताकर थमाया जाता।
जबकि जनऔषधि केंद्र (Jan Aushadhi Kendra) पर वही दवाएं बहुत कम कीमत पर उपलब्ध रहतीं।
20 अगस्त 2025 को इस खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब एक मरीज के तीमारदार ने महंगी दवा लेने से इनकार कर दिया। इससे गुस्साए एजेंटों ने अस्पताल परिसर में घुसकर मारपीट कर दी।
Medicine Shop Ban in Gorakhpur पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना के बाद नजीबाबाद थाने में तहरीर दी गई और पुलिस ने तुरंत केस दर्ज किया।
सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी ने मौके पर निरीक्षण किया।
पुलिस ने पांच सदस्यीय टीम गठित की जिसने अस्पताल के सामने चल रही दवा दुकानों की गहन जांच की।
एजेंटों के नाम और उनके जुड़े मेडिकल स्टोर्स की जानकारी जुटाई गई।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि एजेंटों की सांठगांठ अस्पताल के सामने मौजूद कुछ दुकानों से है, और मरीजों को ठगने का यह खेल लंबे समय से चल रहा था।
सात मेडिकल दुकानों पर कार्रवाई की तैयारी
Medicine Shop Ban in Gorakhpur पुलिस ने ड्रग कंट्रोल विभाग को पत्र भेजकर सात मेडिकल दुकानों के लाइसेंस निरस्त करने की सिफारिश की है।
अभी दुकानों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
जिला प्रशासन (DM गोरखपुर) को भी पूरे मामले से अवगत कराया गया है।
लाइसेंस निरस्त होते ही इन दुकानों का संचालन बंद हो जाएगा।
यह कदम प्रशासन की ओर से सख्त संदेश है कि मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।
Medicine Shop Ban in Gorakhpur पहले भी हो चुकी हैं घटनाएँ
गोरखपुर के जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के पास मेडिकल दुकानों पर कई बार सवाल उठ चुके हैं।
पहले भी महंगी दवाओं की साजिशें सामने आई थीं।
शिकायतों के बावजूद कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई थी।
मरीजों को अक्सर कहा जाता कि “यही दवा असर करेगी, बाकी काम नहीं करेगी।”
ऐसी घटनाओं ने बार-बार यह साबित किया है, कि अस्पताल परिसर में दवा दुकानों का नेटवर्क माफिया जैसी कार्यप्रणाली अपनाता है।
Medicine Shop Ban in Gorakhpur समाज और प्रशासन पर असर
नकारात्मक पहलू
गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों पर आर्थिक बोझ।
स्वास्थ्य व्यवस्था में विश्वास की कमी।
प्रशासन की ढिलाई से एजेंटों की दबंगई बढ़ती रही।
सकारात्मक पहलू
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पुलिस और प्रशासन ने इस बार तुरंत कार्रवाई की।
Drug Control Department को पत्र भेजकर लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करना एक सकारात्मक संकेत है।
यह कार्रवाई अन्य दुकानों और एजेंटों के लिए कड़ा संदेश है।
निष्कर्ष
Medicine Shop Ban in Gorakhpur जिला अस्पताल के सामने 7 मेडिकल दुकानों के लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई केवल प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि यह मरीजों के हितों की रक्षा की दिशा में बड़ा बदलाव है। अब वक्त आ गया है, कि अस्पताल परिसर और मेडिकल स्टोर्स में पारदर्शिता लाई जाए और ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए।
मरीजों का हक है, कि उन्हें सस्ती और असली दवा मिले, न कि माफियाओं की मनमानी। यह कार्रवाई निश्चित रूप से आने वाले समय में गोरखपुर ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे में सुधार लाने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
FAQs
गोरखपुर जिला अस्पताल के सामने कितनी दवा दुकानों के लाइसेंस निरस्त होंगे?
कुल 7 दुकानों के लाइसेंस निरस्त करने की सिफारिश की गई है।
दुकानों के नाम सार्वजनिक हुए हैं क्या?
अभी तक प्रशासन ने दुकानों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
कार्रवाई क्यों की गई?
मरीजों से महंगी दवा लेने के लिए दबाव डालने और एजेंटों द्वारा मारपीट करने की घटनाओं के कारण।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
ड्रग कंट्रोल विभाग और डीएम की अनुमति के बाद दुकानों के लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएंगे।
इस कार्रवाई से क्या फर्क पड़ेगा?
Medicine Shop Ban in Gorakhpur इससे मेडिकल माफियाओं को कड़ा संदेश जाएगा और मरीजों को सस्ती और असली दवाएं उपलब्ध कराने की राह खुलेगी।