Namo Bharat Train FIR: चलती ट्रेन में अश्लील हरकत, छात्र-छात्रा और कर्मचारी पर केस

Written by: Tanu K

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Namo Bharat Train FIR: चलती ट्रेन में शर्मनाक हरकत, वीडियो वायरल होते ही पुलिस और NCRTC की सख्त कार्रवाई

Namo Bharat Train FIR के तहत दिल्ली मेरठ रूट पर सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य, वीडियो वायरल और आईटी एक्ट में एफआईआर। जानिए पूरी कार्रवाई और सजा का प्रावधान।

कभी कभी एक वीडियो पूरे समाज को झकझोर देता है। दिल्ली मेरठ के बीच दौड़ने वाली अत्याधुनिक नमो भारत ट्रेन से सामने आया मामला भी कुछ ऐसा ही है। आरामदायक और सुरक्षित यात्रा के लिए शुरू की गई इस ट्रेन में कुछ ऐसा हुआ, जिसने यात्रियों की सुरक्षा, सार्वजनिक शालीनता और डिजिटल जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। Namo Bharat Train FIR के बाद अब यह मामला सिर्फ सोशल मीडिया की बहस नहीं, बल्कि कानून के दायरे में है।

Namo Bharat Train FIR: चलती ट्रेन में अश्लील हरकत, छात्र-छात्रा और कर्मचारी पर केस
Namo Bharat Train FIR: चलती ट्रेन में अश्लील हरकत, छात्र-छात्रा और कर्मचारी पर केस

करीब एक सप्ताह पहले सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो क्लिप वायरल हुए। इनमें चलती नमो भारत ट्रेन की सीट पर बैठे एक लड़का और लड़की आपत्तिजनक स्थिति में नजर आए। दोनों के पहनावे और बैग से उनके किसी कॉलेज के छात्र होने का दावा किया गया। सोशल मीडिया पर यह भी कहा गया कि युवक बीटेक और युवती बीसीए की छात्रा है, हालांकि पुलिस ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। वीडियो वायरल होते ही लोगों में नाराजगी फैल गई और कड़ी कार्रवाई की मांग उठने लगी। इसी बीच Namo Bharat Train FIR दर्ज होने का रास्ता साफ हुआ।

इस मामले में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम यानी एनसीआरटीसी ने खुद पहल की। एनसीआरटीसी की ओर से मुरादनगर थाने में शिकायत दी गई। इसके आधार पर पुलिस ने छात्र छात्रा के साथ साथ वीडियो वायरल करने वाले कर्मचारी के खिलाफ भी केस दर्ज किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, Namo Bharat Train FIR भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की कई धाराओं में दर्ज की गई है। यह साफ संदेश है,कि सार्वजनिक परिवहन में अनुशासन और मर्यादा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो ट्रेन के सीसीटीवी सिस्टम से रिकॉर्ड किया गया था। इस वीडियो को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डालने का आरोप ऑपरेटर रिषभ कुमार पर है। एनसीआरटीसी ने शुरुआती जांच के बाद उसे तत्काल नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। अब उसके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हो चुकी है। Namo Bharat Train FIR में कर्मचारी पर गोपनीयता भंग करने और अश्लील सामग्री के प्रसारण का आरोप है, जो कानूनन गंभीर अपराध माना जाता है।

एसीपी मसूरी सर्किल लिपि नगायच ने बताया कि इस केस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, धारा 77 और आईटी एक्ट की धारा 67 लगाई गई है। धारा 296 सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य से जुड़ी है, जबकि धारा 77 दृश्यरति यानी किसी की निजी गतिविधि को रिकॉर्ड या प्रसारित करने से संबंधित है। आईटी एक्ट की धारा 67 इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण पर लागू होती है। इन धाराओं के तहत Namo Bharat Train FIR को मजबूत माना जा रहा है।

अब सवाल यह है, कि दोष साबित होने पर सजा कितनी हो सकती है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, धारा 296 के तहत अधिकतम तीन महीने की कैद या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। धारा 77 के तहत न्यूनतम एक साल से लेकर अधिकतम तीन साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत भी कड़ी सजा का प्रावधान है। यानी Namo Bharat Train FIR में आरोप सिद्ध होने पर आरोपियों को जेल जाना पड़ सकता है।

फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता वीडियो में दिख रहे छात्र छात्रा की पहचान करना है। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज, टिकटिंग डेटा और ट्रेन के रूट की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी देख रही है,कि दोनों किस स्टेशन से चढ़े और कहां उतरे। साथ ही यह भी जांच का विषय है, कि वीडियो कितने लोगों तक पहुंचा और किस स्तर पर गोपनीयता का उल्लंघन हुआ। Namo Bharat Train FIR की जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस घटना के बाद एनसीआरटीसी ने संकेत दिए हैं, कि कर्मचारियों के लिए सीसीटीवी डेटा एक्सेस को लेकर और सख्त नियम बनाए जाएंगे। साथ ही यात्रियों की निजता और सार्वजनिक शालीनता बनाए रखने के लिए नई गाइडलाइंस पर भी विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं,कि Namo Bharat Train FIR आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन से जुड़े मामलों के लिए एक नजीर बन सकता है।

यह मामला याद दिलाता है,कि सार्वजनिक स्थानों पर निजी सीमाओं का सम्मान और डिजिटल माध्यमों का जिम्मेदार इस्तेमाल कितना जरूरी है। कानून न सिर्फ सजा देने के लिए है, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने के लिए भी है। Namo Bharat Train FIR इसी दिशा में एक कड़ा और जरूरी कदम माना जा रहा है।

Disclaimer यह लेख पुलिस एफआईआर, अधिकारियों के बयानों और उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं पर आधारित है। मामला जांच के अधीन है। जब तक अदालत से दोष सिद्ध न हो जाए, सभी आरोपी कानून की नजर में निर्दोष माने जाएंगे।

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Tanu K

Tarannum, born on July 12, 1993, in the vibrant city of Gorakhpur, Uttar Pradesh, is a passionate content writer with a knack for storytelling. After earning her Bachelor’s in English from DDU, Gorakhpur, she dove into the world of words, driven by her love for crafting meaningful narratives. With seven years of experience, Tarannum has penned captivating content for niches like wellness, education, and e-commerce. Her writing is fresh, relatable, and SEO-savvy, connecting effortlessly with readers. From freelancing for local startups to strategizing content for a leading digital agency, she’s honed her skills in blogs, ad copy, and social media. In her downtime, Tarannum enjoys reading fiction and mentoring young writers, dreaming of stories that spark change.

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